CJI Surya Kant: "तिलचट्टों की तरह व्यवस्था पर हमला कर रहे युवा…" इस मामले पर CJI सख्त, SC कोर्ट की टिप्पणी से हड़कंप

CJI Surya Kant: देश की सर्वोच्च अदालत ने आज शुक्रवार को न्यायपालिका और कानूनी व्यवस्था पर बढ़ते हमलों को लेकर सख्त नाराजगी जाहीर की है।

Priya Singh Bisen
Published on: 15 May 2026 5:59 PM IST (Updated on: 15 May 2026 6:00 PM IST)
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CJI Surya Kant: देश की सर्वोच्च अदालत ने आज शुक्रवार को न्यायपालिका और कानूनी व्यवस्था पर बढ़ते हमलों को लेकर सख्त नाराजगी जाहीर की है। जस्टिस सूर्य कान्त की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ बेरोजगार युवा "तिलचट्टों की तरह" व्यवस्था पर हमला कर रहे हैं। अदालत ने यह भी कहा कि समाज में ऐसे "परजीवी" बढ़ रहे हैं जो संस्थाओं को कमजोर करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।

SC में एडवोकेट संजय दुबे की याचिका

यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट संजय दुबे की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट पर सीनियर एडवोकेट के डेजिग्नेशन से जुड़ी गाइडलाइंस लागू करने में देरी का आरोप लगाते हुए अवमानना कार्रवाई की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई Justice Joymalya Bagchi के साथ गठित बेंच ने की।

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई और स्पष्ट करते हुए कहा कि सीनियर एडवोकेट का दर्जा अदालत द्वारा दिया जाने वाला सम्मान है, न कि किसी मुकदमेबाजी के माध्यम से हासिल करने वाली चीज। बेंच ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को प्रभावित करती हैं।

अदालत उठाए ये सवाल

अदालत ने पूछा कि क्या सीनियर एडवोकेट का टैग सिर्फ "स्टेटस सिंबल" बनकर रह गया है। जस्टिस बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दर्जा सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में सार्थक योगदान देने के लिए होना चाहिए। सुनवाई के दौरान बेंच ने यह भी कहा कि "पूरी दुनिया सीनियर एडवोकेट बनने की हकदार हो सकती है, लेकिन कम से कम आप इसके योग्य नहीं हैं।"

CJI सूर्यकांत ने इस विषय पर जताई गंभीर चिंता

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने सोशल मीडिया पर प्रयोग की जाने वाली भाषा पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे से जुड़े लोगों से अनुशासन और मर्यादा की अपेक्षा की जाती है, लेकिन कुछ लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर न्यायपालिका और संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं।

इसे लेकर बेंच ने कहा कि समाज में पहले से ही ऐसे "पैरासाइट" मौजूद हैं जो संस्थाओं पर हमला कर रहे हैं और यह बहुत चिंता का विषय है। अदालत ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि क्या वह भी ऐसे लोगों के साथ खड़ा होना चाहता है।

SC ने वकीलों की बढ़ती संख्या पर भी जताई चिंता

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी या संदिग्ध डिग्री रखने वाले वकीलों की बढ़ती संख्या पर भी गंभीर रूप से अपनी चिंता व्यक्त की है। CJI ने कहा कि हजारों लोग काला कोट पहनकर वकालत कर रहे हैं, लेकिन उनकी डिग्रियों पर गंभीर सवाल हैं। अदालत ने सुझाव दिया कि इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को करनी चाहिए।

बेंच ने यह भी टिप्पणी की कि बार काउंसिल जैसी संस्थाएं इस मुद्दे पर सख्ती से कार्रवाई नहीं करतीं क्योंकि उन्हें चुनावों में वोटों की चिंता रहती है। अदालत के अनुसार, कानूनी पेशे की साख बनाए रखने के लिए फर्जी डिग्री और अनुशासनहीनता पर कठोर कदम उठाना बेहद आवश्यक है।

बात दे, मामले की सुनवाई आगे बढ़ने पर याचिकाकर्ता ने अदालत से माफी मांगी और अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी।

Priya Singh Bisen

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