BRICS Summit से दुनिया में बढ़ेगा भारत का दबदबा! दिल्ली में बदलेगा पावर गेम...समझिये पूरा मास्टरप्लान

BRICS India Power Game: दिल्ली में BRICS Summit 2026 के जरिए भारत वैश्विक पावर गेम में बड़ा बदलाव ला सकता है। BRICS vs G7, डी-डॉलरलाइजेशन, BRICS Pay, लोकल करेंसी ट्रेड और भारत की मल्टी-अलाइनमेंट रणनीति से समझिए पूरा मास्टरप्लान।

Harsh Srivastava
Published on: 11 Sept 2026 11:08 AM IST
BRICS Summit से दुनिया में बढ़ेगा भारत का दबदबा! दिल्ली में बदलेगा पावर गेम...समझिये पूरा मास्टरप्लान
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BRICS India Power Game: राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली ऐतिहासिक 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) की मेजबानी के लिए पूरी तरह सज-धज कर तैयार है। 11 से 13 सितंबर के बीच प्रगति मैदान स्थित भव्य भारत मंडपम में आयोजित हो रहे इस तीन दिवसीय महासम्मेलन के लिए पूरी दिल्ली को दुल्हन की तरह सजाया गया है। यह सम्मेलन ऐसे वक्त में हो रहा है जब ब्रिक्स संगठन अपनी स्थापना के सफल 20 वर्ष पूरे कर रहा है। आज पूरी दुनिया अमेरिकी प्रशासन की आक्रामक टैरिफ नीतियों, मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव और कच्चे तेल की अनिश्चितता से जूझ रही है। ऐसे नाजुक दौर में 11 प्रमुख देशों वाले इस विस्तारित ब्रिक्स समूह पर पूरे विश्व की नजरें टिकी हुई हैं। पश्चिमी देशों के वर्चस्व को संतुलित करने, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को नई गति देने और कूटनीतिक संतुलन साधने के मामले में यह सम्मेलन भारत के लिए एक बहुत बड़ा गेम-चेंजर साबित होने जा रहा है।

ब्रिक्स बनाम G7 का बदलता समीकरण

वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स देशों की बढ़ती धमक को आंकड़ों से बेहद आसानी से समझा जा सकता है। साल 2000 में परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) यानी क्रय शक्ति समानता के आधार पर ब्राजील, रूस, भारत और चीन की कुल हिस्सेदारी वैश्विक जीडीपी में महज 23 प्रतिशत थी, जबकि अमीर देशों के समूह G7 का वैश्विक जीडीपी पर 52 प्रतिशत का एकछत्र कब्जा था। हालांकि, वर्ष 2024 तक आते-आते यह तस्वीर पूरी तरह पलट गई। आज 11 सदस्यों वाले विशाल ब्रिक्स समूह का वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सा बढ़कर लगभग 36.8 प्रतिशत हो चुका है, जबकि G7 की हिस्सेदारी घटकर 29 प्रतिशत से भी कम रह गई है।

इतना ही नहीं, दुनिया के कुल व्यापार का करीब एक-चौथाई हिस्सा अब ब्रिक्स देशों के नियंत्रण में है। बीते दो दशकों में ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार 84 अरब डॉलर से 13 गुना बढ़कर 1.17 खरब डॉलर के विशाल आंकड़े को पार कर गया है। इस शक्तिशाली समूह के पास करीब 5.2 खरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है और यह दुनिया के कुल खनिज कोयला उत्पादन का 78.2 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करता है। साल 2026 में ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं की औसत विकास दर 3.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो G7 देशों की रफ्तार से तीन गुना से भी ज्यादा है। इसी आर्थिक मजबूती के दम पर ब्रिक्स ने पश्चिमी मुल्कों को अपनी वास्तविक ताकत का अहसास करा दिया है।

अमेरिकी टैरिफ और पश्चिमी दबाव के बीच मजबूत सुरक्षा कवच

अमेरिकी टैरिफ और सख्त आर्थिक बंदिशों की मार झेल रहे विकासशील मुल्कों के लिए ब्रिक्स एक मजबूत सुरक्षा ढाल के रूप में उभर रहा है। दुनिया की 39 प्रतिशत जीडीपी और 23 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कब्जा रखने वाला यह समूह अब पश्चिमी बाजारों पर निर्भर रहने के बजाय आपस में व्यापार बढ़ाने (इंट्रा-ब्रिक्स ट्रेड) पर सबसे अधिक बल दे रहा है। भारत के लिए यह अपनी विनिर्माण क्षमता (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवा क्षेत्र (सर्विसेज) का दायरा नए देशों तक फैलाने का सबसे मुफीद अवसर है।

भारत को तीन बड़े मोर्चों पर सीधे लाभ मिलने की पूरी संभावना है:

ऊर्जा सुरक्षा की मजबूती: रूस और ईरान जैसे दुनिया के शीर्ष तेल उत्पादक देशों के साथ सीधे संवाद के जरिए भारत कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता हासिल कर सकता है।

सीमा तनाव में कूटनीतिक नरमी: सम्मेलन के दौरान भारतीय नेतृत्व और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली द्विपक्षीय मुलाकातों से दोनों देशों के व्यापारिक और राजनयिक संबंधों में जमी बर्फ पिघल सकती है।

वैश्विक सप्लाई चेन का नया केंद्र: अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापार युद्ध के बीच भारत ब्रिक्स देशों के लिए एक बेहद भरोसेमंद और मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है।

भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' रणनीति और स्वतंत्र विदेश नीति

ब्रिक्स के मंच पर भारत की मौजूदगी उसकी बहु-स्तरीय संतुलन यानी 'मल्टी-अलाइनमेंट' रणनीति का सबसे सटीक उदाहरण है। नई दिल्ली किसी भी एक गुट या ब्लॉक का पिछलग्गू बने बिना ब्रिक्स, G20, क्वाड (Quad) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे परस्पर विरोधी दिखने वाले मंचों पर एक साथ अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखती है। भारत की विदेश नीति का मूल उद्देश्य किसी एक शक्तिशाली समूह को चुनना नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों की पूर्ति के लिए हर मंच पर गुंजाइश तैयार करना है।

जहां एक तरफ चीन और रूस ब्रिक्स को अमेरिका, डॉलर और पश्चिमी प्रभुत्व के खिलाफ एक आक्रामक हथियार के रूप में पेश करने में जुटे हैं, वहीं भारत और ब्राजील का दृष्टिकोण बिल्कुल अलग है। रूस कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए ब्रिक्स को आर्थिक जीवनरेखा मानता है और चीन 'ग्लोबल साउथ' का नेता बनने की होड़ में है। इसके विपरीत, भारत ब्रिक्स को किसी देश के खिलाफ बने विरोधी गुट के बजाय एक सुधारवादी और विकास केंद्रित आर्थिक मंच मानता है।

स्थानीय मुद्राओं का बढ़ा दबदबा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ब्रिक्स की नई साझा मुद्रा बनाने पर 100 फीसदी का कड़ा टैरिफ लगाने की धमकी दिए जाने के बाद, साझा मुद्रा का विचार तो पीछे छूट गया, लेकिन इसकी जगह स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का तरीका बेहद व्यावहारिक विकल्प बनकर उभरा है। रूस और चीन का 90 प्रतिशत से अधिक द्विपक्षीय व्यापार अब अपनी मुद्राओं रूबल और युआन में हो रहा है।

भारत भी इस दिशा में काफी तेजी से आगे बढ़ा है। भारत और रूस ने अपने आपसी भुगतान का करीब 90 फीसदी हिस्सा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमोदित 'स्पेशल रुपया वोस्ट्रो अकाउंट्स' के जरिए अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में शिफ्ट कर दिया है। इसके अलावा भारत और यूएई के बीच रुपया-दिरहम भुगतान व्यवस्था चल रही है, जबकि जुलाई 2026 में भारत और इंडोनेशिया के बीच शुरू हुए 'रुपया-रुपिया' निपटान ढांचे के कारण स्थानीय मुद्रा में व्यापार इस वर्ष के शुरुआती दो महीनों में ही 163 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़त के साथ 8.45 अरब डॉलर तक जा पहुंचा है।

BRICS Pay और डिजिटल अर्थव्यवस्था से होगा 'डी-डॉलरलाइजेशन'

दिल्ली शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण 'BRICS Pay' सिस्टम की संभावित शुरुआत माना जा रहा है। यह आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म सदस्य देशों के अलग-अलग भुगतान तंत्रों- जैसे भारत के UPI, रूस के SPFS, चीन के CIPS और ब्राजील के Pix—को एक साथ आपस में जोड़ेगा। इससे सदस्य देश डॉलर पर आधारित मध्यस्थ बैंकों के चक्कर में पड़े बिना सीधे आपस में व्यापारिक भुगतान चुकता कर सकेंगे।

भारत किसी एक सुपर-नेशनल करेंसी के बजाय इंटरऑपरेबल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को बढ़ावा दे रहा है, जो यूपीआई की अभूतपूर्व सफलता पर आधारित है। हालांकि, रातों-रात डॉलर का दबदबा खत्म होना आसान नहीं है, क्योंकि दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों के पास अब भी 57 प्रतिशत से ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार डॉलर में ही मौजूद है। फिर भी, नई दिल्ली में हो रहा यह सम्मेलन वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र को पश्चिम से पूर्व की ओर मोड़ने और भारत की वैश्विक धाक जमाने में ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।

दिल्ली में स्कूल-दफ्तर बंद

बता दें की सम्मेलन की सुरक्षा और विदेशी मेहमानों के सुगम आवागमन को देखते हुए दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार ने 11 सितंबर को सरकारी कार्यालयों और सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित की है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान दिल्ली पहुंच चुके है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई दिग्गज नेता भी पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 सितंबर को ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगे। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में मुख्य शिखर बैठकें और द्विपक्षीय बातचीत होंगी।

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Harsh Srivastava

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Harsh Srivastava is a journalist currently working as Desk In-Charge at NewsTrack, Lucknow. He began his journalism career in 2023 and has previously worked with Hindustan, Times Internet and India News. He holds a Master’s degree in Journalism and Mass Communication (MJMC). His key areas of interest include politics, elections and crime, with a wider focus on governance, public policy and current affairs. He writes research-driven and SEO-focused digital stories, combining journalistic depth with an understanding of digital audiences. Harsh has covered the 2026 West Bengal Assembly Election, several state elections and bypolls, and extensively followed the Delhi CJP protest and its developments. His work includes news reports, explainers, features and analytical stories. Originally from Varanasi, Harsh has worked across Varanasi, Delhi and Lucknow, with experience spanning reporting, digital journalism, content writing and editorial operations.

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