प्रोटेस्ट के बीच CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह को कोर्ट से झटका! पुलिस के खिलाफ ये बड़ी मांग खारिज

Court Rejects CJP Plea: कॉकरोच जनता पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह को साकेत अदालत से झटका लगा है। कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में जाने से रोकने और पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।

Aditya Kumar Verma
Published on: 10 Oct 2026 8:53 PM IST
CJP Legal Head Ratna Singh | Saket Court Rejects FIR Plea
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Court Rejects CJP Plea: दिल्ली में शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के बीच पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह को साकेत अदालत (Saket Court) से बड़ा झटका लगा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने और गलत तरीके से बंधक बनाने के आरोप में उन्होंने पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (Chief Judicial Magistrate) अभिनव पांडेय की अदालत ने रत्ना सिंह की ओर से दायर अर्जी पर यह फैसला सुनाया। पेशे से वकील रत्ना सिंह ने अदालत से संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने के साथ ही मामले में पुलिस से स्थिति रिपोर्ट (Status Report) तलब करने की मांग की थी। लेकिन अदालत ने उनकी इस मांग को स्वीकार नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट जाते समय रोकने का आरोप

रत्ना सिंह की याचिका के मुताबिक, शनिवार को वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वकीलों के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) जा रही थीं। उस समय उनके साथ दो अन्य वकील भी मौजूद थे। अर्जी में आरोप लगाया गया कि जब वह अपने घर के बाहर अधिवक्ता तारा नरूला के साथ कार में बैठी थीं, तभी उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया।

याचिका में दावा किया गया कि उनकी कार के आगे और पीछे दो गाड़ियां खड़ी कर दी गई थीं। इसके बाद पुलिसकर्मी कार के बाहर मौजूद रहे और रत्ना सिंह को आगे जाने से रोका गया। उनका आरोप है कि उन्होंने पुलिसकर्मियों से इस कार्रवाई का कारण पूछा, लेकिन उन्हें रोकने का कानूनी आधार नहीं बताया गया।

पुलिस को फोन करने का भी किया जिक्र

रत्ना सिंह ने अपनी अर्जी में घटना के दौरान पुलिस को किए गए फोन का भी उल्लेख किया है। याचिका में इन परिस्थितियों को सामने रखते हुए पुलिसकर्मियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए और पूरे मामले की जांच की मांग की गई।

उनकी ओर से अदालत से अनुरोध किया गया था कि संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाए, ताकि घटना की जांच हो सके। इसके साथ ही पुलिस से स्थिति रिपोर्ट मंगाने की मांग भी की गई थी। हालांकि, अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी।

निजी स्वतंत्रता और सुरक्षा का दिया हवाला

रत्ना सिंह ने अपनी याचिका में निजी स्वतंत्रता (Personal Liberty) और सुरक्षा (Security) को लेकर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि जिस तरह की परिस्थितियों में उन्हें आगे बढ़ने से रोका गया, उसकी जांच जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में सक्षम अधिकारियों की ओर से कार्रवाई होनी चाहिए।

इन्हीं आधारों पर उन्होंने अदालत से पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और संबंधित अधिकारियों से स्थिति रिपोर्ट तलब करने का अनुरोध किया था। लेकिन साकेत अदालत ने उनकी अर्जी खारिज कर दी। यह मामला शनिवार को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान सामने आया।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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