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रिक्शा चलाने से लेकर मंत्री बनने तक का सफर.., कौन हैं रत्नेश सदा, संघर्ष की कहानी सुन भर आएगीं आंखें
Bihar Cabinet Expansion: बिहार में सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान कई नए चेहरों को मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली।
Ratnesh Sada
Who Is Ratnesh Sada: बिहार में गुरुवार को सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान कई नए चेहरों को मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली। एनडीए के घटक दलों बीजेपी, जेडीयू और अन्य सहयोगी पार्टियों के विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा रत्नेश सदा के नाम की हो रही है। रत्नेश सदा का राजनीतिक और व्यक्तिगत संघर्ष लोगों के बीच प्रेरणा का विषय बन गया है। मजदूर के बेटे से मंत्री बनने तक का उनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं माना जा रहा।
बेहद साधारण परिवार में हुआ रत्नेश सदा का जन्म
55 वर्षीय रत्नेश सदा बिहार के सहरसा जिले की सोनबरसा विधानसभा सीट से जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधायक हैं। उनके मंत्री बनने की खबर मिलते ही उनके गांव बलिया सिमर में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोग इसे संघर्ष और मेहनत की जीत बता रहे हैं। रत्नेश सदा का जन्म बेहद साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता दिहाड़ी मजदूर थे और परिवार आर्थिक तंगी से जूझता था। शुरुआती दिनों में घर चलाने के लिए रत्नेश सदा ने रिक्शा तक चलाया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी और स्नातक तक की शिक्षा पूरी की। गांव और आसपास के लोग बताते हैं कि उन्होंने हमेशा मेहनत और संघर्ष के दम पर आगे बढ़ने की कोशिश की।
1987 में की सियासी करियर की शुरुआत
राजनीतिक जीवन की बात करें तो रत्नेश सदा ने अपने करियर की शुरुआत साल 1987 में की थी। उन्होंने जमीनी स्तर पर संगठन के लिए काम किया और धीरे-धीरे पार्टी में अपनी मजबूत पहचान बनाई। बाद में वह जनता दल यूनाइटेड के महादलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष भी बने। पार्टी संगठन में सक्रियता और जनता के बीच मजबूत पकड़ के कारण उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीबी और भरोसेमंद नेता माना जाता है।
2010 में सोनबरसा सीट से हासिल की थी जीत
रत्नेश सदा ने पहली बार साल 2010 में सोनबरसा विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने लगातार 2015, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज कर इस सीट को जेडीयू का मजबूत गढ़ बना दिया। लगातार चार बार विधायक बनने के बाद अब उन्हें फिर से मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली है। इससे पहले भी रत्नेश सदा बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2023 में संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे के बाद उन्हें मद्य निषेध विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मंत्री रहते हुए उन्होंने जहरीली शराब के मामलों पर सख्ती दिखाई और शराब माफियाओं के खिलाफ कड़े कानून लागू करने की वकालत की। उनके कई फैसले उस समय चर्चा में रहे थे। अब राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सम्राट चौधरी सरकार में रत्नेश सदा को कौन सा विभाग सौंपा जाएगा।


