पंजाब में फिर साथ आएंगे BJP-अकाली दल? PM मोदी-सुखबीर बादल की मुलाकात से बड़ी हलचल, विपक्ष में खलबली

Punjab BJP-Akali Dal Alliance: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। क्या बीजेपी और अकाली दल फिर से गठबंधन करेंगे?

Harsh Srivastava
Published on: 7 Aug 2026 9:17 PM IST
पंजाब में फिर साथ आएंगे BJP-अकाली दल? PM मोदी-सुखबीर बादल की मुलाकात से बड़ी हलचल, विपक्ष में खलबली
X

Punjab BJP-Akali Dal Alliance: पंजाब में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले देश की राजनीति में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। नई दिल्ली स्थित संसद भवन में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के शीर्ष नेता सुखबीर सिंह बादल के बीच हुई एक अहम मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। इस उच्च स्तरीय बैठक के सामने आने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य के दो सबसे पुराने राजनीतिक साझेदार एक बार फिर से एक मंच पर वापस आ सकते हैं। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो इस विशेष वार्ता के केंद्र में दोनों दलों के बीच दोबारा चुनावी हाथ मिलाने का मुद्दा ही सबसे ऊपर रहा है।

क्यों टूटा था BJP-अकाली दल का रिश्ता?

भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल का राजनीतिक नाता कोई नया नहीं है, बल्कि दोनों ने करीब 25 वर्षों तक पंजाब की राजनीति में एक साथ मिलकर राज किया है। हालांकि वर्ष 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 3 विवादित कृषि बिलों को लेकर दोनों सहयोगियों के रिश्तों में भारी दरार आ गई थी। किसानों के प्रचंड विरोध को देखते हुए अकाली दल ने नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) का साथ छोड़ने का बड़ा फैसला लिया था। इसके बाद वर्ष 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों ही पार्टियों ने एक-दूसरे के खिलाफ अलग-अलग मैदान में उतरकर किस्मत आजमाई थी।

पंजाब की जमीनी हकीकत

भले ही दोनों राजनीतिक दल बीते कुछ वर्षों से अलग-अलग राह पर चल रहे थे, लेकिन दोनों ही खेमों के वरिष्ठ नेताओं के बीच समय-समय पर संपर्क बना रहा। अब सूत्रों के हवाले से यह खबर पुख्ता हो रही है कि अकाली दल के साथ-साथ पंजाब बीजेपी के कई बड़े चेहरे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का स्थानीय नेतृत्व भी इस पुराने रिश्ते को दोबारा बहाल करने का पूरा समर्थन कर रहा है। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए नए दिग्गज नेता भी इस गठबंधन के पक्ष में मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं। हालांकि इस पूरे मामले पर अंतिम मोहर लगाने का सर्वाधिकार बीजेपी की केंद्रीय कमान के पास ही सुरक्षित है।

गांवों में अकाली तो शहरों में बीजेपी

राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि अगर यह पुराना गठबंधन दोबारा अस्तित्व में आता है, तो इससे दोनों ही राजनीतिक दलों को जबरदस्त चुनावी फायदा मिलेगा। पंजाब का सामाजिक और राजनीतिक ताना-बाना कुछ ऐसा है कि अकाली दल की पकड़ राज्य के ग्रामीण इलाकों और किसान वर्ग में बेहद मजबूत मानी जाती है, जबकि बीजेपी का प्रभाव मुख्य रूप से पंजाब के शहरी क्षेत्रों, व्यापारिक वर्ग और हिंदू आबादी के बीच अधिक देखा गया है। हाल ही में पंजाब प्रवास पर पहुंचे सीनियर बीजेपी नेता नितिन नवीन ने भी स्पष्ट संकेत दिए थे कि सही समय आने पर गठबंधन के विषय पर उचित निर्णय लिया जाएगा।

'छोटा भाई' बनने को तैयार नहीं बीजेपी

सूत्रों की मानें तो इस बार अगर दोनों पार्टियां साथ आती हैं, तो गठबंधन की शर्तें पहले जैसी बिल्कुल नहीं होंगी। अतीत के दौर में पंजाब में अकाली दल 'बड़े भाई' की भूमिका में रहता था और बीजेपी 'जूनियर पार्टनर' की तरह कम सीटों पर चुनाव लड़ती थी। लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में बीजेपी अब पूरी तरह से बराबरी के आधार पर ही चुनावी मैदान में उतरना चाहती है। दूसरी तरफ अकाली दल के नेताओं का मानना है कि सीटों के बंटवारे जैसी तकनीकी बातों पर बातचीत बाद में भी हो सकती है। उनके लिए इस वक्त सबसे बड़ी प्राथमिकता पंजाब की पटरी से उतरी व्यवस्था को सुधारना है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और बॉर्डर स्टेट के गंभीर हालात बने चर्चा के मुख्य बिंदु

अकाली दल के रणनीतिकारों का मानना है कि पंजाब एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य है, जहां सुरक्षा तंत्र और सामाजिक ताने-बाने को दुरुस्त रखना देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सीमा पार से होने वाली गतिविधियों और राज्य के मौजूदा सामाजिक माहौल को देखते हुए दोनों राष्ट्रवादी ताकतों का एकजुट होना समय की मांग माना जा रहा है। इसी सोच के तहत दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व ने आपसी मतभेदों को पूरी तरह भुलाकर फिर से बातचीत की मेज पर आने की बड़ी पहल की है।

विपक्षी खेमे में भारी घबराहट

पीएम मोदी और सुखबीर सिंह बादल की इस हाई-प्रोफाइल बैठक की खबर जैसे ही मीडिया में फैली, विरोधी खेमे में हलचल तेज हो गई। पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तुरंत इस मुलाकात पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट शेयर करते हुए चुटकी ली और पूछा कि क्या दोनों दल फिर से साथ आने की खिचड़ी पका रहे हैं? हालांकि बीजेपी के कई स्थानीय नेता पिछले कई महीनों से दावों के साथ कहते आ रहे थे कि पार्टी वर्ष 2027 का आगामी विधानसभा चुनाव बिना किसी सहारे के अकेले दम पर लड़ेगी। ऐसे में इस नई मुलाकात के बाद देखना दिलचस्प होगा कि पंजाब की सियासत में क्या नया मोड़ आता है।

Harsh Srivastava
ABOUT THE AUTHOR

Harsh Srivastava

Content Writer Mail ID - harshsri764@gmail.comharshsri764@gmail.com

हर्ष श्रीवास्तव वाराणसी के रहने वाले पत्रकार और डिजिटल कंटेंट प्रोफेशनल हैं। वर्तमान में वे लखनऊ स्थित न्यूज़ट्रैक में डेस्क इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल कोऑर्डिनेशन, न्यूज़रूम संचालन के साथ-साथ रिसर्च आधारित एक्सप्लेनर, न्यूज़ फीचर और विश्लेषणात्मक लेख तैयार करते हैं। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है। उन्होंने वर्ष 2023 में पत्रकारिता की शुरुआत की और हिन्दुस्तान, टाइम्स इंटरनेट, इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ में काम करने के दौरान उन्हें रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और डिजिटल पत्रकारिता का अनुभव प्राप्त हुआ। हर्ष की विशेष रुचि राजनीति, चुनाव, अपराध, सार्वजनिक नीति, सुशासन और समसामयिक विषयों पर शोध-आधारित पत्रकारिता में है। वे गहन रिसर्च, फैक्ट-चेकिंग और सरल भाषा के माध्यम से जटिल विषयों को पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

Next Story