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EC विवाद के बीच CJP का बड़ा ऐलान, कल दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस, अभिजीत दीपके बोले- ‘Gyanesh, it’s done bro’
EC में कथित मतभेद और SIR विवाद के बीच CJP ने Election Commission सुधार को अभियान बनाने का ऐलान किया। अभिजीत दीपके की पोस्ट के बाद कल दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी।
नई दिल्ली: चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद Cockroach Janta Party (CJP) ने अब चुनाव आयोग में सुधार और मतदाताओं के अधिकार को अपने अगले बड़े अभियान का मुद्दा बनाने का संकेत दिया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “Election Commission Thik Karo! Important PC tomorrow in Delhi. Gyanesh, it's done bro.”
CJP ने गुरुवार को अपने प्रस्तावित कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है। संगठन की ओर से दिल्ली में दोपहर 12 बजे “Hijacking of India's Democracy” शीर्षक से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। माना जा रहा है कि इसमें चुनाव आयोग के कामकाज, Special Intensive Revision (SIR), मतदाता सूची और वोट के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर संगठन अपनी रणनीति सामने रखेगा।
14 बार आपत्ति का दावा, SIR को लेकर बढ़ा विवाद
CJP का यह ऐलान उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक, ये आपत्तियां मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, Form 6, वोटर डेटाबेस और SIR के दौरान अपनाई गई प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों पर थीं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं। इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद चुनाव आयोग के कामकाज और SIR को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने किसी बड़े अंदरूनी टकराव की तस्वीर को खारिज किया है। EC का कहना है कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के साथ सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के मुताबिक, किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में फैसले से पहले अलग-अलग राय और विचार-विमर्श होना प्रक्रिया का हिस्सा है।
‘वोट का अधिकार सुरक्षित नहीं तो बाकी अभियान बेकार’
CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने चुनाव आयोग को लेकर संगठन की चिंता स्पष्ट करते हुए कहा कि CJP स्कूलों, बेरोजगारी, इंफ्रास्ट्रक्चर और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर लगातार अभियान चला रहा है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव का सबसे अहम माध्यम चुनाव और वोट का अधिकार है।
दास ने कहा कि संगठन “School Theek Karo” और “Adivasi School Theek Karo” जैसे अभियान चला सकता है, लेकिन यदि लोगों को अपने मताधिकार के इस्तेमाल को लेकर ही चिंता हो तो बाकी मुद्दों पर किए जा रहे प्रयासों का असर सीमित हो जाएगा।
उनके मुताबिक, युवाओं और आम मतदाताओं के पास व्यवस्था में बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक माध्यम चुनाव है। इसी वजह से CJP अब चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी अपने अभियानों में प्रमुखता देने की तैयारी कर रहा है।
SIR बना राजनीतिक बहस का केंद्र
चुनाव आयोग से जुड़े मौजूदा विवाद में Special Intensive Revision यानी SIR सबसे प्रमुख मुद्दों में है। विपक्षी दल पहले से ही SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने तथा सत्यापन की प्रक्रिया पर आपत्तियां दर्ज कराते रहे हैं।
वहीं, EC का पक्ष है कि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची का पुनरीक्षण जरूरी प्रक्रिया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके अंतिम निर्णयों में तीनों आयुक्तों की सहमति रही है।
अब गुरुवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नजर
CJP के अचानक अपने कार्यक्रम रद्द कर चुनाव आयोग के मुद्दे पर दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के फैसले से संगठन के अगले अभियान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अभिजीत दीपके के बयान और सौरव दास के वीडियो संदेश से संकेत मिलता है कि CJP अब EC reforms, SIR और voting rights को अपने सार्वजनिक अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाने जा रहा है।
गुरुवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन इस मुद्दे पर अपनी मांगें और आगे की रणनीति स्पष्ट कर सकता है। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से अब तक यही कहा गया है कि SIR समेत उसके निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।


