हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान: झारखंड ऐसा आंदोलन करेगा कि पूरा देश देखेगा! केंद्र को दी चेतावनी

हेमंत सोरेन ने खनिज संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। जानिए झारखंड सरकार का विरोध, 15-20 हजार करोड़ के नुकसान का दावा और केंद्र का जवाब।

Alakha Singh
Published on: 13 Aug 2026 10:53 PM IST (Updated on: 13 Aug 2026 10:55 PM IST)
हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान: झारखंड ऐसा आंदोलन करेगा कि पूरा देश देखेगा! केंद्र को दी चेतावनी
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Hemant Soren's Agitation Announcement: झारखंड में खनिज संपदा और राज्य के अधिकारों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव तेज होता जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने इस विधेयक को वापस नहीं लिया तो झारखंड ऐसा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा।

हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार पर झारखंड के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब खनिज झारखंड का है और जमीन झारखंड की है, तो उसके हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?

'हर जिले, प्रखंड और पंचायत में होगा विरोध'

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा में जल्दबाजी में खान और खनिज संशोधन विधेयक पारित कराकर झारखंड के अधिकारों को कमजोर करने का काम किया है। उन्होंने इसे झारखंड और झारखंडियों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि राज्य इस तरह का सौतेला व्यवहार स्वीकार नहीं करेगा।

हेमंत सोरेन ने कहा कि यदि विधेयक वापस नहीं लिया गया तो हर जिले, हर प्रखंड, हर पंचायत और हर शहर में इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि केंद्र सरकार के नहीं चेते तो झारखंड निर्णायक और ऐतिहासिक फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगा।

सरकार को 15-20 हजार करोड़ के नुकसान का दावा

झारखंड सरकार के मंत्रियों ने भी प्रस्तावित संशोधनों को लेकर केंद्र पर निशाना साधा है। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने खनिज वहन भूमि उपकर (JMBL Cess) से जुड़े प्रस्तावित बदलावों को राज्यों के अधिकारों को खत्म करने की कोशिश बताया।

उनका आरोप है कि संशोधन लागू होने के बाद झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्य केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के बिना खनिज युक्त भूमि पर कर, उपकर या अन्य लेवी लगाने की स्थिति में नहीं रहेंगे। उनके मुताबिक इससे राज्य आर्थिक रूप से कमजोर होंगे और उनके राजस्व पर सीधा असर पड़ेगा।

झारखंड सरकार का दावा है कि नए विधेयक से राज्य को तत्काल 15 से 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।


वित्त मंत्री ने बताया 'काला विधेयक'

झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी विधेयक का विरोध करते हुए इसे राज्य की जनता के लिए 'काला विधेयक' बताया। उन्होंने केंद्र सरकार पर कुछ राज्यों को जानबूझकर आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

राज्य सरकार का तर्क है कि खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व झारखंड की सामाजिक सुरक्षा और विकास योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार का कहना है कि इसका असर मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी योजनाओं पर पड़ सकता है।


केंद्र ने खारिज किए झारखंड सरकार के आरोप

वहीं, केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार के आरोपों को खारिज किया है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि संसद से पारित खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक किसी भी राज्य के अधिकार नहीं छीनता और न ही राज्यों के राजस्व ढांचे पर प्रतिकूल असर डालेगा।

उन्होंने कहा कि विधेयक का उद्देश्य प्रमुख खनिजों का उत्पादन बढ़ाना है। केंद्र सरकार का लक्ष्य खनन क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा किए गए खनन क्षेत्र के सुधारों के बाद खनिजों से राज्यों के राजस्व में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।


केंद्र बनाम झारखंड की लड़ाई अब सड़क पर?

खनिज संपदा झारखंड की अर्थव्यवस्था का अहम आधार है। ऐसे में खनन से जुड़े अधिकारों और राजस्व को लेकर केंद्र और राज्य के बीच बढ़ता विवाद अब राजनीतिक संघर्ष का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

हेमंत सोरेन के आंदोलन के ऐलान के बाद आने वाले दिनों में झारखंड में इस मुद्दे पर बड़े राजनीतिक अभियान की संभावना बढ़ गई है। अगर राज्य सरकार अपने ऐलान के मुताबिक जिले से लेकर पंचायत स्तर तक विरोध शुरू करती है, तो खनिज कानून का मुद्दा संसद से निकलकर सीधे सड़क की राजनीति का बड़ा विषय बन सकता है।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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