ADR Report: बीआरएस सबसे अमीर क्षेत्रीय पार्टी, कई दलों का खर्च आय से ज्यादा

ADR Report: एडीआर की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बीआरएस देश की सबसे अमीर क्षेत्रीय पार्टी रही, जबकि कई दलों ने अपनी आय से अधिक खर्च किया। चुनावी बॉन्ड्स, राजनीतिक चंदे और ऑडिट रिपोर्ट में देरी को लेकर वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।

Neel Mani Lal
Published on: 28 May 2026 9:26 PM IST
ADR Report
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ADR Report (Image Credit-Social Media)

ADR Report: देश की क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों की आय और खर्च को लेकर एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की नई रिपोर्ट ने भारतीय राजनीति में धनबल और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रीय दलों की आय और खर्च पर एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक, देश की 40 क्षेत्रीय पार्टियों ने वित्त वर्ष 2024-25 में हजारों करोड़ रुपये की आय घोषित की, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा चंदों और योगदानों से आया। रिपोर्ट के अनुसार, कई क्षेत्रीय दलों ने अपनी कुल आय से अधिक खर्च किया, जबकि बड़ी संख्या में पार्टियों की ऑडिट रिपोर्ट समय पर जमा ही नहीं हुई।

सबसे अमीर क्षेत्रीय पार्टी

रिपोर्ट के अनुसार भारत राष्ट्र दल (बीआरएस) ने सबसे अधिक 685.51 करोड़ रुपये की आय घोषित की है।दूसरे स्थान पर तृणमूल कांग्रेस रही, जिसकी आय 646.39 करोड़ रुपये रही। ओडिशा की बीजू जनता दल ने 297.80 करोड़ रुपये की आय घोषित की।

एडीआर के मुताबिक, 40 क्षेत्रीय दलों की कुल आय 2532.09 करोड़ रुपये रही। इनमें केवल तीन दलों - बीआरएस, टीएमसी और बीजद की हिस्सेदारी कुल आय का बड़ा भाग रही।

चंदे पर टिकी क्षेत्रीय राजनीति

रिपोर्ट बताती है कि क्षेत्रीय दलों की आय का सबसे बड़ा स्रोत स्वैच्छिक योगदान रहे हैं। दलों की कुल आय का 83.64% हिस्सा चंदों और योगदानों से आया। 2117.84 करोड़ रुपये राजनीतिक दलों को स्वैच्छिक दान के रूप में मिले। इनमें से 1796.02 करोड़ रुपये केवल चुनावी बांड से आए। यानी कुल आय का लगभग 71 प्रतिशत हिस्सा चुनावी बॉन्ड्स से आया, जिसने एक बार फिर राजनीतिक फंडिंग की गोपनीयता पर बहस तेज कर दी है।

कई दलों ने कमाई से ज्यादा खर्च किया

एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक, कई राजनीतिक दलों का खर्च उनकी घोषित आय से अधिक रहा।

इन दलों में शामिल हैं: वाईएसआर कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी, जेडीयू, शिरोमणि अकाली दल, सीपीआई (एमएल), एलजेपी रामविलास समेत कुल 12 क्षेत्रीय दल।

रिपोर्ट के अनुसार, 40 क्षेत्रीय दलों का कुल घोषित खर्च 1320.96 करोड़ रुपये रहा। सबसे अधिक खर्च वाईएसआर कांग्रेस ने 295.76 करोड़ रुपये किया। इसके बाद बीआरएस ने 254.91 करोड़ रुपये और तृणमूल कांग्रेस ने 231.47 करोड़ खर्च किए।

रिपोर्ट जमा करने में भारी देरी

एडीआर ने राजनीतिक दलों की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार,40 में से 20 क्षेत्रीय दलों ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट तय समय सीमा के बाद जमा की। देरी 12 दिनों से लेकर 216 दिनों तक रही। 20 अन्य क्षेत्रीय दलों की रिपोर्ट रिपोर्ट तैयार होने तक चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध ही नहीं थी। एडीआर ने इसे लोकतांत्रिक पारदर्शिता के लिए गंभीर चिंता बताया है।

एडीआर ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि राजनीतिक दलों की फंडिंग पूरी तरह सार्वजनिक होनी चाहिए।

संस्था ने मांग की है कि सभी दानदाताओं की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। राजनीतिक दलों को आरटीआर के दायरे में लाया जाए। समय पर ऑडिट रिपोर्ट जमा न करने वाले दलों के खिलाफ कार्रवाई हो।आयकर रिटर्न समय पर दाखिल न करने वाली पार्टियों की टैक्स छूट खत्म की जाए। एडीआर ने यह भी कहा कि दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों में राजनीतिक चंदों की जानकारी सार्वजनिक होती है, लेकिन भारत में अब भी फंडिंग का बड़ा हिस्सा अस्पष्ट बना हुआ है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट चुनावी बॉन्ड योजना को पहले ही असंवैधानिक ठहरा चुका है, लेकिन एडीआर की रिपोर्ट दिखाती है कि वित्त वर्ष 2024-25 तक क्षेत्रीय दलों की फंडिंग में चुनावी बॉन्ड्स की बड़ी भूमिका रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मॉडल ने राजनीतिक दलों को भारी फंडिंग तो दी, लेकिन आम मतदाता के लिए यह जानना मुश्किल बना दिया कि किस कॉरपोरेट या व्यक्ति ने किस दल को कितना पैसा दिया।

Praveen Singh

Praveen Singh

Journalist (Director) & Social Media Expert Mail ID - praveensinghrajpoot12@gmail.com

Journalist (Director) - Newstrack, I Praveen Singh Director of online Website newstrack.com. My venture of Newstrack India Pvt Ltd.

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