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बंगाल जीत का ‘यूपी कनेक्शन’! सुनील बंसल के ‘चुनावी चक्रव्यूह’ ने पलटी बाजी, दीदी परास्त
West Bengal Election BJP Victory: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की हालिया जीत के पीछे उत्तर प्रदेश में आजमाई गई रणनीति और संगठित चुनावी रोडमैप की बड़ी भूमिका मानी जा रही है।
Sunil Bansal
West Bengal Election BJP Victory: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की हालिया जीत के पीछे उत्तर प्रदेश में आजमाई गई रणनीति और संगठित चुनावी रोडमैप की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। इस जीत का श्रेय काफी हद तक सुनील बंसल को दिया जा रहा है, जिन्होंने अपने अनुभव और रणनीतिक कौशल से पार्टी को मजबूती प्रदान की। उत्तर प्रदेश में कई चुनाव जिताने के बाद बंसल ने अपनी भरोसेमंद टीम को पश्चिम बंगाल में उतारा और वहां भी जीत की पटकथा लिख दी।
UP के अनुभवी नेताओं को पश्चिम बंगाल में जिम्मेदारी
भाजपा ने चुनाव से पहले ही उत्तर प्रदेश के कई अनुभवी नेताओं को पश्चिम बंगाल में जिम्मेदारी सौंप दी थी। पार्टी ने पूरे राज्य को पांच क्षेत्रों में बांटकर रणनीतिक तरीके से काम किया। इनमें से तीन प्रमुख क्षेत्रों की जिम्मेदारी जेपीएस राठौर, सुरेश राणा और धन सिंह रावत को दी गई थी। खास बात यह रही कि इन नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में माइक्रो लेवल पर काम करते हुए बूथ मैनेजमेंट को मजबूत किया।
जेपीएस राठौर को 35 विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिनमें पूर्वी और पश्चिमी मेदिनीपुर जैसे तृणमूल कांग्रेस के मजबूत गढ़ भी शामिल थे। वहीं सुरेश राणा को उत्तर 24 परगना जिले के 28 विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई। इसके अलावा पार्टी ने लगभग 1000 नेताओं और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात किया, जिनमें सांसद, विधायक, पूर्व विधायक और संगठन से जुड़े अनुभवी लोग शामिल थे।
कई मंत्रियों-नेताओं ने पश्चिम बंगाल में डेरा डाला
चुनाव के दौरान कई मंत्रियों और नेताओं ने पश्चिम बंगाल में डेरा डाला। दयाशंकर मिश्र दयालु, दिनेश खटीक, संजय गंगवार, अजय मिश्रा टेनी और सुब्रत पाठक जैसे नेताओं ने महीनों तक चुनावी मोर्चा संभाला। इनके प्रयासों का असर यह रहा कि दमदम लोकसभा क्षेत्र की अधिकांश सीटों पर भाजपा को सफलता मिली और पार्टी केवल कमहटी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी। इसके अलावा स्वाति सिंह, उपेंद्र तिवारी और आनंद शुक्ला जैसे नेताओं ने भी विभिन्न क्षेत्रों में चुनावी प्रबंधन संभाला। एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज और अरुण पाठक जैसे नेताओं ने भी जिलों में डेरा डालकर संगठन को मजबूती दी।
जीत के पीछे माइक्रो मैनेजमेंट का बड़ा योगदान
भारतीय जनता पार्टी की इस सफलता के पीछे “माइक्रो मैनेजमेंट” और “साइंटिफिक इलेक्शन इंजीनियरिंग” का बड़ा योगदान रहा। बंसल ने उत्तर प्रदेश की तरह ही यहां भी बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय किया। पार्टी ने एक महीने के भीतर लगभग 1.65 लाख छोटी-छोटी बैठकों के माध्यम से मतदाताओं तक सीधा संपर्क स्थापित किया और जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत की। गौरतलब है कि सुनील बंसल को 2022 में राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था और उन्हें पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना जैसे महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ओडिशा में सफलता के बाद उनका पूरा ध्यान पश्चिम बंगाल पर केंद्रित रहा।
राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा है कि पश्चिम बंगाल की इस जीत के बाद बंसल को एक बार फिर उत्तर प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इससे पहले भी उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश में भाजपा को ऐतिहासिक सफलता दिलाई थी। बाद में 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी उनकी रणनीति कारगर साबित हुई। पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत संगठन, सटीक रणनीति और जमीनी स्तर पर काम करने वाली टीम किसी भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। आने वाले समय में बंसल की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है।


