C P Radhakrishnan बने देश के 15वें उपराष्ट्रपति, भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में क्यों अहम है ये पद

C P Radhakrishnan New Vice President: सीपी राधाकृष्णन ने आज देश के 15वें उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली। आइये जानें कितना अहम है ये पद।

Sonal Verma
Published on: 12 Sept 2025 1:11 PM IST
Vice President C P Radhakrishnan
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C P Radhakrishnan New Vice President: सीपी राधाकृष्णन ने आज देश के 15वें उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित उपराष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण समारोह में (C P Radhakrishnan Oath Ceremony Today) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 67 वर्षीय राधाकृष्णन को शपथ दिलाई। बता दें कि, 21 जुलाई 2025 को पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने के बाद 9 सितंबर 2025 को नए उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव हुआ था। इसमें NDA उम्मीदवार राधाकृष्णन ने इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार पूर्व जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों के अंतर से हराकर उपराष्ट्रपति पद के लिए जीत हासिल की।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इस विशाल लोकतांत्रिक ढांचे को सुचारु रूप से चलाने के लिए संविधान ने कई संवैधानिक पदों का प्रावधान किया है। इनमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और स्पीकर की तरह ही उपराष्ट्रपति का पद भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पद न केवल देश की राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखने में सहायक है, बल्कि संसदीय कार्यप्रणाली को भी सुचारु रूप से संचालित करता है। उपराष्ट्रपति का पद इसलिए बनाया गया ताकी भारतीय राज्य में निरंतरता बनाए रखी जा सके।

उपराष्ट्रपति पद का संवैधानिक प्रावधान

भारत के संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार, 'भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।' यह पद भारत का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा के सभी निर्वाचित और मनोनीत सांसदों द्वारा किया जाता है। इसका कार्यकाल 5 वर्षों का होता है, लेकिन नया उपराष्ट्रपति कार्यभार ग्रहण करने तक पद पर बने रहते हैं।

उपराष्ट्रपति की अहम जिम्मेदारियां (Vice President Duties and Responsibilities)

राज्यसभा के सभापति के रूप में भूमिका

उपराष्ट्रपति की सबसे प्रमुख भूमिका राज्यसभा (राज्य परिषद) के सभापति के रूप में होती है। वे राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करते हैं और अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाते हैं।

- यदि सदन में बहस के दौरान दोनों पक्षों के मत बराबर हो जाएं, तो उपराष्ट्रपति निर्णायक वोट डालते हैं।

- उनकी भूमिका निष्पक्षता की होती है ताकि सदन में लोकतांत्रिक संवाद कायम रह सके।

- यही कारण है कि उन्हें भारतीय संसद के कामकाज का एक अहम स्तंभ माना जाता है।

राष्ट्रपति के स्थान पर कार्यभार

भारत में यदि किसी कारणवश राष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाता है चाहे मृत्यु हो, इस्तीफा हो, महाभियोग हो या बीमारी की वजह से वे कार्य न कर पाएं तो उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति का कार्यभार संभालते हैं।

- यह कार्य अधिकतम 6 महीने तक किया जा सकता है।

- इस अवधि में नए राष्ट्रपति का चुनाव कराया जाता है।

- इस तरह उपराष्ट्रपति संवैधानिक निरंतरता सुनिश्चित करते हैं और देश को किसी राजनीतिक या संवैधानिक संकट से बचाते हैं।

लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति का महत्व

- राज्यसभा की कार्यवाही को संतुलित करना – यह सुनिश्चित करना कि चर्चा निष्पक्ष और सुव्यवस्थित हो।

- संवैधानिक स्थिरता – राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में देश की बागडोर संभालना।

- तटस्थता का प्रतीक – किसी भी राजनीतिक दल से ऊपर उठकर सदन की गरिमा बनाए रखना।

- लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती देना – संसद में बहस, चर्चा और निर्णय की प्रक्रिया को सुचारु बनाना।

भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली में उपराष्ट्रपति का पद न केवल औपचारिकता का हिस्सा है, बल्कि यह लोकतांत्रिक निरंतरता और संसदीय संचालन का आधार स्तंभ है। उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की तरह ही लोकतांत्रिक ढांचे की मजबूती और स्थिरता के लिए अहम भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि उन्हें भारतीय लोकतंत्र का एक अभिन्न अंग माना जाता है।

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Sonal Verma is a former Reporter at Newstrack.com.

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