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CJP Protest: CJP प्रदर्शन में शामिल छात्र को 5 लाख का नोटिस, एक दिन बाद बदला आदेश
CJP Protest में शामिल होने के आरोप में गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र को 5 लाख रुपये के बॉन्ड का नोटिस दिया गया, लेकिन पुलिस ने जांच के बाद आदेश वापस ले लिया।
CJP Protest News: ग्रेटर नोएडा की गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के 20 वर्षीय लॉ छात्र को कथित तौर पर जुलाई में हुए Cockroach Janta Party (CJP) प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में 5 लाख रुपये के निजी बॉन्ड का नोटिस जारी किया गया। हालांकि, पुलिस ने मंगलवार को बताया कि मामले की जांच के बाद नोटिस जारी करने का आदेश अगले ही दिन वापस ले लिया गया।
यह मामला ऐसे समय सामने आया जब सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को CJP प्रदर्शन से जुड़े सभी FIR रद्द कर दिए थे, हालांकि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को इस आदेश से बाहर रखा गया था।
छात्र को क्यों भेजा गया था नोटिस?
नोटिस 4 सितंबर को गौतमबुद्ध नगर के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के सेकेंड ईयर लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी को भेजा गया था। त्रिपाठी प्रयागराज के झूंसी के रहने वाले हैं और ग्रेटर नोएडा के Ecotech-1 इलाके में रह रहे थे।
नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत जारी किया गया था। इस प्रावधान के तहत मजिस्ट्रेट शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार के लिए किसी व्यक्ति से बॉन्ड भरने को कह सकता है।
पुलिस के अनुसार, BNSS की धारा 126 और 135 के तहत कार्यवाही शुरू की गई थी। पुलिस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि त्रिपाठी विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों के बीच “सरकार विरोधी और भ्रामक बयान” फैला रहे थे और उन्हें उकसा रहे थे, जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका थी।
5 लाख रुपये के निजी बॉन्ड की मांग
नोटिस में छात्र से जवाब मांगा गया था कि उसे छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद क्यों न किया जाए।
इसके लिए उसे 5 लाख रुपये का निजी बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो स्थानीय सक्षम जमानतदार पेश करने को कहा गया था। मामले की सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की गई थी।
हालांकि, पुलिस ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि दावों की जांच के बाद यह आदेश अगले ही दिन वापस ले लिया गया।
छात्र ने आरोपों से किया इनकार
अक्षत त्रिपाठी ने पुलिस के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने बताया कि वह पिछले करीब तीन महीने से विश्वविद्यालय नहीं गए हैं।
उनके मुताबिक, विश्वविद्यालय में 25 मई से करीब दो महीने की छुट्टी शुरू हो गई थी। इसके बाद कैंपस में रखरखाव का काम चलने के कारण कक्षाएं ऑनलाइन हो गई थीं। त्रिपाठी ने दावा किया कि जुलाई में वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में काम कर रहे थे।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब वह विश्वविद्यालय में मौजूद ही नहीं थे तो वहां छात्रों को भड़काने या प्रदर्शन में शामिल होने का आरोप उन पर कैसे लगाया जा सकता है।
CJP ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला
छात्र को नोटिस जारी किए जाने पर CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट का 1 सितंबर का आदेश नहीं पढ़ा है।
दास ने दावा किया कि CJP प्रदर्शन में शामिल लोगों को कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा मिली हुई है और छात्र को 5 लाख रुपये का बॉन्ड भरने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि संगठन ने केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई करने और सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रति संबंधित जिलाधिकारी को भेजने की मांग की है। CJP की ओर से यह भी कहा गया कि किसी छात्र को निशाना बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठा मामला
CJP प्रदर्शन जुलाई में 20 से 25 तारीख के बीच हुआ था। इन प्रदर्शनों के बाद कई प्रतिभागियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थीं।
1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इन प्रदर्शनकारियों से संबंधित FIR को रद्द करने का आदेश दिया था। हालांकि, अदालत ने आपराधिक antecedents यानी पूर्व आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को इस राहत से बाहर रखा था।
ऐसे में अक्षत त्रिपाठी को नोटिस जारी होने और फिर जांच के बाद उसे वापस लिए जाने ने CJP Protest और छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।


