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CJP के 23 दिन पर भारी पड़ गई Congress? एक स्टैंड से ही आंदोलन के केंद्र में पहुंची पार्टी, समझें गणित
Rahul Gandhi CJP Protest: CJP के 23 दिन पुराने आंदोलन में कांग्रेस की एंट्री ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं। पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के खुलकर सामने आने के बाद कांग्रेस आंदोलन के केंद्र में पहुंचती दिख रही है। समझिए कैसे एक राजनीतिक स्टैंड ने भाजपा और सरकार पर दबाव बढ़ा दिया।
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Rahul Gandhi CJP Protest: माना जाता है कि राजनीति में समय बहुत अहम होता है। किस वक्त कौन सा फैसला लेना है, पूरी सियासत काफी हद तक इसी पर टिकी होती है। पेपर लीक (Paper Leak) के मुद्दे पर छात्रों और CJP के आंदोलन (CJP Protest) को जिस अंदाज और जिस वक्त कांग्रेस (Congress) ने अपने हाथ में लिया है, उससे भाजपा (BJP) और सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सियासी जानकार मानते हैं कि इस स्टैन्ड के बाद कांग्रेस अब पूरे आंदोलन के केंद्र में आती दिख रही है।
CJP के आंदोलन से दूर रही कांग्रेस
नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर देशभर में आंदोलन की रूपरेखा तैयार की थी। पार्टी ने छात्रों की आवाज को उठाने के लिए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम भी शुरू किया। हालांकि, कांग्रेस कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (Cockroach Janta Party) के जंतर-मंतर आंदोलन से दूर रही।
इसके पीछे कांग्रेस के एक बड़े तबके की यह राय थी कि सीजेपी का पूरा आंदोलन भाजपा की ओर से प्रायोजित है। हालांकि, सीजेपी की अपील के बाद राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा जंतर-मंतर पहुंचे थे, लेकिन वह केवल भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक तक सीमित रहे। कांग्रेस ने इस आंदोलन को खुलकर समर्थन नहीं दिया।
मानसून सत्र (Monsoon Session) से पहले सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में विपक्षी दलों की बैठक हुई थी। इस बैठक में भी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर चुप्पी बनाए रखी थी।
पूरे दिन चले आंदोलन के बाद कांग्रेस ने बदला रुख
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, सोमवार को संसद मार्च (Parliament March) में जिस तरह अलग-अलग राज्यों से छात्र जुटे और पूरे दिन आंदोलन चलता रहा, उससे साफ हो गया कि छात्रों और युवाओं में सरकार के खिलाफ काफी नाराजगी है।
इसके बाद कांग्रेस ने अपना रुख बदलते हुए इस आंदोलन को नई दिशा और नई ऊंचाई देने का फैसला किया। इसके बाद आंदोलन की तस्वीर बदल गई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने छात्रों के मुद्दे को पूरी ताकत के साथ उठाना शुरू कर दिया।
सरकार पर संसद के अंदर इस मुद्दे पर चर्चा का दबाव बनाने के लिए राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) से मुलाकात भी की।
युवाओं को कानूनी मदद का ऐलान
कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए युवाओं के साथ-साथ हमले के पीड़ित युवाओं को हरसंभव कानूनी मदद देने का ऐलान किया है।
इससे साफ संकेत मिल रहा है कि कांग्रेस ने अब छात्रों के आंदोलन का नेतृत्व अपने हाथ में लेने का फैसला कर लिया है। पार्टी इस मुद्दे के जरिए सरकार पर दबाव बढ़ाना चाहती है और आंदोलन को उसके अंजाम तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है।
हिरासत में लिए गए राहुल-अखिलेश
इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के कुछ अन्य नेताओं ने मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के पास निषेधाज्ञा (Prohibitory Orders) का उल्लंघन करते हुए अचानक धरना शुरू कर दिया। इसके कुछ घंटे बाद दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने राहुल गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।
राहुल गांधी के साथ धरने में शामिल समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव और हिरासत में लिए गए अन्य सभी नेताओं को कुछ घंटे बाद रात में रिहा कर दिया।
छात्रों के आंदोलन में कांग्रेस की सक्रिय एंट्री और उसके बाद राहुल गांधी तथा अखिलेश यादव के धरने और हिरासत के घटनाक्रम ने इस पूरे मुद्दे को और बड़ा सियासी रूप दे दिया है। कांग्रेस अब इस आंदोलन के केंद्र में आ गई है और सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता दिख रहा है।


