Transgender Case: ट्रांसजेंडर संशोधन अधिनियम पर केंद्र का रुख, SC में सुनवाई की मांग

Transgender Case: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से ट्रांसजेंडर संशोधन अधिनियम 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है।

Newstrack/IANS
Published on: 27 May 2026 2:45 PM IST
Supreme Court
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Transgender Case: केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वह देश के अलग-अलग उच्च न्यायालयों में लंबित उन याचिकाओं को अपने पास स्थानांतरित कर ले, जिनमेंट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष केंद्र सरकार की ट्रांसफर याचिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग उच्च न्यायालयों में इस संशोधित कानून को चुनौती देने वाली याचिकाएं लंबित हैं, जिससे अलग-अलग फैसलों की संभावना बन सकती है। उन्होंने कहा, ''हमने ट्रांसजेंडर संशोधन अधिनियम से जुड़ी याचिकाओं को इस अदालत में स्थानांतरित करने के लिए आवेदन दिया है। क्या इस ट्रांसफर याचिका को शुक्रवार को सूचीबद्ध किया जा सकता है? अगर नोटिस जारी होता है, तो हम उच्च न्यायालयों से सुनवाई रोकने को कह सकते हैं।''

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कई बार उच्च न्यायालयों के अलग-अलग विचार भी उपयोगी होते हैं। उन्होंने कहा कि कभी-कभी अलग-अलग राय होना बेहतर होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत इस मामले की तत्काल सुनवाई पर विचार करेगी। यह मामला उस समय सामने आया है जब देश के अलग-अलग उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में इस संशोधित कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं दायर की गई हैं। इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने इस संशोधित कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया था और मामले को तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया था, जिसे मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित किया जाएगा।

केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मांगा जवाब

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि संशोधित प्रावधान ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। याचिका में कहा गया है कि यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक एनएएलएसए फैसले में मान्यता प्राप्त 'स्व-पहचान' के सिद्धांत को कमजोर करता है और इसमें चिकित्सा प्रमाणन तथा राज्य नियंत्रित सत्यापन की व्यवस्था शामिल की गई है।

दिल्ली उच्च न्यायालय पहले ही इस संशोधित अधिनियम को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चुका है, याचिका में कहा गया है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ए) और 21 का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह लिंग पहचान को स्व-घोषित मानने के बजाय आधिकारिक जांच के अधीन कर देता है।

राजस्थान, केरल और कर्नाटक उच्च न्यायालयों में भी इसी तरह की याचिकाएं लंबित हैं। राजस्थान उच्च न्यायालय ने 'नई भोर संस्था' नामक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र से जवाब मांगा है। कर्नाटक उच्च न्यायालय में दो ट्रांसवुमन ने याचिका दायर कर कहा है कि नया कानून स्व-पहचान के अधिकार को मान्यता नहीं देता। केरल उच्च न्यायालय भी इस बात की जांच कर रहा है कि क्या संशोधित कानून ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की परिभाषा को सीमित करता है और क्या इसमें पहचान प्रमाण के लिए मेडिकल परीक्षण की अनिवार्यता सही है।

Vineeta Pandey

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Vineeta Pandey is an News Publisher at Newstrack.com.

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