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प्रतियोगी परीक्षाओं का बदल सकता है सिस्टम, NTA-SSC और रेलवे के लिए बनेगा साझा कैलेंडर?
Common Exam Calendar: नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स NTA, SSC, IBPS और रेलवे भर्ती बोर्डों के लिए साझा परीक्षा कैलेंडर पर विचार कर रही है। परीक्षा केंद्र बढ़ाने और CBT व्यवस्था के विस्तार का भी प्रस्ताव है।
Common Exam Calendar
Common Exam Calendar: देश में बड़ी प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं की मौजूदा व्यवस्था में आने वाले समय में बदलाव हो सकता है। अलग-अलग परीक्षा कैलेंडर और लंबे परीक्षा चक्र को व्यवस्थित करने के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित उच्चाधिकार प्राप्त टास्क फोर्स साझा परीक्षा कैलेंडर बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इसके तहत राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS) और रेलवे भर्ती बोर्डों के बीच समन्वय स्थापित करने की योजना है। इसका उद्देश्य बड़ी परीक्षाओं की तारीखों के टकराव को कम करना, परीक्षा केंद्रों का पूरे साल बेहतर इस्तेमाल करना और कई दिनों तक चलने वाली परीक्षाओं को कम समय में पूरा करना है। हालांकि, ये अभी टास्क फोर्स के विचाराधीन प्रस्ताव हैं। इस पर अंतिम सरकारी निर्णय नहीं हुआ है।
नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित हुई टास्क फोर्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई 2026 को नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में उच्चाधिकार प्राप्त टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की थी। इसके बाद सरकार ने स्पष्ट किया था कि यह टास्क फोर्स सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन, सुरक्षा, स्वरूप और प्रशासन में व्यापक बदलाव के विकल्पों का अध्ययन करेगी। इसके दायरे में परीक्षा की विश्वसनीयता और सुरक्षा मजबूत करना, उपयुक्त तकनीक का इस्तेमाल, परीक्षा केंद्रों का ढांचा बढ़ाना, अभ्यर्थियों की पहुंच आसान बनाना और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना शामिल है। टास्क फोर्स ने विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षण संस्थानों और परीक्षा कराने वाली संस्थाओं से भी सुझाव मांगे थे।
NTA, SSC, IBPS और रेलवे के लिए साझा कैलेंडर पर विचार
साझा परीक्षा कैलेंडर की जरूरत इसलिए महसूस की जा रही है क्योंकि NTA, SSC, IBPS और रेलवे भर्ती बोर्ड अपनी-अपनी परीक्षाएं अलग-अलग व्यवस्था के तहत आयोजित करते हैं। ऐसे में कई बार बड़ी परीक्षाओं की तारीखें आसपास आ जाती हैं या एक-दूसरे से टकरा जाती हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सभी एजेंसियां आपसी समन्वय से पहले ही वार्षिक परीक्षा कार्यक्रम तैयार कर सकती हैं। इससे अभ्यर्थियों के सामने एक परीक्षा चुनने की मजबूरी कम हो सकती है।
इसके साथ ही एक एजेंसी के लिए तैयार कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्रों का इस्तेमाल दूसरी एजेंसी भी अलग समय पर कर सकेगी। टास्क फोर्स के स्तर पर प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षा आयोजित करने, केंद्र प्रबंधन और सुरक्षा जैसी जिम्मेदारियों को अलग-अलग विशेषज्ञ एजेंसियों में बांटने पर भी विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पूरी परीक्षा व्यवस्था को किसी एक संस्था या एजेंसी पर निर्भर रहने से बचाना है।
परीक्षा केंद्र बढ़ाने और परीक्षा चक्र छोटा करने की तैयारी
परीक्षा सुधारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा परीक्षाओं को पूरा करने में लगने वाला समय घटाना है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के कारण कई कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं अलग-अलग दिनों और पालियों में आयोजित करनी पड़ती हैं। यदि NTA, SSC, IBPS और रेलवे के पास उपलब्ध परीक्षा केंद्रों और तकनीकी संसाधनों का साझा ढांचा तैयार होता है, तो एक ही समय में अधिक अभ्यर्थियों की परीक्षा कराई जा सकती है। इससे परीक्षा आयोजित करने में लगने वाले दिनों की संख्या कम हो सकती है।
हर जिले में पर्याप्त परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी इसी योजना का हिस्सा है। इससे खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को परीक्षा देने के लिए लंबी दूरी तय करने की परेशानी कम हो सकती है।
सभी बड़ी परीक्षाओं को CBT मोड में लाने पर भी चर्चा
टास्क फोर्स सभी बड़ी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT की ओर ले जाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। हालांकि, इसे अभी तय सरकारी नीति नहीं माना जाना चाहिए। विशेष रूप से NEET-UG जैसी बड़ी परीक्षा को कंप्यूटर आधारित कराने के लिए देशभर में एक साथ बड़ी संख्या में सुरक्षित कंप्यूटर केंद्रों की जरूरत होगी। करीब 25 लाख अभ्यर्थियों वाली इस परीक्षा के लिए ग्रामीण और कम डिजिटल ढांचे वाले क्षेत्रों में पर्याप्त केंद्र उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। इसी वजह से राष्ट्रीय स्तर पर CBT ढांचे की क्षमता और परीक्षा सुरक्षा की समीक्षा की जा रही है।
मार्च 2027 तक का परीक्षा कैलेंडर जारी कर चुका है NTA
NTA ने इस बीच मार्च 2027 तक होने वाली अपनी परीक्षाओं का कैलेंडर जारी कर दिया है। टास्क फोर्स की सिफारिशें सामने आने और सरकार की ओर से उन पर निर्णय लिए जाने के बाद भविष्य के परीक्षा कार्यक्रमों में बदलाव संभव है। ऐसे में अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि NTA, SSC, बैंक और रेलवे की परीक्षाएं अगले कैलेंडर से ही साझा व्यवस्था के तहत आयोजित होने लगेंगी। फिलहाल साझा कैलेंडर परीक्षा सुधारों के बड़े प्रस्तावों में शामिल है।
NEET-UG विवाद के बाद परीक्षा सुरक्षा पर जोर
परीक्षा सुधारों की चर्चा केवल तारीखें तय करने तक सीमित नहीं है। वर्ष 2024 के NEET-UG विवाद और दूसरी परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों के बाद परीक्षा सुरक्षा और अभ्यर्थियों का भरोसा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स ने पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन से भी विचार-विमर्श किया है। उन्होंने 2024 के विवाद के बाद गठित विशेषज्ञ समिति का नेतृत्व किया था।
मौजूदा टास्क फोर्स पहले की सिफारिशों का भी अध्ययन कर रही है, ताकि परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्था में सुधार के लिए नया ढांचा तैयार किया जा सके।
परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया की समय-सीमा तय करने पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में समय की निश्चितता को महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि लंबा परीक्षा चक्र अभ्यर्थियों के साथ उनके परिवारों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ाता है। तैयारी की अवधि बढ़ने से कोचिंग, किराया, यात्रा और रहने जैसे खर्च भी बढ़ते जाते हैं। इसी वजह से परीक्षा कम समय में पूरी करने और परिणाम तथा भर्ती प्रक्रिया को निश्चित समय-सीमा में लाने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इसके साथ परीक्षा के मानकों और सुरक्षा से समझौता नहीं करना भी जरूरी होगा।
टास्क फोर्स की रिपोर्ट के बाद साफ होगी नई व्यवस्था
साझा परीक्षा कैलेंडर और हर जिले में परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता से तारीखों के टकराव और लंबी दूरी तय करने जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं। हालांकि, परीक्षा सुधारों की सबसे बड़ी कसौटी उनकी विश्वसनीयता होगी। पेपर लीक रोकना, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्र तैयार करने और पहुंचाने की गोपनीयता, तकनीकी प्रणाली को साइबर हमलों से सुरक्षित रखना और परिणाम समय पर जारी करना ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन पर अभ्यर्थियों का भरोसा निर्भर करता है।
अब नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि NTA, SSC, IBPS और रेलवे भर्ती बोर्डों के लिए साझा परीक्षा व्यवस्था किस रूप में लागू की जाएगी और देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में वास्तविक बदलाव कब से शुरू होगा।


