अब CJP नहीं लेगी मोदी-शाह और CEC का नाम! क्या है कोड लैंग्वेज से एल्गोरिदम को उल्लू बनाने का प्लान?

CJP Instagram Video Row: इंस्टाग्राम पर सरकार और पीएम मोदी की आलोचना वाले वीडियो हटाने का आरोप लगाते हुए सीजेपी ने समर्थकों को कोड वर्ड में बात करने की सलाह दी। जानिए ‘ओदी’, ‘बीसीसीआई’ और ‘गुन्नू’ का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 30 Oct 2026 11:31 AM IST
CJP Instagram Video Row
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CJP Instagram Video Row: कॉकरोच जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि इंस्टाग्राम (Instagram) पर बड़ी संख्या में ऐसे वीडियो हटाए जा रहे हैं, जिनमें केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की जा रही है या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। सीजेपी का यह भी आरोप है कि ऐसे कंटेंट से जुड़े कई अकाउंट्स पर रोक लगाई जा रही है।

इसी दावे के बीच अब सीजेपी अपने समर्थकों को सोशल मीडिया पर ‘कोड वर्ड’ (Code Word) में बात करने की सलाह दे रही है। पार्टी का कहना है कि ऐसा करने से एल्गोरिदम (Algorithm) ऐसे वीडियो को पहचान नहीं पाएगा और उन्हें हटाए जाने से बचाया जा सकेगा। सीजेपी के सह संयोजक आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘ओदी’ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए ‘गुन्नू’ शब्द इस्तेमाल करने की सलाह दी है। गृह मंत्री अमित शाह के लिए भी उन्होंने एक कोड वर्ड बताया है।

'सरकार की आलोचना वाले पोस्ट हटाए जा रहे'

सीजेपी के कई नेताओं ने पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई पोस्ट हटाए जाने का दावा किया है, जिनमें कथित तौर पर सरकार की आलोचना की गई थी। पार्टी का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसके समर्थकों और उनसे जुड़े कंटेंट पर कार्रवाई की जा रही है।

इसी बीच ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन में सीजेपी का साथ निभाने के लिए जर्मनी से भारत तक का सफर तय कर चुके यूट्यूबर ध्रुव राठी ने गुरुवार को एक वीडियो में कथित तौर पर ऐसे कुछ तरीके बताए, जिनसे वीडियो हटाने वाले एल्गोरिदम से बचा जा सकता है।

अब सीजेपी के सह संयोजक आशुतोष रांका ने भी समर्थकों को कुछ कोड वर्ड बताए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए अलग-अलग नाम इस्तेमाल करने को कहा है।

‘कोड लैंग्वेज में बात करनी होगी’

आशुतोष रांका ने कहा कि हजारों की संख्या में पुलिसवालों को तैनात करने के बाद, मेट्रो बंद करने के बाद, ट्रेनों को बंद करने के बाद और फ्लाइट्स से लोगों को निकालने के बाद भी इन लोगों को चैन नहीं पड़ा है। उनका आरोप है कि अब सोशल मीडिया पर भी कार्रवाई करने की कोशिश की जा रही है।

रांका ने कहा कि अब सोशल मीडिया पर सिर्फ साफ-सुथरे लोग ही पाए जाएंगे, बाकी सारे वीडियो उड़ा दिए जाएंगे और सारे अकाउंट्स बंद करा दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आप लोग कल्पना कीजिए कि आप 1945 के जर्मनी में हैं, आप 1935 के भारत में हैं या नॉर्थ कोरिया में हैं। ऐसे हालात में वहां के इतने बड़े-बड़े नेताओं से कैसे भिड़ेंगे। उन्होंने कहा कि उनसे भिड़ने के लिए कोड लैंग्वेज में बात करनी होगी।

मोदी के लिए ‘ओदी’, अमित शाह के लिए ‘BCCI’

आशुतोष रांका ने आगे अपने समर्थकों को अलग-अलग नामों का इस्तेमाल करने की सलाह दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर दिखाते हुए कहा कि अब से मोदी जी की जगह ‘ओदी’ जी की बात की जाएगी।

इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह की तस्वीर दिखाते हुए उन्होंने उनके लिए ‘बीसीसीआई’ शब्द का इस्तेमाल करने को कहा। वहीं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए उन्होंने ‘गुन्नू’ नाम इस्तेमाल करने की बात कही।

यानी सीजेपी की बताई गई इस कोड लैंग्वेज (Code Language) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘ओदी’, अमित शाह को ‘बीसीसीआई’ और ज्ञानेश कुमार को ‘गुन्नू’ कहा जाएगा।

‘एल्गोरिदम को बेवकूफ बनाना होगा’

रांका ने कहा कि अब एल्गोरिदम को बेवकूफ बनाना होगा। उन्होंने समर्थकों से कहा कि गंभीर मुद्दों पर भी व्यंग्य डालिए। उनके मुताबिक ऐसा करने पर एल्गोरिदम वीडियो को पकड़ नहीं पाएगा।

उन्होंने कहा कि थोड़े बहुत वीडियो उड़ाने दीजिए और थोड़े बहुत अकाउंट्स भी बंद होंगे। लेकिन उनका दावा है कि ये लोग इंस्टाग्राम तो क्या, कहीं से भी सीजेपी को नहीं हटा सकते।

रांका ने समर्थकों से कहा कि बने रहिए, डटे रहिए। उन्होंने कहा कि जीतेंगे, लड़ेंगे, न रुकेंगे और न झुकेंगे।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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