CJP का बड़ा ऐलान…15 अगस्त से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान, गांवों के सरकारी स्कूलों की बदलेगी तस्वीर?

CJP School Thik Karo Campaign: सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके 15 अगस्त से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करेंगे। अभियान का लक्ष्य गांवों के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं सुधारना और ग्रामीण बच्चों की समस्याएं उठाना है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 12 Aug 2026 2:50 PM IST
CJP Launches School Thik Karo Campaign
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Image Source- Social Media

CJP School Thik Karo Campaign: कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर गांवों के सरकारी स्कूलों (Government Schools) की हालत सुधारने के लिए ‘स्कूल ठीक करो’ (School Thik Karo) अभियान शुरू करने जा रही है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) ने बुधवार को अभियान के नाम का ऐलान किया।

अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि आजादी के 80 साल बाद गांवों के बच्चों को स्कूल में बुनियादी सुविधाओं के लिए गुहार नहीं लगानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक देश के तौर पर ग्रामीण बच्चों के मामले में हमने सबसे खराब तरीके से असफलता हासिल की है। इसी वजह से इस स्वतंत्रता दिवस पर सीजेपी गांवों के सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करेगी।

अपने गांव से अभियान शुरू करेंगे अभिजीत दिपके

अभिजीत दिपके ने सोमवार को ही गांवों के सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान (Nationwide Campaign) शुरू करने का ऐलान किया था। बुधवार को उन्होंने इसका नाम ‘स्कूल ठीक करो’ रखा।

30 साल के अभिजीत दिपके इस समय सरकार के खिलाफ एक ‘प्रेशर ग्रुप’ (Pressure Group) का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने सरपंचों (Sarpanch) और अभिभावकों (Parents) से बच्चों के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने की सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी उठाने की अपील की है।

उन्होंने लोगों से 15 अगस्त को इस अभियान के लिए संकल्प लेने की अपील की है। दिपके ने कहा कि वह अभियान की शुरुआत अपने गांव हिंगोली (Hingoli) से करेंगे, जो महाराष्ट्र (Maharashtra) के मराठवाड़ा (Marathwada) क्षेत्र में है। वह अपने गांव के सरपंच से संपर्क कर वहां के सरकारी स्कूलों में जरूरी सुधार कराने का अनुरोध करेंगे।

‘80 साल से सरकारी स्कूलों की अनदेखी हुई’

सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में अभिजीत दिपके ने कहा कि गांवों के सरकारी स्कूलों की पिछले 80 साल से अनदेखी की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि ग्रामीण इलाकों के बच्चों को आज भी उन सुविधाओं से क्यों वंचित रहना पड़ता है, जो बड़े शहरों के छात्रों को आसानी से उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि छोटी बच्चियों के लिए ऐसी परिस्थितियां कितनी मुश्किल होती होंगी। दिपके ने कहा कि अगर इस 15 अगस्त को किसी एक चीज पर ध्यान देना चाहिए तो वह सरकारी स्कूलों को ठीक करके एक नई शुरुआत करना होना चाहिए।

बच्चों ने सड़क को लेकर किया प्रदर्शन

सीजेपी की ओर से गांवों के सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के अभियान का ऐलान करने के एक दिन बाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हमीरपुर (Hamirpur) में बच्चों ने खराब सड़क को लेकर प्रदर्शन किया।

यह करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क यमुना बेल्ट (Yamuna Belt) के आसपास की कई बस्तियों को जोड़ती है। बारिश के बाद यह सड़क कीचड़ और दलदल में बदल गई है, जिससे लोगों के लिए यहां से आना-जाना मुश्किल हो गया है।

करीब 3000 लोगों के सामने आवागमन की परेशानी

यह सड़क चंदूपुर (Chandupur) और आसपास के डेरों में रहने वाले करीब 3000 लोगों के लिए मुख्य रास्ता है। इनमें ब्रह्मा का डेरा, बनवासी का डेरा, अथभैयां का डेरा, बच्ची का डेरा, भिखुआ का डेरा, गुसाईं बाबा का डेरा और गंगवा का डेरा शामिल हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की खराब हालत के कारण बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में भी परेशानी हो रही है।

बच्चों ने ब्लॉक किया कलेक्ट्रेट का गेट

मंगलवार सुबह प्रदर्शनकारी बच्चे कलेक्ट्रेट (Collectorate) की ओर बढ़े तो एसडीएम सदर अभिषेक कुमार (Abhishek Kumar) और सीओ यशपाल सिंह (Yashpal Singh) पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बच्चों को रोकने की कोशिश की।

इसके बावजूद बच्चे कलेक्ट्रेट पहुंच गए और मुख्य गेट को ब्लॉक कर दिया। अधिकारियों ने उन्हें प्रदर्शन खत्म कर वहां से हटने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन बच्चे पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। इसके कारण कलेक्ट्रेट के अंदर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी भी बाहर नहीं निकल सके।

छात्र आंदोलनों से आगे बढ़ रहा CJP का फोकस

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान सीजेपी की युवाओं पर केंद्रित गतिविधियों (Youth-Focused Activities) के विस्तार की एक और कड़ी है। अभिजीत दिपके ने अमेरिका (US) से एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक प्लेटफॉर्म (Online Satirical Platform) के तौर पर इसकी शुरुआत की थी। बाद में यह आंदोलन सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शनों तक पहुंचा।

सीजेपी ने नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) और छात्रों से जुड़े दूसरे मुद्दों को लेकर भी प्रदर्शन किए। दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर हुए आंदोलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र और अभिभावक पहुंचे थे। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) भी इस आंदोलन में शामिल हुए थे।

CJP ने खुद को युवा आंदोलन के तौर पर आगे बढ़ाया

सीजेपी के प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री (Union Education Minister) के पद से इस्तीफा दिया था। 25 जुलाई को प्रदर्शन खत्म होने के बाद सीजेपी ने महाराष्ट्र में दो दिन की रणनीति बैठक (Strategy Meeting) की।

इस बैठक के बाद सीजेपी ने ऐलान किया कि वह एक युवा आंदोलन (Youth Movement) के तौर पर आगे काम करती रहेगी। सोनम वांगचुक को इस आंदोलन का मेंटर (Mentor) बनाया गया।

अभियान भी शुरू कर चुका है CJP

पिछले सप्ताह अभिजीत दिपके ने एक और राष्ट्रव्यापी अभियान ‘क्या बोलती पब्लिक’ (Kya Bolti Public) शुरू करने का ऐलान किया था। इस अभियान के जरिए लोगों की समस्याओं और चिंताओं को समझने की कोशिश की जाएगी।

दिपके ने कहा था कि इस आउटरीच अभियान (Outreach Campaign) का पहला फोकस शिक्षा (Education) होगा। अब स्वतंत्रता दिवस पर ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत के साथ सीजेपी का फोकस गांवों के सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और ग्रामीण बच्चों की समस्याओं पर रहेगा।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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