Punjab में फिर साथ आएंगे BJP और अकाली दल! Diwali के बाद होगा गठबंधन का ऐलान, PM मोदी की रैली में बनेगी बात

BJP Akali Dal Alliance: इस गठबंधन की घोषणा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की बठिंडा में एक बड़ी रैली आयोजित करने की योजना है।

Priya Singh Bisen
Published on: 30 Oct 2026 12:07 PM IST (Updated on: 30 Oct 2026 12:07 PM IST)
Punjab में फिर साथ आएंगे BJP और अकाली दल! Diwali के बाद होगा गठबंधन का ऐलान, PM मोदी की रैली में बनेगी बात
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BJP Akali Dal Alliance: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है। करीब छह साल पहले अलग हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) के बीच दोबारा गठबंधन की राह लगभग साफ होती दिखाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों दल 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election 2027) में मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। गठबंधन को लेकर बातचीत आगे बढ़ चुकी है और दिवाली के बाद गुरु नानक जयंती के आसपास इसका औपचारिक ऐलान हो सकता है।

इस गठबंधन की घोषणा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की बठिंडा में एक बड़ी रैली आयोजित करने की योजना है। माना जा रहा है कि इसी रैली के मंच से बीजेपी और अकाली दल के फिर एक साथ आने का ऐलान किया जा सकता है। बठिंडा को बादल परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। ऐसे में गठबंधन की घोषणा के लिए इस शहर का चयन अपने आप में महत्वपूर्ण सियासी संदेश दे सकता है।

2027 चुनाव से पहले पंजाब में बदलेगा सियासी समीकरण

पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित गठबंधन में बीजेपी 47 से 48 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि बाकी सीटों पर शिरोमणि अकाली दल अपने उम्मीदवार उतार सकता है। हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

BJP की रणनीति इस बार पहले के मुकाबले ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की बताई जा रही है। पार्टी पंजाब में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाना चाहती है। वहीं, अकाली दल के लिए भी बीजेपी के साथ दोबारा हाथ मिलाना चुनावी लिहाज से अहम हो सकता है।

अमित शाह के बयान के बाद सुखबीर बादल ने भी दिए थे संकेत

BJP और अकाली दल के बीच गठबंधन की चर्चाओं को उस समय और मजबूती मिली, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए (NDA) की सरकार बनने की बात कही थी। उनके इस बयान के बाद अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी गठबंधन को लेकर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया था।

पंजाब के राज्यपाल से मुलाकात के बाद सुखबीर बादल ने कहा था कि अकाली दल उन राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार है, जो उसकी विचारधारा और कार्यक्रमों से सहमत हों। उन्होंने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को पंजाब का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए दोनों के साथ किसी भी तरह के राजनीतिक समझौते की संभावना से इनकार किया था।

सुखबीर बादल ने पिछली अकाली दल-बीजेपी सरकार का जिक्र करते हुए कहा था कि दोनों दलों के शासनकाल में पंजाब में अमन-शांति रही और विकास के काम हुए।

पहले अकाली दल के पास थी ज्यादा सीटें, अब बीजेपी की बढ़ी दावेदारी

BJP और अकाली दल के बीच सीटों का बंटवारा इस बार चर्चा का बड़ा मुद्दा है। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में अकाली दल ने 94 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जबकि बीजेपी सिर्फ 23 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। उस समय अकाली दल गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में था।

लेकिन अब राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। बीजेपी पंजाब में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार बीजेपी की कोशिश अकाली दल के मुकाबले लगभग बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने की हो सकती है। हालांकि, अंतिम फैसला दोनों दलों के बीच बातचीत के बाद ही सामने आएगा।

1997 से 2012 तक 3 बार बनी थी अकाली-BJP सरकार

अकाली दल और बीजेपी का गठबंधन पंजाब की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली रहा है। दोनों दलों ने 1997 में पहली बार मिलकर सरकार बनाई थी। इसके बाद 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन को जीत मिली।

2012 में दोनों दलों ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर पंजाब की राजनीति में एक नया रिकॉर्ड बनाया था। इन चुनावों में गठबंधन का प्रदर्शन इस प्रकार रहा था।

1997 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल ने 75 और बीजेपी ने 18 सीटें जीती थीं। दोनों दलों को मिलाकर कुल 93 सीटें मिली थीं। 2007 में अकाली दल को 49 और बीजेपी को 19 सीटें हासिल हुई थीं। इस तरह गठबंधन के खाते में 68 सीटें आई थीं। वहीं, 2012 के चुनाव में अकाली दल ने 56 और बीजेपी ने 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी। तब भी गठबंधन को कुल 68 सीटें मिली थीं।

कृषि कानूनों के विरोध में 2020 में टूट गया था गठबंधन

दोनों दलों का करीब 23 साल पुराना औपचारिक गठबंधन सितंबर 2020 में टूट गया था। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में किसानों का आंदोलन तेज हुआ तो अकाली दल ने इन कानूनों का विरोध किया। पार्टी की नेता हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अकाली दल ने एनडीए से अलग होने का ऐलान कर दिया।

गठबंधन टूटने के बाद 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। 2022 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल को केवल तीन और बीजेपी को दो सीटें मिली थीं। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पंजाब में अपना खाता भी नहीं खोल सकी, जबकि अकाली दल को एक सीट पर जीत मिली।

अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के फिर करीब आने की चर्चा ने पंजाब की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। यदि गठबंधन पर औपचारिक मुहर लगती है तो इसका सीधा असर राज्य के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। फिलहाल सबकी नजरें दिवाली के बाद होने वाली संभावित घोषणा और सीटों के बंटवारे पर टिकी हैं।

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Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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