TRENDING TAGS :
CJP को न सरकार पर भरोसा, न सुप्रीम कोर्ट पर! अगले आंदोलन की तैयारी में जुटा संगठन, क्या फिर बढ़ेगा राजनीतिक टकराव?
CJP ने सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों पर सवाल उठाते हुए नए आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। पेपर लीक कानून, प्रदर्शनकारियों की रिहाई और विपक्ष के समर्थन को लेकर जानिए पूरा राजनीतिक विश्लेषण।
cjp next protest (photo source: NDTV)
CJP Next Protest: पेपर लीक आंदोलन के बाद देश की राजनीति में उभरी काक्रोच जनता पार्टी (CJP) अब सरकार के साथ-साथ न्यायपालिका पर भी सवाल उठाती नजर आ रही है। सरकार के साथ बातचीत के बाद धरना समाप्त करने के बावजूद संगठन का कहना है कि उसकी प्रमुख मांगों पर अभी भी पूरी तरह अमल नहीं हुआ है। यही वजह है कि CJP ने एक बार फिर नए आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी आपत्ति
CJP ने केवल केंद्र सरकार की कार्यशैली पर ही सवाल नहीं उठाए हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी पर भी असहमति जताई है जिसमें आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों के प्रति नरमी नहीं बरतने की बात कही गई। संगठन का कहना है कि आंदोलन से जुड़े सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाना चाहिए, चाहे उनके खिलाफ पहले से मुकदमे दर्ज हों।
संगठन का आरोप है कि सरकार द्वारा आश्वासन दिए जाने के बावजूद कई जगह पुलिस की कार्रवाई जारी है और प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती बरती जा रही है। CJP का दावा है कि सरकार ने बातचीत के दौरान किए गए वादों का पूरी तरह पालन नहीं किया।
पेपर लीक कानून पर भी सवाल
केंद्र सरकार ने परीक्षा पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और संबंधित विधेयक लोकसभा से पारित भी हो चुका है। लेकिन CJP इसे पर्याप्त नहीं मानता।
संगठन के प्रवक्ता आशुतोष रांका का कहना है कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका तर्क है कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव, कोचिंग संस्थानों पर प्रभावी नियंत्रण और भर्ती प्रक्रिया में तकनीकी सुधार किए बिना पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा।
दूसरी ओर सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति पहले से काम कर रही है और भविष्य में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
किसान आंदोलन के मॉडल पर आगे बढ़ने की तैयारी?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि CJP अब अपने आंदोलन का दायरा केवल छात्रों तक सीमित नहीं रखना चाहता। संगठन की किसान नेता राकेश टिकैत से हुई मुलाकात को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि छात्र और किसान संगठनों का व्यापक गठजोड़ बनता है तो सरकार के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है। हालांकि अभी तक ऐसा कोई औपचारिक साझा आंदोलन घोषित नहीं किया गया है।
सरकार का दावा- प्रमुख मांगें पूरी कीं
सरकार का पक्ष है कि उसने आंदोलन के दौरान उठाई गई कई प्रमुख मांगों पर कार्रवाई की है। सरकार के अनुसार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया गया, छात्रों के खिलाफ कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए गए और गिरफ्तार छात्रों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
इसके बावजूद CJP का कहना है कि कई स्तरों पर वादों का पालन नहीं हुआ है और इसी कारण संगठन सरकार पर दबाव बनाए रखने के लिए आगे की रणनीति तैयार कर रहा है।
विपक्ष का समर्थन, लेकिन दूरी भी
कांग्रेस और INDIA गठबंधन के कई नेताओं ने आंदोलन के मुद्दों का समर्थन किया, लेकिन अधिकांश विपक्षी दल सीधे जंतर-मंतर के धरने का हिस्सा बनने से बचते रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष सरकार को घेरने के लिए आंदोलन के मुद्दों का इस्तेमाल तो करना चाहता है, लेकिन संगठन के साथ पूरी तरह खड़ा होने से भी बच रहा है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पहले ही केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर रहे हैं। उन्होंने कुछ महीने पहले दावा किया था कि केंद्र सरकार एक वर्ष के भीतर गिर सकती है। CJP आंदोलन के बाद विपक्ष सरकार पर और अधिक आक्रामक नजर आ रहा है।
आगे क्या?
CJP ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि उसकी सभी मांगों पर अमल नहीं हुआ तो वह फिर से सड़क पर उतर सकता है। दूसरी ओर सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसने आवश्यक कदम उठा दिए हैं और अब दबाव की राजनीति के आगे झुकने की संभावना कम है।
ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CJP का अगला आंदोलन कितना व्यापक होता है, सरकार की प्रतिक्रिया क्या रहती है और विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम में कितनी सक्रिय भूमिका निभाता है।


