TRENDING TAGS :
पहले केजरीवाल का मुखौटा समझी गई CJP… अब राहुल गांधी ने खुद बढ़ाया हाथ! क्या है कांग्रेस का गणित?
Congress Reaches Out to CJP: कांग्रेस ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और अभिजीत दीपके को राहुल गांधी की चाय पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया था। जानिए प्रशांत भूषण की मध्यस्थता, सीजेपी का रुख और 16 अक्टूबर के तिरंगा मार्च की पूरी कहानी।
Image Source- Social Media
Congress Reaches Out to CJP: विपक्षी राजनीति में इन दिनों एक दिलचस्प घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके की ओर संपर्क बढ़ाने की कोशिश की है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की ओर से मंगलवार, 13 अक्टूबर को आयोजित चाय पार्टी में सीजेपी को भी शामिल होने का न्योता दिया गया था। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक इस न्योते को लेकर अभिजीत दीपके की तरफ से खास उत्साह नहीं दिखा।
राहुल गांधी के घर हुई विपक्षी नेताओं की चाय पार्टी
मंगलवार शाम 5 बजे सुनहरेन बाग रोड स्थित राहुल गांधी के आवास पर ‘इंडिया’ गठबंधन (INDIA Alliance) के घटक दलों के नेताओं, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और छात्र नेताओं के लिए चाय पार्टी आयोजित की गई थी। इस आयोजन में विपक्ष के कई बड़े चेहरे शामिल हुए।
चाय पार्टी में सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के सांसद अवधेश प्रसाद और इकरा हसन, जेएमएम (JMM) सांसद महुआ माजी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, एनसीपी (NCP) की सुप्रिया सुले, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सागरिका घोष, सीपीआई (CPI) के डी राजा और सीपीआईएम (CPIM) के एमए बेबी समेत कई विपक्षी नेता पहुंचे थे।
इस दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की चीफ नेहा बोरा भी मौजूद थीं। इसी कार्यक्रम में कांग्रेस की ओर से कॉकरोच जनता पार्टी को भी शामिल होने का न्योता दिया गया था।
प्रशांत भूषण को बनाया गया था मध्यस्थ
एनडीटीवी (NDTV) की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कांग्रेस ने सीजेपी नेतृत्व से संपर्क साधने के लिए जाने-माने वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण को मध्यस्थ बनाया था।
हालांकि, जिस समय सीजेपी नेतृत्व से संपर्क करने की कोशिश की गई, उस वक्त अभिजीत दीपके महाराष्ट्र में थे। वहीं सीजेपी के अन्य प्रमुख नेता आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे जंतर-मंतर पर अचानक किए गए प्रदर्शन के कारण पुलिस हिरासत में थे।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक संपर्क तो स्थापित हो गया, लेकिन अभिजीत दीपके की ओर से इस न्योते को लेकर कोई खास उत्साह नहीं दिखाया गया।
सीजेपी को लेकर कांग्रेस में पहले थी झिझक
सीजेपी को लेकर कांग्रेस के एक वर्ग में पहले से ही आशंका रही है। कांग्रेस के इस हिस्से में सीजेपी को आम आदमी पार्टी (AAP) का ही एक मोर्चा और उसका मुखौटा माना जाता रहा है।
हालांकि, मई में सोशल मीडिया ट्रेंड के तौर पर सामने आने के बाद सीजेपी ने धीरे-धीरे अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाई। जून और जुलाई में परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए बड़े प्रदर्शन के बाद भी सीजेपी चर्चा में रही।
इन आंदोलनों के बाद ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बात सामने आई थी। इसी के साथ सीजेपी की गतिविधियों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ती गई।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद बदला कांग्रेस का रुख
10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान करीब 7 हजार लोगों को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद राहुल गांधी ने सीजेपी समेत अलग-अलग विरोध प्रदर्शनों को एक ही लड़ाई का हिस्सा बताते हुए अपना रुख सार्वजनिक तौर पर सामने रखा।
एक बड़े सड़क प्रदर्शन का नेतृत्व करने से पहले राहुल गांधी ने कहा था कि अलग-अलग विरोध प्रदर्शन नहीं चल रहे हैं, बल्कि यह एक ही विरोध प्रदर्शन है। उन्होंने कहा था कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि कोई व्यक्ति किस संगठन से जुड़ा है। अगर कोई संविधान की रक्षा कर रहा है, तो कांग्रेस उसके साथ खड़ी होगी।
राहुल गांधी ने कहा था, “अगर आप संविधान की रक्षा कर रहे हैं—जैसा कि हम कर रहे हैं—तो हम आपके साथ हैं। हम आपका समर्थन करेंगे, आपकी मदद करेंगे और आपकी रक्षा करेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा था कि वह सीजेपी समेत ऐसे लोगों से भी इसी तरह के समर्थन की उम्मीद करते हैं और इसे भारत के लोगों के प्रति प्रेम जताने का एक तरीका बताया था।
सुप्रीम कोर्ट मार्च से दूर रही सीजेपी
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए ‘इंडिया’ गठबंधन के मार्च से सीजेपी दूर रही थी। कांग्रेस नेतृत्व का मानना था कि सोमवार का विरोध प्रदर्शन लोगों को एकजुट करने के लिहाज से सफल रहा।
इसके बाद मंगलवार को सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी का मामला सामने आया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी की निंदा की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में तिरंगा फहराना अपराध नहीं है और युवाओं को जेल में डालना कायरता है।
दीपके ने राहुल गांधी को कहा धन्यवाद
राहुल गांधी के इस बयान के बाद अभिजीत दीपके ने उनका धन्यवाद किया। दीपके ने आशुतोष रांका और सौरव दास की कथित अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए राहुल गांधी का आभार जताया।
सोशल मीडिया पर जारी अपने वीडियो संदेश में दीपके ने कहा, “आशुतोष रंका और सौरव दास की अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए धन्यवाद, विपक्ष के नेता राहुल गांधी जी।”
इसके बाद दीपके ने अपने अगले कार्यक्रम का भी ऐलान कर दिया।
16 अक्टूबर को ‘तिरंगा मार्च’ का ऐलान
अभिजीत दीपके ने सभी “देशभक्तों और तिरंगे से प्यार करने वालों” से शुक्रवार, 16 अक्टूबर की शाम 5 बजे दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में इकट्ठा होने की अपील की है।
उन्होंने लोगों से अपने साथ राष्ट्रीय ध्वज लेकर आने को कहा है। साथ ही अन्य शहरों में भी ‘तिरंगा मार्च’ (Tiranga March) निकालने का आह्वान किया है।
यानी एक तरफ कांग्रेस और सीजेपी के बीच संपर्क की कोशिश दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी तरफ सीजेपी अपने अलग आंदोलन और ‘तिरंगा मार्च’ के जरिए आगे बढ़ने की तैयारी में है। कांग्रेस की ओर से न्योता दिए जाने के बावजूद अभिजीत दीपके की तरफ से चाय पार्टी में शामिल होने को लेकर उत्साह नहीं दिखना इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना रहा है।


