4 साल की बच्ची को पीरियड्स, 5 साल के बच्चे में मुंहासे और बाल; PGI में बढ़े केस, चौंका रहे आंकड़े

Early Puberty in Children: 4 साल की बच्ची को माहवारी और 5 साल के बच्चे में मुंहासे-बाल जैसे लक्षण सामने आए। जानें Precocious Puberty क्या है, इसके संकेत, कारण और इलाज।

Alakha Singh
Published on: 13 Aug 2026 6:04 PM IST
4 साल की बच्ची को पीरियड्स, 5 साल के बच्चे में मुंहासे और बाल; PGI में बढ़े केस, चौंका रहे आंकड़े
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Periods in 4-year-old girl, Early Puberty in Children: चार साल की उम्र में बच्ची को माहवारी शुरू हो जाए या पांच साल के बच्चे के चेहरे पर मुंहासे और शरीर के निजी हिस्सों में बाल आने लगें, तो इसे सामान्य शारीरिक विकास मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे लक्षण बच्चों में समय से पहले यौवनारंभ (Precocious Puberty) की ओर इशारा कर सकते हैं। रोहतक स्थित पीजीआई के पीडियाट्रिक एंडोक्रायनोलॉजी क्लीनिक में इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। समय से पहले यौवन के मामले डॉक्टरों को भी हैरानी में डाल दिया है।

क्लीनिक में हर महीने करीब छह नए बच्चे समय से पहले यौवन के लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। फिलहाल करीब 40 बच्चों को हार्मोन-सप्रेसिंग उपचार दिया जा रहा है। इनमें सात लड़के शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, लड़कियों में ऐसे मामलों की संख्या लड़कों की तुलना में ज्यादा देखने को मिलती है।

चार साल की बच्ची को माहवारी जैसी ब्लीडिंग!

पीजीआई रोहतक में करीब चार साल की बच्ची को माहवारी जैसी ब्लीडिंग होने के बाद विशेषज्ञों के पास लाया गया। इतनी कम उम्र में इस तरह का लक्षण सामने आने पर डॉक्टरों ने हार्मोन से संबंधित जांच की।

जांच में बच्ची के शरीर में यौवन से जुड़े हार्मोन उसकी उम्र के मुकाबले बढ़े हुए मिले। इसके बाद विशेषज्ञों ने उपचार शुरू किया और उसे नियमित रूप से हार्मोन-सप्रेसिंग इंजेक्शन दिए जा रहे हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक, इतनी कम उम्र में योनि से ब्लीडिंग होना हमेशा सामान्य पीरियड्स का संकेत नहीं होता। इसके पीछे समय से पहले यौवन के अलावा अन्य चिकित्सकीय कारण भी हो सकते हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में बाल रोग विशेषज्ञ या पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से जांच कराना जरूरी है।

पांच साल के बच्चे में मुंहासे और शरीर पर बाल

एक अन्य मामले में करीब पांच साल का बच्चा अपनी उम्र की तुलना में काफी बड़ा दिखाई दे रहा था। उसके चेहरे पर मुंहासे आने लगे थे और निजी अंगों के आसपास बाल भी विकसित हो गए थे।

बच्चों में मुंहासे, शरीर के कुछ हिस्सों में बाल आना, शरीर की गंध में बदलाव या तेजी से लंबाई बढ़ना हार्मोनल बदलाव के संकेत हो सकते हैं। हालांकि, केवल इनमें से किसी एक लक्षण के आधार पर असामयिक यौवन की पुष्टि नहीं की जा सकती। डॉक्टर जरूरत के अनुसार शारीरिक परीक्षण और हार्मोन संबंधी जांच करते हैं।

आखिर क्या है Precocious Puberty?

आमतौर पर लड़कियों में आठ साल और लड़कों में नौ साल की उम्र से पहले यौवन के स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगें, तो इसे प्रीकोशियस प्यूबर्टी यानी असामयिक यौवनारंभ कहा जाता है।

इस स्थिति में शरीर की यौवन प्रक्रिया सामान्य उम्र से काफी पहले सक्रिय हो जाती है। मस्तिष्क से निकलने वाले हार्मोन अंडाशय या अंडकोष को सक्रिय करते हैं और इसके परिणामस्वरूप शरीर में यौवन से जुड़े बदलाव शुरू हो सकते हैं।

लड़कियों में दिखने वाले प्रमुख संकेत

  1. आठ साल से पहले स्तनों का विकास
  2. कम उम्र में तेजी से लंबाई बढ़ना
  3. शरीर या निजी अंगों पर बाल आना
  4. शरीर की गंध में बदलाव
  5. मुंहासे
  6. बहुत कम उम्र में माहवारी या ब्लीडिंग
  7. लड़कों में इन लक्षणों पर दें खास ध्यान
  8. नौ साल से पहले अंडकोष या जननांगों का विकास
  9. चेहरे या शरीर पर बाल आना
  10. आवाज में बदलाव
  11. मुंहासे
  12. तेजी से लंबाई और मांसपेशियों का विकास
शरीर की गंध में बदलाव

2019 में दो-तीन मामले, अब हर महीने करीब छह नए मरीज

पीजीआई रोहतक की पीडियाट्रिक एंडोक्रायनोलॉजी क्लीनिक की चिकित्सक प्रो. अंजलि वर्मा के अनुसार, अब हर महीने करीब छह नए बच्चे असामयिक यौवन के लक्षणों के साथ क्लीनिक पहुंच रहे हैं। इनमें लड़कियों की संख्या अधिक है।

इन मरीजों में केवल हरियाणा के बच्चे ही नहीं हैं। राज्य के अलग-अलग जिलों के अलावा राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी बच्चे उपचार के लिए पीजीआई पहुंच रहे हैं।

विशेषज्ञ के अनुसार, वर्ष 2019 में हर महीने ऐसे करीब दो से तीन नए मामले सामने आते थे। अब इनकी संख्या अधिक दिखाई दे रही है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर जगह बीमारी की वास्तविक दर उसी अनुपात में बढ़ी है। जागरूकता बढ़ने और विशेषज्ञ चिकित्सा तक पहुंच आसान होने के कारण भी पहले की तुलना में अधिक बच्चों की पहचान हो सकती है।

हर मामले में दवा शुरू करना जरूरी नहीं

असामयिक यौवन का इलाज बच्चे की उम्र, लक्षणों की गति, हार्मोन स्तर और हड्डियों की परिपक्वता समेत कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए कम उम्र में यौवन के कोई संकेत दिखने का मतलब यह नहीं कि हर बच्चे को तुरंत हार्मोन रोकने वाली दवा देनी होगी।

डॉक्टर पहले यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि यौवन की प्रक्रिया वास्तव में समय से पहले सक्रिय हुई है या बच्चे में केवल कुछ शुरुआती शारीरिक बदलाव दिखाई दे रहे हैं।

लीयूपरोलाइड इंजेक्शन कैसे काम करता है?

जिन बच्चों में केंद्रीय असामयिक यौवन की पुष्टि होती है, उनमें विशेषज्ञ कुछ मामलों में GnRH agonist दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। लीयूपरोलाइड इसी प्रकार की दवाओं में शामिल है।

यह उपचार मस्तिष्क से यौवन शुरू करने वाले हार्मोनल सिग्नल को दबाने में मदद करता है। इसका उद्देश्य यौवन की प्रक्रिया को उचित उम्र तक नियंत्रित करना और बच्चे के विकास को सामान्य दिशा में बनाए रखना होता है।

उपचार के दौरान डॉक्टर बच्चे की लंबाई, वजन, यौवन के लक्षणों और जरूरत के अनुसार हार्मोन तथा हड्डियों की उम्र की निगरानी करते हैं। इलाज कब तक जारी रखना है, इसका फैसला हर बच्चे की स्थिति के आधार पर किया जाता है।

समय से पहले यौवन से लंबाई पर भी पड़ सकता है असर

असामयिक यौवन में शुरुआत में बच्चा अपनी उम्र के बच्चों से लंबा दिखाई दे सकता है। इसका कारण हड्डियों की वृद्धि का तेजी से होना है। लेकिन अगर यौवन बहुत जल्दी शुरू होकर तेजी से आगे बढ़े, तो बोन एज भी जल्दी बढ़ सकती है और हड्डियों के बढ़ने की क्षमता अपेक्षाकृत जल्दी खत्म हो सकती है।

इसी वजह से कुछ बच्चों में शुरुआत में लंबाई तेजी से बढ़ने के बावजूद आगे चलकर उनकी अंतिम वयस्क लंबाई प्रभावित हो सकती है। डॉक्टर इलाज की जरूरत तय करते समय इस पहलू को भी ध्यान में रखते हैं।

लड़कों में कम उम्र में लक्षण दिखें तो ज्यादा सतर्कता क्यों?

विशेषज्ञों के मुताबिक, लड़कों में नौ साल से पहले यौवन के स्पष्ट लक्षण दिखाई देने पर जांच को गंभीरता से लेना जरूरी है। कुछ मामलों में इसका संबंध केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्या से भी हो सकता है।

इसीलिए डॉक्टर बच्चे की स्थिति के अनुसार हार्मोन टेस्ट, बोन-एज एक्स-रे और अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं। कुछ बच्चों में कारण जानने के लिए मस्तिष्क की MRI भी आवश्यक हो सकती है।

हालांकि, हर बच्चे में MRI की जरूरत नहीं होती। इसका फैसला बच्चे की उम्र, लक्षणों की शुरुआत, उनकी गति और चिकित्सकीय जांच के आधार पर विशेषज्ञ करते हैं।

क्या असामयिक यौवन का सिर्फ एक कारण है?

नहीं। कम उम्र में यौवन शुरू होने के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। कुछ बच्चों में मस्तिष्क से हार्मोनल प्रक्रिया समय से पहले सक्रिय हो जाती है, जबकि कुछ मामलों में शरीर के दूसरे हिस्सों से निकलने वाले हार्मोन इसके पीछे हो सकते हैं।

कभी-कभी कोई स्पष्ट कारण भी नहीं मिलता। इसलिए इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर खुद से बीमारी का कारण तय करने के बजाय विशेषज्ञ से जांच कराना बेहतर है।

माता-पिता किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?

अगर बच्ची में आठ साल से पहले स्तनों का विकास, शरीर पर बाल या माहवारी जैसी ब्लीडिंग दिखाई दे, या बच्चे में उम्र से पहले मुंहासे, बाल, शरीर की गंध और यौवन से जुड़े दूसरे बदलाव तेजी से दिखाई देने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

खासकर लड़के में नौ साल से पहले यौवन के स्पष्ट लक्षण दिखें तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।

पीजीआई रोहतक में सामने आ रहे मामले यह बताते हैं कि बच्चों में समय से पहले होने वाले हार्मोनल बदलाव को पहचानना और सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना महत्वपूर्ण है। हालांकि, हर जल्दी दिखने वाला शारीरिक बदलाव बीमारी नहीं होता और उपचार की जरूरत भी हर बच्चे में अलग हो सकती है। इसलिए सही जांच और विशेषज्ञ की सलाह ही सबसे अहम कदम है।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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