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CJP News: गांव के सरकारी स्कूलों पर सीजेपी का नया अभियान, अभिभावक करेंगे ‘सोशल ऑडिट’
CJP News: 15 अगस्त से शुरू होगा अभियान, अभिभावक स्कूलों की सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता और सरकारी संसाधनों की स्थिति पर निगरानी रखकर जवाबदेही तय करेंगे।
गांव के सरकारी स्कूलों पर सीजेपी का नया अभियान, अभिभावक करेंगे ‘सोशल ऑडिट’ (Photo- Social Media)
CJP News: कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने अब अपने आंदोलन का फोकस सरकारी स्कूलों और ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ाने का फैसला किया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए देशव्यापी अभियान की घोषणा की है। दीपके का सवाल है कि अगर देश में नई संसद, प्रधानमंत्री आवास और बड़े-बड़े सरकारी भवन बनाए जा सकते हैं, तो गांवों के सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने पर उतना ध्यान क्यों नहीं दिया जाता। इसी सवाल को लेकर सीजेपी अब गांवों तक पहुंचने की तैयारी में है।
15 अगस्त से शुरू होगा अभियान
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान की औपचारिक शुरुआत 15 अगस्त 2026 को करने की योजना है। इसका मुख्य लक्ष्य गांवों के सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाना और स्थानीय लोगों को स्कूलों की निगरानी में शामिल करना है। अभियान में अभिभावकों से सरकारी स्कूलों का सोशल ऑडिट करने की अपील की जाएगी। यानी माता-पिता और स्थानीय लोग खुद यह देखेंगे कि उनके गांव के स्कूल में सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाएं वास्तव में मौजूद हैं या नहीं और उनका इस्तेमाल किस तरह हो रहा है।
इसमें स्कूल की बुनियादी सुविधाओं जैसे कि पीने का पानी, शौचालय, बिजली, कक्षाओं की स्थिति, फर्नीचर, बच्चों के बैठने की व्यवस्था, शिक्षकों की उपलब्धता, पढ़ाई का स्तर और स्कूल परिसर की स्थिति जैसे मुद्दों को देखा जा सकता है। हालांकि, अभी सीजेपी ने सोशल ऑडिट के लिए कोई मानक, डॉक्यूमेंट या विस्तृत विवरण जारी नहीं किए हैं।
सरपंचों को भी जिम्मेदारी लेने की अपील
दीपके ने गांवों के निर्वाचित प्रतिनिधियों, खासकर प्रधानों - सरपंचों से भी सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। इसका आईडिया यह है कि स्कूल सिर्फ शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। गांव के अभिभावक, पंचायत और स्थानीय समुदाय भी स्कूल की स्थिति पर सवाल उठा सकते हैं और उपलब्ध सरकारी संसाधनों की निगरानी कर सकते हैं। यह मॉडल महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि सरकारी स्कूलों का संचालन सरकारी विभागों के माध्यम से होता है, लेकिन उनका असर सीधे गांव के बच्चों और परिवारों पर पड़ता है।
दबाव बनाएगा सीजेपी
यह घोषणा सीजेपी के आंदोलन में एक बड़े बदलाव का संकेत भी है। अब आंदोलन का एजेंडा सरकारी स्कूल, बेरोजगारी और संस्थागत जवाबदेही जैसे व्यापक मुद्दों तक पहुंच रहा है। सीजेपी ने फिलहाल खुद को राजनीतिक पार्टी नहीं, ‘प्रेशर ग्रुप’ बताया है। उसका जोर चुनाव लड़ने के बजाय सरकार और संस्थानों से जवाबदेही मांगने तथा जमीनी स्तर पर सुधार के लिए दबाव बनाने पर है। सीजेपी ने सरकारी स्कूलों के अलावा बेरोजगारी, निजी स्कूलों की फीस और सरकारी संस्थानों में लोगों के घटते भरोसे को भी अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है।
सितंबर में राज्यों में जाने की भी तैयारी
सीजेपी ने अगस्त के पहले सप्ताह में अपनी आगे की रणनीति का एक और हिस्सा सामने रखा था। इसके तहत सितंबर में ‘क्या बोलती पब्लिक’ नाम से देशव्यापी अभियान चलाने की योजना बताई गई है। इस अभियान के तहत सीजेपी की टीम अलग-अलग राज्यों में जाकर आम लोगों से सीधे बातचीत करने और बेरोजगारी तथा शिक्षा जैसे स्थानीय मुद्दों को समझने की तैयारी कर रही है।
सरकारी स्कूलों को लेकर सीजेपी का अभियान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका फोकस केवल सरकार से नई घोषणा करवाने पर नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों को निगरानी में शामिल करने पर है। अगर किसी गांव के अभिभावक नियमित रूप से यह देखना शुरू करते हैं कि स्कूल में क्या सुविधाएं हैं, कितने शिक्षक आते हैं, बच्चों की उपस्थिति कैसी है और सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल कैसे हो रहा है, तो इससे स्थानीय स्तर पर जवाबदेही बढ़ सकती है।


