Bridge Collapse Video: हमीरपुर से बिहार तक, क्यों गिर रहे हैं पुल?

Bridge Collapse Video: आज की यह खबर सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं है… यह सवाल है उस सिस्टम पर… जिसे हम विकास कहते हैं… उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में बेतवा नदी पर बन रहा एक पुल अचानक भरभराकर गिर जाता है…

Newstrack Network
Published on: 29 May 2026 8:26 PM IST (Updated on: 29 May 2026 8:26 PM IST)
Hamirpur to Bihar Bridge Collapse Video
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Hamirpur to Bihar Bridge Collapse Video

Bridge Collapse Video: आज की यह खबर सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं है… यह सवाल है उस सिस्टम पर… जिसे हम विकास कहते हैं… उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में बेतवा नदी पर बन रहा एक पुल अचानक भरभराकर गिर जाता है… मलबे के नीचे सो रहे मजदूर दब जाते हैं… किसी की वहीं मौत हो जाती है… किसी की चीखें मलबे में दब जाती हैं… और फिर वही सब होता है… जांच के आदेश… मुआवजे का एलान…. अधिकारियों की बैठक… और कुछ दिनों बाद… सब शांत… लेकिन सवाल ये है… आखिर कब तक? क्योंकि यह पहली बार नहीं हुआ… और शायद आखिरी बार भी नहीं… देश में पुल अब सिर्फ रास्ते जोड़ने का माध्यम नहीं रहे…. कई जगहों पर ये मौत का जाल बनते जा रहे हैं… बिहार में 17 दिनों में 12 पुल गिर गए… गुजरात में पुल टूटता है और गाड़ियां नदी में समा जाती हैं… मोरबी में 135 लोग मर जाते हैं… वाराणसी में फ्लाईओवर गिरता है… कोलकाता में पुल टूटता है… मुंबई में फुटओवर ब्रिज गिरता है… और हर बार….मरती है आम जनता… जो बाइक से गुजर रही थी… जो ऑटो में बैठी थी… जो मजदूरी करके घर लौट रही थी… जो पुल के नीचे सो रही थी… लेकिन कभी किसी बड़े अधिकारी को कुछ नहीं होता… कभी किसी मंत्री की जिम्मेदारी तय नहीं होती… कभी किसी ठेकेदार को उम्रकैद नहीं मिलती… तो क्या भारत में इंसान की जान इतनी सस्ती हो चुकी है? आज इस वीडियो में हम बात करेंगे— हमीरपुर पुल हादसे की… देश में लगातार गिरते पुलों की… भ्रष्टाचार की… घटिया निर्माण की… और उस सिस्टम की… जो हादसे के बाद सिर्फ बयान देता है…

सबसे पहले बात करते हैं… उत्तर प्रदेश के हमीरपुर की… 29 मई, शुक्रवार की रात… तेज आंधी और तूफान चल रहा था… बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल पर काम चल रहा था… रात करीब 2 बजे अचानक पुल का एक हिस्सा भरभराकर गिर जाता है… जो मजदूर नीचे सो रहे थे… वे मलबे में दब जाते हैं… चारों तरफ अफरा-तफरी मच जाती है… चीखें…धूल… और मौत का सन्नाटा… इस हादसे में 6 मजदूरों की मौत हो गई… अब अधिकारियों की बात सुनिए। ब्रिज कॉर्पोरेशन के एमडी धर्मवीर सिंह कहते हैं… तेज आंधी की वजह से सपोर्ट सिस्टम हिल गया… जिससे स्लैब गिर गया… यानी… एक तूफान पुल नहीं झेल पाया? तो सवाल उठता है… अगर अभी निर्माणाधीन पुल इतना कमजोर था… तो बनने के बाद कितना सुरक्षित होता? क्या सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था? क्या मजदूरों को सुरक्षित जगह दी गई थी? क्या रात में नीचे सोना allowed था? क्या इंजीनियरिंग जांच सही थी? और सबसे बड़ा सवाल… क्या सिर्फ तूफान जिम्मेदार है? या फिर… घटिया निर्माण भी?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख जताया… राहत कार्य के आदेश दिए… मुआवजे की बात हुई… लेकिन क्या सिर्फ मुआवजा काफी है? क्योंकि देश में पुल गिरने की घटनाएं अब सामान्य होती जा रही हैं… अगर हम बिहार की बात करें… तो वहां 2024 का मानसून किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं था… सिर्फ 17 दिनों में… 12 पुल गिर गए… जी हां… 12 पुल… 18 जून 2024… अररिया जिले में बकरा नदी पर बना नया पुल उद्घाटन से पहले ही गिर गया… 12 करोड़ रुपए की लागत… लेकिन मजबूती शून्य… फिर एक के बाद एक… सिवान… सारण… किशनगंज… मधुबनी… पूर्वी चंपारण… हर जगह पुल गिरते गए… 3 जुलाई 2024 को… एक ही दिन में पांच पुल टूट गए… सोचिए… एक दिन में पांच पुल… ये कोई प्राकृतिक आपदा नहीं लगती… ये सिस्टम फेल होने जैसा लगता है… कुछ पुल तो ऐसे थे… जो एक साल भी नहीं टिक पाए…

घोड़ा सहन ब्लॉक का पुल… 2024 में बना… और उसी साल टूट गया…

झंझारपुर का पुल… 2021 में बना… कुछ साल में खत्म…

किशनगंज का पुल… 2007 में बना… अब ढह चुका है… लोग कह रहे थे…“आटे में नमक नहीं… नमक में आटा मिलाया गया…” यानी भ्रष्टाचार इतना कि पुल सिर्फ दिखावे के लिए बने…

अब जरा गुजरात चलते हैं… वडोदरा जिले में महिसागर नदी पर बना गंभीरा ब्रिज अचानक टूट जाता है… गाड़ियां सीधे नदी में गिर जाती हैं… दो ट्रक… दो कारें… एक ऑटो… और कई जिंदगियां खत्म… 16 लोगों की मौत… यह पुल सिर्फ 45 साल पुराना था… अब यहां एक बड़ा सवाल उठता है… अंग्रेजों के जमाने में बने पुल… 100 साल तक चलते हैं… लेकिन आज के पुल… 20-30 साल में जवाब दे देते हैं… क्यों? क्या उस समय तकनीक ज्यादा अच्छी थी? नहीं… फर्क सिर्फ ईमानदारी का था…

कानपुर-उन्नाव का गंगा पुल… 1875 में बना… 1998 तक चला…

कासगंज का नदरई पुल… 100 साल तक खड़ा रहा…

प्रयागराज का करजन ब्रिज… 90 साल से ज्यादा चला…

लेकिन आज… पुल उद्घाटन से पहले गिर रहे हैं… अब याद कीजिए…

गुजरात का मोरबी पुल हादसा… 30 अक्टूबर 2022… सस्पेंशन ब्रिज टूट गया…लोग नदी में गिरते गए… 135 लोगों की मौत… बच्चे… महिलाएं… परिवार… पूरा देश हिल गया था… तब कहा गया था— “सभी पुलों की जांच होगी…” क्या हुई? अगर हुई होती… तो क्या आज भी पुल गिर रहे होते?

वाराणसी… 15 मई 2018… निर्माणाधीन फ्लाईओवर अचानक गिर जाता है… 18 लोगों की मौत…

मुंबई… 2019… सीएसएमटी फुटओवर ब्रिज हादसा… 6 लोगों की मौत…

कोलकाता… माजेरहाट फ्लाईओवर… 3 लोगों की मौत…

विवेकानंद रोड फ्लाईओवर… 27 लोगों की मौत…

अरुणाचल प्रदेश… फुटब्रिज हादसा… 30 मौतें…

दार्जिलिंग… लकड़ी का पुल टूटता है… 32 मौतें…

अब सवाल ये है… क्या ये सिर्फ हादसे हैं? या फिर… यह लापरवाही की हत्या है? अब समझते हैं… आखिर पुल गिर क्यों रहे हैं? सबसे पहला कारण— घटिया मटेरियल… सीमेंट कम… रेत ज्यादा… लोहे की गुणवत्ता खराब… कई मामलों में जांच में सामने आया… कि निर्माण में पैसे बचाने के लिए सस्ता सामान इस्तेमाल हुआ… दूसरा कारण— भ्रष्टाचार… ठेका किसे मिलेगा? कमीशन कितना जाएगा? किस अधिकारी को कितना हिस्सा मिलेगा? जब शुरुआत ही भ्रष्टाचार से होगी… तो पुल मजबूत कैसे बनेगा? तीसरा कारण— मेंटेनेंस की कमी… पुल बना… फीता कट गया… फोटो खिंच गई… बस कहानी खत्म… लेकिन पुलों को समय-समय पर जांच और मरम्मत चाहिए… जो नहीं होती… चौथा कारण— ओवरलोडिंग… जहां 20 टन की क्षमता है… वहां 60 टन के ट्रक निकल रहे हैं… और पांचवां कारण— प्रशासनिक लापरवाही… जर्जर पुलों को समय पर बंद नहीं किया जाता… Warning तक नहीं लगाई जाती… और नतीजा? हादसा…

सबसे दुखद बात क्या है जानते हैं? हर हादसे के बाद… सरकार वही करती है… मुआवजा… जांच समिति… बयान… और फिर खामोशी… किसी इंजीनियर को जेल? नहीं… किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई? नहीं… किसी मंत्री ने इस्तीफा दिया? नहीं… यानी… जनता मरेगी… और सिस्टम चलता रहेगा… अब जरा सोचिए… अगर आपका परिवार उस पुल पर होता तो? अगर आपकी गाड़ी नदी में गिरती? अगर आपका भाई मजदूर होता? अगर आपके पिता उस पुल के नीचे दबे होते? तब क्या सिर्फ मुआवजा काफी होता? नहीं… लोगों को जवाब चाहिए… जिम्मेदारी चाहिए… सजा चाहिए… भारत तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है… एक्सप्रेसवे… फ्लाईओवर… ब्रिज… कॉरिडोर… लेकिन सवाल यह है… क्या हम सिर्फ दिखावे का विकास कर रहे हैं? क्योंकि असली विकास वही है… जो सुरक्षित हो… जहां जनता को भरोसा हो… डर नहीं… और यहां जनता की भी जिम्मेदारी है… हमें सवाल पूछने होंगे… जब पुल टूटे… तो सिर्फ वीडियो शेयर मत कीजिए…

पूछिए— किसने बनाया? किसने पास किया? किसने जांच की? किसे सजा मिली? क्योंकि जब जनता सवाल नहीं पूछती… तब सिस्टम बेखौफ हो जाता है… अब बात समाधान की… क्या किया जाना चाहिए? सबसे पहले— हर पुल का थर्ड पार्टी ऑडिट जरूरी हो… सिर्फ सरकारी कागजों पर नहीं… जमीन पर जांच हो… दूसरा— घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए… तीसरा— दोषी इंजीनियर और अधिकारियों पर आपराधिक केस हो… चौथा— पुराने पुलों की समय-समय पर health monitoring हो… और पांचवा— पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो… क्योंकि जनता के टैक्स के पैसे से पुल बनते हैं… तो जनता को जवाब भी मिलना चाहिए… हमीरपुर का हादसा सिर्फ छह मजदूरों की मौत नहीं है… यह उस सिस्टम की कहानी है… जहां मजदूर पुल बनाते-बनाते खुद मलबे में दब जाते हैं… जहां पुल जनता को जोड़ने से पहले… उसे तोड़ने लगते हैं… जहां विकास के पोस्टर चमकते हैं… लेकिन जमीन पर ढांचा कमजोर होता है…

पुल सिर्फ सीमेंट और लोहे से नहीं बनते… वे भरोसे से बनते हैं… जब कोई व्यक्ति पुल पर चढ़ता है… तो उसे भरोसा होता है… कि वह सुरक्षित घर पहुंच जाएगा लेकिन अगर वही भरोसा टूटने लगे… तो समझिए… सिर्फ पुल नहीं… पूरा सिस्टम कमजोर हो चुका है… आज जरूरत सिर्फ नए पुल बनाने की नहीं… बल्कि ईमानदारी की नींव मजबूत करने की है… वरना… हर बारिश में… हर तूफान में… हर मानसून में… कहीं न कहीं… कोई पुल गिरेगा… और उसके नीचे दबेगी… आम आदमी की जिंदगी… मैं आपसे पूछना चाहती हूं… क्या इन हादसों का सबसे बड़ा कारण भ्रष्टाचार है? या लापरवाही? या फिर सिस्टम की जवाबदेही खत्म हो चुकी है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए…

Praveen Singh

Praveen Singh

Journalist (Director) & Social Media Expert Mail ID - praveensinghrajpoot12@gmail.com

Journalist (Director) - Newstrack, I Praveen Singh Director of online Website newstrack.com. My venture of Newstrack India Pvt Ltd.

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