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CJI Surya Kant News: राहुल गांधी के मार्च से पहले CJI सूर्यकांत का बड़ा संदेश, SC के दरवाजे खुले होने का क्या है मतलब?
CJI Surya Kant News: राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च की चर्चा के बीच CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत के दरवाजे हर नागरिक के लिए खुले हैं। जानें इस बयान का मतलब, CJI से मुलाकात का विवाद और बीजेपी की प्रतिक्रिया।
CJI Surya Kant News: Supreme Court Doors Open to All Citizens Amid Rahul Gandhi March Row
CJI Surya Kant News: राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेताओं को मुलाकात का समय नहीं देने के बीच मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि, अदालत के दरवाजे हर 'नागरिक के लिए खुले हैं और कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या लेकर न्यायालय पहुंच सकता है। आम नागरिक हो या कोई जनप्रतिनिधि, कानून के दायरे में आने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी।' CJI का यह बयान ऐसे समय आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की शिकायत और राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की तैयारी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है।
‘कोई भी नागरिक आए, कानून के मुताबिक होगी सुनवाई’
CJI सूर्यकांत ने कहा कि भारत के हर नागरिक को सुप्रीम कोर्ट आने का अधिकार है। अदालत कानून और संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप लोगों की समस्याओं पर विचार करेगी और जिस मामले में जो अधिकार बनता है, उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
उनके बयान का मुख्य संदेश यह है कि न्याय पाने के लिए अदालत का दरवाजा सभी के लिए खुला है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर शिकायत पर स्वतः राहत मिल जाएगी। किसी भी याचिका पर सुनवाई और फैसला संबंधित कानून, तथ्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होता है।
राहुल गांधी ने CJI से क्यों मांगा था मिलने का समय?
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखकर मुलाकात का अनुरोध किया था। उन्होंने इंडिया गठबंधन के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ अपनी बात रखने की इच्छा जताई थी। यह पहल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की चिंताओं के बीच की गई।
विपक्ष की मांग और उसके पीछे के आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च की तैयारी, बढ़ी सियासी हलचल
CJI से मुलाकात का अनुरोध स्वीकार नहीं किए जाने के बाद राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की तैयारी की खबरों ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े अपने सवालों को सामने रखना चाहता है, जबकि इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। इस मामले में अब एक अहम सवाल चर्चा में है कि विपक्ष अपनी शिकायत को किस कानूनी मंच पर और किस प्रक्रिया के तहत उठाता है। अदालत किसी राजनीतिक मांग के आधार पर नहीं, बल्कि उसके सामने रखे गए तथ्यों, कानून और अधिकार क्षेत्र के आधार पर निर्णय करती है।
बीजेपी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
राहुल गांधी को CJI से मुलाकात का समय नहीं मिलने पर बीजेपी ने भी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने सोशल मीडिया पर कहा कि मुख्य न्यायाधीश का विपक्षी नेताओं से नहीं मिलना यह संदेश देता है कि, न्यायपालिका को रोजमर्रा की राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखा जाना चाहिए।
उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए संविधान और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत का अध्ययन करने की सलाह दी। बीजेपी का तर्क है कि संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवादों का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। दूसरी ओर, विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर उठाए जा रहे सवाल इस राजनीतिक विवाद का केंद्र बने हुए हैं।
मुलाकात और न्यायिक सुनवाई में क्या है अंतर?
CJI सूर्यकांत के बयान में यह समझना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खुले होने का अर्थ अदालत की निर्धारित प्रक्रिया के तहत न्याय मांगने का अधिकार है। किसी संवैधानिक पदाधिकारी से व्यक्तिगत मुलाकात का अनुरोध और किसी मामले में न्यायिक सुनवाई की मांग समान नहीं हैं। याचिका दाखिल होने पर उसकी स्वीकार्यता, संबंधित पक्षों की दलीलें और अदालत का अधिकार क्षेत्र जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं।


