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धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब CJP के निशाने पर ये BJP सांसद, इस्तीफे पर अड़े अभिजीत दीपके!
CJP Demands BJP MP Resignation: NALSAR छात्रों के खिलाफ BCI के आदेश और बाद में लिए गए यू-टर्न को लेकर विवाद बढ़ गया है। CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने BJP सांसद और BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।
CJP Demands BJP MP Resignation: देश में युवाओं और छात्रों की आवाज बनकर उभरी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक बार फिर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले महीने दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) के खिलाफ चले जबरदस्त छात्र आंदोलन के दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना पद छोड़ना पड़ा था। अब CJP के फायरब्रांड राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने सीधे बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन और बिहार से बीजेपी के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा का इस्तीफा मांग लिया है। इस नई मांग के सामने आते ही देश के राजनीतिक और कानूनी गलियारों में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा विवाद?
इस पूरे सियासी तूफान की शुरुआत हैदराबाद की मशहूर लॉ यूनिवर्सिटी नालसार (NALSAR) के दीक्षांत समारोह से हुई। यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा कार्यक्रम में देश के चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI Surya Kant) को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया जा रहा था। हालांकि, 2026 बैच के दर्जनों छात्रों ने पत्र लिखकर CJI को बुलाए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया। छात्रों का कहना था कि मई महीने में कोर्ट की सुनवाई के दौरान CJI द्वारा की गई 'कॉकरोच' टिप्पणी और जंतर-मंतर आंदोलन पर दिए गए कथित बयानों के कारण वे उनका विरोध कर रहे हैं। हालांकि, CJI ने बार-बार यह साफ किया है कि उनके बयान को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया था।
बार काउंसिल के तुगलकी फरमान से भड़का छात्रों का गुस्सा
छात्रों के इस शांतिपूर्ण विरोध के बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा की एंट्री हुई। बीसीआई ने गुरुवार शाम को एक अत्यंत सख्त और विवादित आदेश जारी कर दिया। इसमें देश के सभी राज्य बार काउंसिल को निर्देश दिया गया कि वे नालसार के 2026 बैच के किसी भी छात्र को बतौर वकील नामांकित (Enrolment) न करें। सीधे तौर पर युवा कानून पास छात्रों की वकालत करने पर रोक लगा दी गई। इस आदेश की खबर सामने आते ही देश भर के छात्रों, वकीलों और कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया।
भारी विरोध के आगे बैकफुट पर BCI
आदेश जारी होते ही सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक जबरदस्त विरोध शुरू हो गया। CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने चेतावनी भरे अंदाज में पूछा- "क्या होगा अगर देश के सभी लीगल कॉकरोच एक साथ आ जाएं?" चौतरफा चौके हमले और फजीहत के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया को महज कुछ ही घंटों के भीतर बैकफुट पर आना पड़ा। बीसीआई ने यू-टर्न लेते हुए सफाई दी कि अधिकांश छात्र बेकसूर हैं और बाहरी तत्वों ने उन्हें भड़काया था। इसके बाद इस तुगलकी प्रतिबंध को वापस ले लिया गया, लेकिन CJP इस लीपापोती से संतुष्ट नहीं हुई और सांसद मनन कुमार मिश्रा के सीधे इस्तीफे पर अड़ गई।
CJI ने BCI को लगाई कड़ी फटकार
शुक्रवार को यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंच गया। सुनवाई के दौरान खुद चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया की क्लास लगा दी। CJI ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक देश में छात्रों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने का पूरा अधिकार है। CJI सूर्यकांत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "छात्रों और मेरे बीच के संवाद में दखल देने वाला बीसीआई कौन होता है? बीसीआई का इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई हक ही नहीं बनता है।" सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर तुरंत रोक लगा दी।
धर्मेंद्र प्रधान जैसा हश्र होगा?
सुप्रीम कोर्ट से छात्रों को मिली इस बड़ी राहत के बाद CJP का हौसला सातवें आसमान पर है। CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर सीधा सवाल दागा कि छात्रों के करियर के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करने वाले मनन कुमार मिश्रा को क्या अपने पद पर रहने का नैतिक अधिकार है? जिस तरह से सीजेपी ने नीट मुद्दे पर धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी हिला दी थी, उसी तर्ज पर अब बीसीआई अध्यक्ष और बीजेपी सांसद के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद मोदी सरकार और भाजपा के लिए एक और बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है!


