CJP नेताओं को राहत क्यों नहीं मिली? कोर्ट ने जमानतदारों पर उठाए सवाल, 21 अक्टूबर को अगली सुनवाई

दिल्ली में CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ी। कोर्ट ने जमानतदारों की विश्वसनीयता, बॉन्ड उल्लंघन और शांति भंग होने की आशंका पर क्या कहा?

Alakha Singh
Published on: 19 Oct 2026 11:03 PM IST
CJP नेताओं को राहत क्यों नहीं मिली? कोर्ट ने जमानतदारों पर उठाए सवाल, 21 अक्टूबर को अगली सुनवाई
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दिल्ली में Cockroach Janata Party (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को फिलहाल राहत नहीं मिली है। दक्षिण-पश्चिम जिले के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने दोनों के जमानतदारों को अनुपयुक्त मानते हुए उनकी जमानत स्वीकार नहीं की और उन्हें 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या दोनों नेताओं के आचरण और जांच अधिकारी की ओर से पेश सामग्री को देखते हुए शांति भंग होने की आशंका को नजरअंदाज किया जा सकता है।

मजिस्ट्रेट ने कहा कि सुनवाई के दौरान दोनों नेताओं की ओर से दोबारा कथित अपराध नहीं करने का आश्वासन भरोसा पैदा नहीं करता। आदेश में 11 अक्टूबर को दिए गए बॉन्ड की शर्तों के कथित उल्लंघन, प्रदर्शन से जुड़े उनके पिछले आचरण और जांच अधिकारी की रिपोर्ट का हवाला दिया गया। हालांकि, ये मजिस्ट्रेट की कार्यवाही में दर्ज टिप्पणियां हैं, इन्हें किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए।

कोर्ट ने आदेश में क्या-क्या कहा? 5 बड़ी बातें

1. बॉन्ड तोड़ने और शांति भंग होने की आशंका

मजिस्ट्रेट के मुताबिक, दास और रांका ने 11 अक्टूबर को शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड दिया था, लेकिन इसके बाद कथित तौर पर जंतर-मंतर पहुंचकर प्रतिबंधित स्थल पर प्रदर्शन किया। आदेश में कहा गया कि दोनों का पिछला और मौजूदा आचरण शांति भंग होने की आशंका पैदा करता है।

जांच अधिकारी की रिपोर्ट में सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो का भी उल्लेख था। अधिकारी के अनुसार, इन वीडियो में दोनों का व्यवहार कथित तौर पर आक्रामक और निर्देशों की अवहेलना करने वाला दिखाई देता है।

2. दोबारा अपराध नहीं करने का भरोसा क्यों नहीं माना?

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आश्वासन दिया कि दोनों नेता कथित गतिविधियां दोबारा नहीं करेंगे। लेकिन मजिस्ट्रेट ने कहा कि उनके आचरण और जांच अधिकारी की ओर से पेश सामग्री को देखते हुए इस आश्वासन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

आदेश में कहा गया कि उनका व्यवहार कानून के प्रति सम्मान नहीं दिखाता और ऐसे स्थानों पर प्रदर्शन का आह्वान करने की उनकी प्रवृत्ति को लेकर चिंता है, जिन्हें प्रदर्शन के लिए अधिसूचित नहीं किया गया है।

3. जमानतदारों की पहचान और विश्वसनीयता पर सवाल

मजिस्ट्रेट ने बचाव पक्ष के आग्रह पर दोनों जमानतदारों की जांच की। इसके बाद उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया।

- पहले जमानतदार के दस्तावेजों में विसंगति: जमानत बॉन्ड पर लगी तस्वीर और आधार कार्ड की तस्वीर में कथित अंतर था। संबंधित व्यक्ति कोई दूसरा वैध पहचान पत्र भी पेश नहीं कर सका। उसके जवाबों को भी अस्पष्ट या असंतोषजनक बताया गया।

- दूसरे जमानतदार को बुनियादी जानकारी नहीं थी: वह सौरव दास के माता-पिता के नाम और पते जैसी सामान्य जानकारी नहीं दे सका, जबकि वह उनका जमानतदार बना था।

मजिस्ट्रेट के अनुसार, दोनों जमानतदार यह भरोसा नहीं दिला सके कि वे संबंधित नेताओं की पेशी सुनिश्चित कर पाएंगे या उनके आचरण पर प्रभावी नियंत्रण रख सकेंगे।

4. बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?

दोनों नेताओं के वकीलों ने तत्काल रिहाई की मांग की। बचाव पक्ष की प्रमुख दलीलें थीं:

- 10 अक्टूबर के बाद दोनों ने किसी प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया।

- वे व्यक्तिगत रूप से जंतर-मंतर गए थे।

- उन्होंने दोबारा कथित अपराध नहीं करने का भरोसा दिया।

- जमानत की प्रक्रिया में पहले भी दस्तावेजों को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं।

CJP की लीगल टीम ने पहले भी जमानतदारों को खारिज किए जाने और रिहाई की प्रक्रिया में देरी पर सवाल उठाए थे। पार्टी की ओर से इन कार्रवाइयों को अनुचित बताया गया, जबकि पुलिस ने प्रक्रिया संबंधी आपत्तियों और मजिस्ट्रेट को मिली धमकियों का हवाला दिया था।

5. 21 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई

मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं को नए जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया। उस समय अन्य उपयुक्त जमानतदार उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें दो और दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

आदेश में दोनों पक्षों की दलीलों, पिछले आचरण और शांति भंग होने की आशंका का उल्लेख करते हुए कहा गया कि प्रतिवादियों को अपनी दलीलें लिखित रूप में पेश करने के लिए दो दिन का अवसर दिया जाना उचित होगा। मामले की अगली कार्यवाही 21 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

क्या है पूरा मामला?

CJP के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर कथित तौर पर प्रतिबंधों का उल्लंघन कर प्रवेश करने के मामले में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि दोनों ने बंद गेट और बैरिकेड पार किए तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। जंतर-मंतर को उस समय प्रदर्शन के लिए अधिसूचित स्थल नहीं माना जा रहा था।

14 अक्टूबर को दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। 19 अक्टूबर को हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई। यह कार्रवाई चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ CJP के विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई है।

महत्वपूर्ण बात: यह कार्यवाही शांति बनाए रखने और बॉन्ड की कथित शर्तों के उल्लंघन से जुड़ी है। मजिस्ट्रेट के आदेश में दर्ज आरोप और टिप्पणियां अपने आप में किसी आपराधिक आरोप पर दोषसिद्धि नहीं हैं।

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Alakha Singh is a Senior journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. At Livehindustan Alakha has worked on National, States and Utility beats (Career Beat in last 4 years mainly), Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma in Journalism from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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