CJI सूर्यकांत के नाम पर फैलाया गया फर्जी बयान, झूठ फैलाने वालों पर भड़का SC, बताई वायरल पोस्ट की पूरी सच्चाई...

CJI Surya Kant Fake Statement Row: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नाम पर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे एक फर्जी बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त नाराजगी जाहिर की है। अ

Priya Singh Bisen
Published on: 11 May 2026 1:45 PM IST (Updated on: 11 May 2026 1:45 PM IST)
CJI Surya Kant Fake Statement Row
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CJI Surya Kant Fake Statement Row

CJI Surya Kant Fake Statement Row: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नाम पर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे एक फर्जी बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त नाराजगी जाहिर की है। अदालत की तरफ से जारी किये गए प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्य न्यायाधीश के नाम से झूठे और मनगढ़ंत बयान प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें थोड़ी भी सच्चाई नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे न्यायपालिका की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने की बड़ी साजिश बताया है।

सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था एक कथित ग्राफिक

दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक अकाउंट द्वारा एक कथित ग्राफिक शेयर किया गया था, जिसमें मुख्य न्यायाधीश के नाम से विवादित टिप्पणी लिखी गई थी। इस पोस्ट में समाज और जाति से जुड़ा एक भड़काऊ बयान दर्शाया गया, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तगड़ी बहस शुरू हो गई। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश कार्यालय ने तुरंत इस पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि यह बयान पूरी तरह फर्जी, निराधार और दुर्भावनापूर्ण है।

SC ने जारी किया बयान

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि इस तरह की झूठी सामग्री बनाकर उसे देश के सर्वोच्च न्यायिक पद से जोड़ना बहुत गंभीर मामला है। अदालत ने कहा कि यह न सिर्फ संवैधानिक मूल्यों का अपमान है, बल्कि समाज में भ्रम और तनाव फैलाने का भी प्रयास है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि इस प्रकार की हरकतें न्यायपालिका में जनता के भरोसे को कमजोर करती हैं।

अदालत ने सोशल मीडिया यूजर्स से की ये अपील

मुख्य न्यायाधीश कार्यालय ने कहा कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के नाम से फर्जी बयान फैलाना "घोर बेईमानी" और “शरारती साजिश” का भाग है। अदालत ने सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की कि किसी भी सामग्री को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। साथ ही मीडिया संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से भी जिम्मेदारी के साथ काम करने की अपील की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ़ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही भ्रामक सूचनाएं लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए खतरा बन सकती हैं। अदालत ने नागरिकों से संयम बरतने और अफवाहों से बचने की सलाह दी। वहीं, न्यायपालिका की तरफ से कहा गया कि कानून के शासन और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है।

फिलहाल इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गई हैं और कई लोगों ने फर्जी पोस्ट फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वायरल हो रहा कथित बयान पूरी तरह झूठा और भ्रामक था।

Priya Singh Bisen

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