TRENDING TAGS :
BRICS पर कांग्रेस में ही घमासान! चिदंबरम ने उठाए सवाल तो थरूर ने गिनाए फायदे...BJP ने भी खोला मोर्चा
Shashi Tharoor Slams P. Chidambaram: BRICS Summit 2026 के बीच कांग्रेस में ही BRICS को लेकर मतभेद सामने आए हैं। पी. चिदंबरम ने इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाए तो शशि थरूर ने आर्थिक और कूटनीतिक फायदे गिनाए। बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोला।
Shashi Tharoor Slams P. Chidambaram: राजधानी दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) के बीच देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के भीतर विचार-विमर्श का एक अनोखा और तीखा दौर देखने को मिल रहा है। सम्मेलन की उपयोगिता और अंतरराष्ट्रीय प्रासंगिकता को लेकर कांग्रेस के दो दिग्गजों के बयान आमने-सामने आ गए हैं। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा ब्रिक्स की सफलता पर उठाए गए सवालों के बाद जहां भारतीय जनता पार्टी ने उन पर चौतरफा हमला बोला, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने खुलकर इस अंतरराष्ट्रीय महासंगम का समर्थन किया है। थरूर ने ब्रिक्स के आर्थिक और कूटनीतिक फायदों को गिनाते हुए इसे भारत और पूरे 'ग्लोबल साउथ' के लिए एक बेहद अहम और दूरगामी मंच करार दिया है।
थरूर ने गिनाए BRICS के फायदे
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पूर्व वित्त मंत्री की राय से अलग जाते हुए ब्रिक्स की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ब्रिक्स समूह केवल कुछ देशों का संगठन नहीं, बल्कि यह 'ग्लोबल साउथ' के 100 से भी अधिक देशों की उम्मीदों और विविध विचारों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक मुख्य मंच है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इस समूह में शामिल 11 मुख्य देश दुनिया की कुल जीडीपी के लगभग 41 प्रतिशत हिस्से पर प्रभाव रखते हैं। थरूर के अनुसार, ऐसे शक्तिशाली मंच की अध्यक्षता भारत द्वारा किया जाना और दुनिया भर के दर्जनों राष्ट्राध्यक्षों का नई दिल्ली की धरती पर जमावड़ा होना कोई मामूली बात नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के बढ़ते कद, सम्मान और कूटनीतिक क्षमता को साफ तौर पर दर्शाता है।
चिदंबरम के बयान से उपजा विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की उस टिप्पणी से हुई जिसमें उन्होंने ब्रिक्स की प्रभावशीलता पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया था। चिदंबरम ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि पिछले कुछ शिखर सम्मेलनों से कोई ठोस परिणाम निकलकर सामने आया है। उन्होंने इस बात पर भी संशय जताया था कि इस बैठक में कितने वैश्विक नेता हिस्सा ले रहे हैं। चिदंबरम के इस बयान के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी ने इसे देश की वैश्विक साख पर चोट करार दिया। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के इतने बड़े आयोजन की पूर्व संध्या पर ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण बयान देना विपक्ष की घटती गरिमा को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता दुनिया भर से आ रहे प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों की समझ से ऊपर खुद को आंकने की भूल कर रहे हैं।
सम्मेलन के दौरान सर्वसम्मति
ब्रिक्स के फायदों को गिनाते हुए शशि थरूर ने इस आयोजन के सामने मौजूद वास्तविक चुनौतियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने स्वीकार किया कि 11 अलग-अलग देशों के विचार और प्राथमिकताएं हमेशा एक जैसी नहीं हो सकतीं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मोर्चों और जटिल भू-राजनीतिक मुद्दों पर सभी सदस्य देशों के बीच एक राय बनाना और अंत में एक सर्वसम्मत संयुक्त घोषणापत्र जारी करना आयोजकों के लिए एक बहुत कठिन कार्य है। थरूर ने याद दिलाया कि इससे पहले विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान साझा घोषणापत्र के बजाय केवल अध्यक्षीय वक्तव्य ही जारी किया जा पाया था। यदि इस बार भी नेताओं के बीच तालमेल में कमी रहती है, तो डिक्लेरेशन बनाने में एक बार फिर बड़ी कूटनीतिक चुनौती आ सकती है।


