TRENDING TAGS :
CJI Surya Kant: CJI सूर्य कांत को किस बात पर आया गुस्सा! सीधे CBI से कर दी एक्शन की मांग
CJI Surya Kant: सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्य कांत का बड़ा गुस्सा फूटा! फर्जी LLB डिग्री वाले वकीलों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए CBI जांच की मांग कर दी। जानिए अदालत में आखिर ऐसा क्या हुआ कि न्यायपालिका तक हिल गई।
CJI Surya Kant: देश की सर्वोच्च अदालत में गुरुवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने पूरी न्यायपालिका को झकझोर कर रख दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने 'काला कोट' पहनने वाले उन फर्जी लोगों के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया है, जो बिना सही योग्यता के कानून के इस पवित्र पेशे में घुसपैठ कर चुके हैं। सीजेआई ने न केवल फर्जी डिग्रियों पर चलने वाले हजारों वकीलों पर सवाल उठाए, बल्कि स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब सीबीआई (CBI) को ऐसे लोगों की कुंडली खंगालने की जरूरत है। अदालत का यह सख्त तेवर तब देखने को मिला जब एक वकील द्वारा दायर की गई अवमानना याचिका पर सुनवाई चल रही थी।
CJI की फटकार,CBI जांच का अल्टीमेटम
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत का गुस्सा तब सातवें आसमान पर पहुंच गया जब उन्होंने न्यायपालिका की शुचिता पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "काले कोट पहने हजारों ऐसे फर्जी लोग अदालतों में घूम रहे हैं, जिनकी एलएलबी डिग्रियों पर गंभीर संदेह है। यह न्याय व्यवस्था के लिए किसी कैंसर से कम नहीं है।" सीजेआई ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वे बस एक 'उचित मामले' का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद वे दिल्ली के वकीलों की संदिग्ध डिग्रियों के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश जारी करने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने इन लोगों को 'परजीवी' करार देते हुए कहा कि ये न्यायपालिका पर अंदर से हमला कर रहे हैं।
Status Symbol या न्याय में भागीदारी?
इसी दौरान बेंच में शामिल जस्टिस जॉयमाला बागची ने भी वकीलों की मंशा पर कड़े सवाल दागे। उन्होंने 'सीनियर एडवोकेट' के पद को लेकर चल रही होड़ पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या यह टैग सिर्फ एक 'स्टेटस सिंबल' है जिसे लोग सजाकर रखने के लिए पाना चाहते हैं, या फिर यह वास्तव में न्याय व्यवस्था में आपकी गंभीरता और भागीदारी को दर्शाता है? अदालत ने साफ कर दिया कि सीनियर पद कोई इनाम नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी जिम्मेदारी है जिसके लिए आचरण और अनुशासन पहली शर्त है।
याचिकाकर्ता वकील की क्लास
विवाद की शुरुआत तब हुई जब एक वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट के खिलाफ अवमानना याचिका दायर कर दी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि हाई कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट बनाने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स को लागू करने में देरी की है। इस पर सीजेआई भड़क गए और वकील को फटकार लगाते हुए कहा, "पूरी दुनिया इस पद के लिए पात्र हो सकती है, लेकिन आपके व्यवहार और फेसबुक पर आपकी भाषा को देखते हुए, आप तो कम से कम नहीं।" जज ने यहां तक कह दिया कि अगर हाई कोर्ट उन्हें सीनियर बनाता भी है, तो उनके आचरण के कारण सुप्रीम कोर्ट उसे खारिज कर देगा।
माफीनामा और आदेश की वापसी
अदालत के सख्त रुख और अवमानना की कार्रवाई के डर से याचिकाकर्ता वकील ने तत्काल माफी मांग ली। वकील ने दलील दी कि वह अपने पेशे को लेकर गंभीर है और आज भी उसके कई मामले अदालत में सूचीबद्ध हैं। माफी मांगे जाने के बाद बेंच ने अपना कड़ा आदेश वापस ले लिया, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि न्यायपालिका के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।


