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ढूंढ़ो, डिलिड करो और देश निकालो... अवैध घुसपैठियों पर BJP का मास्टरप्लान, SIR टेंशन के बीच मोदी सरकार ने कर दिया खेला
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SIR Controversy: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर एक बार फिर अपना सख्त रुख साफ कर दिया है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सिर्फ तीन शब्दों का नारा साझा किया है—‘Detect, Delete, Deport’। यानी घुसपैठियों की पहचान करो, वोटर लिस्ट से नाम हटाओ और देश से बाहर भेजो। BJP ने इस संदेश के साथ कहा, “तीन शब्द, एक संकल्प।” पार्टी ने यह पोस्ट ऐसे समय में किया है, जब चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विपक्षी दल लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
अमित शाह भी उठा चुके हैं घुसपैठ का मुद्दा
BJP का यह नारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस रुख को दोहराता है, जिसमें वह लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि अवैध घुसपैठिए भारत की मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने में कामयाब हो रहे हैं। सरकार का कहना है कि ऐसे लोगों की पहचान की जानी चाहिए, उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने चाहिए और जो लोग अवैध रूप से देश में रह रहे हैं, उन्हें संवैधानिक प्रक्रिया के तहत वापस भेजा जाना चाहिए।
सरकार का तर्क है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करना जरूरी है, ताकि अवैध रूप से रह रहे लोग चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित न कर सकें। सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़कर देखती है। वहीं, BJP विपक्षी दलों पर आरोप लगाती रही है कि वे SIR का विरोध करके घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
राहुल गांधी पर अमित शाह का हमला
इससे पहले शुक्रवार को अमित शाह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा था। उन्होंने SIR के विरोध में विपक्षी दलों की ओर से निकाली जा रही रैलियों को ‘घुसपैठिया बचाओ यात्रा’ बताया। शाह के इस बयान के बाद SIR को लेकर BJP और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।
क्या है SIR को लेकर पूरा विवाद?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की जांच और उसे अपडेट करने की प्रक्रिया है। इसके तहत मृत लोगों, एक से ज्यादा जगह नाम दर्ज कराने वाले मतदाताओं, दूसरी जगह जा चुके लोगों और अन्य अयोग्य मतदाताओं की पहचान की जाती है। साथ ही यह सुनिश्चित करने की बात कही जाती है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।
हालांकि, कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि SIR को जिस तरीके से लागू किया जा रहा है, उससे बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम भी वोटर लिस्ट से हट सकते हैं। विपक्ष ने प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, कथित गड़बड़ियों और कमजोर वर्गों पर इसके असमान असर को लेकर चिंता जताई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर भी उठे सवाल
विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। साथ ही उन्होंने उनके इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग की है। इस तरह एक तरफ BJP SIR को मतदाता सूची साफ करने और अवैध घुसपैठियों की पहचान से जुड़ा जरूरी कदम बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे पात्र मतदाताओं के अधिकारों पर असर डालने वाली प्रक्रिया करार दे रहा है। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सियासी बहस लगातार तेज होती जा रही है।


