आतंकवाद से न्यूक्लियर खतरे तक, BRICS में बनी सहमति… दिल्ली घोषणा में क्या-क्या हुआ तय?

BRICS Delhi Declaration: दिल्ली में BRICS की घोषणा में आतंकवाद, न्यूक्लियर खतरे और अंतरराष्ट्रीय विवादों पर बड़ा संकल्प लिया गया। जानिए घोषणा में क्या-क्या तय हुआ।

Aditya Kumar Verma
Published on: 12 Sept 2026 5:44 PM IST
BRICS Delhi Declaration | Terrorism | Nuclear Threat and Global Security
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Image Source- Social Media

BRICS Delhi Declaration: दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान शुक्रवार को जारी नई दिल्ली घोषणा (New Delhi Declaration) में सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय विवादों को बातचीत, सलाह-मशवरे और कूटनीति के जरिए सुलझाने की प्रतिबद्धता दोहराई। ब्रिक्स देशों ने कहा कि दुनिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष के बीच विवादों का शांतिपूर्ण समाधान ही आगे बढ़ने का रास्ता है।

घोषणा में सदस्य देशों ने प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर अलग-अलग देशों के विचारों और राष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बहुपक्षीय रुख (Multilateral Approach) अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। ब्रिक्स ने साथ ही बढ़ते परमाणु खतरे (Nuclear Risk) और संघर्ष की आशंकाओं पर चिंता जताई और निरस्त्रीकरण, हथियार नियंत्रण तथा परमाणु अप्रसार की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई।

एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध

नई दिल्ली घोषणा में ब्रिक्स देशों ने एकतरफा जबरन लागू किए जाने वाले उपायों यानी एकतरफा प्रतिबंधात्मक कदमों (Unilateral Coercive Measures) का विरोध किया। समूह ने कहा कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय कानून (International Law) के खिलाफ हैं।

ब्रिक्स ने वैश्विक मामलों में बहुपक्षीय व्यवस्था और सभी सदस्य देशों की अलग-अलग राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखने पर जोर दिया। समूह का कहना है कि प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर किसी एक देश के नजरिए के बजाय अलग-अलग देशों के विचारों और परिस्थितियों को समझना जरूरी है।

सीमा पार भुगतान पर बड़ा फोकस

नई दिल्ली घोषणा में ब्रिक्स देशों के बीच सीमा पार भुगतान (Cross-Border Payments) को आसान बनाने पर भी जोर दिया गया। सदस्य देशों ने व्यावहारिक समाधान तलाशने के लिए चर्चा जारी रखने का समर्थन किया।

ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स यानी बीपीटीएफ (BRICS Payment Task Force) की ओर से सीमा पार भुगतान के प्रभावी तरीकों को तलाशने के प्रयासों को भी स्वीकार किया गया। इसमें कजान और रियो घोषणाओं में दिए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर ब्रिक्स क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स इनिशिएटिव (BRICS Cross-Border Payments Initiative) पर किए जा रहे काम का उल्लेख किया गया।

घोषणा में भुगतान और मैसेजिंग चैनलों की सीमा पार इंटरऑपरेबिलिटी (Cross-Border Interoperability) का अध्ययन किए जाने और ब्रिक्स देशों की स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) के जरिए व्यापार निपटान और निवेश को बढ़ावा देने को लेकर चल रही चर्चाओं का भी जिक्र किया गया।

सदस्य देशों ने कहा कि सभी देशों के लिए एक जैसा मॉडल जरूरी नहीं हो सकता। राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए सीमा पार भुगतान के ऐसे व्यावहारिक समाधान तलाशे जाने चाहिए जो तेज, कम लागत वाले, ज्यादा सुलभ, प्रभावी, पारदर्शी और सुरक्षित हों।

परमाणु खतरे पर ब्रिक्स की चिंता

ब्रिक्स नेताओं ने दुनिया में बढ़ते परमाणु खतरे (Nuclear Danger) और संघर्ष की आशंकाओं पर चिंता जताई। उन्होंने निरस्त्रीकरण (Disarmament), हथियार नियंत्रण (Arms Control) और परमाणु अप्रसार (Nuclear Non-Proliferation) की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत दोहराई।

घोषणा में कहा गया कि वैश्विक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए इस व्यवस्था की मजबूती और प्रभावशीलता बनाए रखना जरूरी है।

ब्रिक्स देशों ने परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्रों (Nuclear-Weapon-Free Zones) के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्र परमाणु अप्रसार व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। समूह ने मौजूदा परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्रों और उनसे जुड़े परमाणु हथियारों के इस्तेमाल या इस्तेमाल की धमकी के खिलाफ आश्वासनों के प्रति अपना समर्थन और सम्मान दोहराया।

युद्ध नहीं, कूटनीति से समाधान

नई दिल्ली घोषणा में ब्रिक्स ने अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। समूह ने बातचीत (Dialogue), सलाह-मशवरे (Consultation) और कूटनीति (Diplomacy) के जरिए विवादों को सुलझाने की बात कही।

ब्रिक्स ने वैश्विक मामलों में बहुपक्षीय दृष्टिकोण (Multilateralism) की वकालत करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों की अलग-अलग राष्ट्रीय परिस्थितियों और विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए।

आतंकवाद पर कड़ा रुख

नई दिल्ली घोषणा में ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद (Terrorism) के सभी रूपों की कड़ी निंदा की। समूह ने आतंकवादी गतिविधियों को अपराध और पूरी तरह अनुचित बताया, चाहे उनका मकसद कुछ भी हो, वे कहीं भी हों या उन्हें कोई भी अंजाम दे।

घोषणा में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में हुए आतंकवादी हमले की भी कड़े शब्दों में निंदा की गई। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे।

ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के हर रूप और उसकी हर अभिव्यक्ति से लड़ने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसमें आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही (Cross-Border Movement of Terrorists), आतंकवाद की फंडिंग (Terrorism Financing) और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने (Safe Havens) मिलने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

आतंकवाद को धर्म से जोड़ने से इनकार

ब्रिक्स घोषणा में साफ कहा गया कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। समूह ने आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों और उन्हें समर्थन देने वालों को जवाबदेह ठहराने और न्याय के कटघरे में लाने की बात कही।

इसके लिए संबंधित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों (National and International Law) के तहत कार्रवाई किए जाने पर जोर दिया गया।

दिल्ली में जुटे दुनिया भर के बड़े नेता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली के भारत मंडपम (Bharat Mandapam) में हाई-प्रोफाइल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत की। सम्मेलन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) समेत कई बड़े नेता हिस्सा ले रहे हैं। दोनों नेताओं की मौजूदगी के कारण इस सम्मेलन को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ब्रिक्स दुनिया की प्रमुख उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच पर लाने वाला समूह है। मौजूदा ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

क्या है BRICS का मतलब?

ब्रिक्स का नाम बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) से जुड़ा है। यह समूह खुद को वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के समकालीन मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सलाह-मशवरे और सहयोग के उपयोगी मंच के रूप में देखता है।

ब्रिक्स का फोकस वैश्विक राजनीतिक शासन (Global Political Governance) और आर्थिक शासन (Economic Governance) से जुड़े मुद्दों पर भी सहयोग और चर्चा बढ़ाने पर है।

नई दिल्ली घोषणा का बड़ा संदेश

नई दिल्ली घोषणा से ब्रिक्स देशों ने एक साथ कई बड़े मुद्दों पर अपना रुख सामने रखा है। इसमें अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान, कूटनीति को प्राथमिकता, एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध, सीमा पार भुगतान को आसान बनाने की कोशिश, परमाणु जोखिम को कम करना और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख शामिल है।

दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन के बीच जारी यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब दुनिया कई बड़े संघर्षों और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में ब्रिक्स ने बातचीत, बहुपक्षीय सहयोग और कूटनीति के जरिए वैश्विक चुनौतियों से निपटने पर जोर दिया है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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