Congress-TMC Merger: टीएमसी का नहीं होगा कांग्रेस में विलय, KC वेणुगोपाल ने अफवाहों पर लगाया विराम

Congress-TMC Merger: कांग्रेस ने टीएमसी के साथ विलय की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के साथ हुई मुलाकात केवल राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित थी। दोनों दलों ने फिलहाल किसी भी तरह के राजनीतिक विलय की संभावना से इनकार किया है।

Shivam Shrivastava
Published on: 11 Jun 2026 6:34 PM IST
Congress-TMC Merger: टीएमसी का नहीं होगा कांग्रेस में विलय, KC वेणुगोपाल ने अफवाहों पर लगाया विराम
X

Congress rejects TMC merger buzz: कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आपस में विलय होने की खबरों को कांग्रेस ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। गुरुवार को पार्टी ने साफ किया कि ये बातें महज अफवाह हैं और इनमें कोई सच्चाई नहीं है। कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि हाल ही में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ जो मुलाकात हुई थी, उसका दायरा सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दों तक सीमित था। दोनों पार्टियों के एक होने जैसी कोई भी चर्चा इस बैठक का हिस्सा नहीं थी। वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि इन नेताओं के बीच हुई बातचीत का मुख्य एजेंडा राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों को और भी मजबूती से उठाने की रणनीति बनाना भर था।

इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद से तेज हुई थीं अटकलें

इन कयासों को तब अचानक हवा मिल गई जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने सोमवार को नई दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की बैठक में हिस्सा लिया। इसके बाद इन दोनों नेताओं ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी अलग-अलग मुलाकात की। राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा इसलिए भी तेज हुई क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इससे पहले इंडिया ब्लॉक की बैठकों से अक्सर दूरी बनाए रखती थीं और अपनी जगह पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को भेज देती थीं। जून 2023 में पटना में हुई विपक्षी गठबंधन की पहली बैठक के साथ-साथ दिल्ली में हुई कई अन्य बैठकों से भी वह नदारद रही थीं।

यह पूरी राजनीतिक हलचल ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बमुश्किल एक महीने के भीतर ही टीएमसी के भीतर बड़ी फूट पड़ गई है। 294 सीटों वाली विधानसभा में टीएमसी हाल ही में महज 80 सीटों पर सिमट गई थी।

टीएमसी नेताओं ने भी विलय की खबरों को नकारा

इस पूरे मामले पर तृणमूल कांग्रेस की तरफ से आधिकारिक तौर पर कोई सीधा बयान नहीं आया है। हालांकि ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने यह जरूर कहा कि कांग्रेस के साथ मिलकर काम करना पार्टी के लिए काफी अहम है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सहयोग सिर्फ गठबंधन तक सीमित रहेगा या फिर विलय का रूप लेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

दूसरी तरफ, टीएमसी के 80 में से 64 विधायकों के समर्थन का दावा करने वाले रितब्रत बनर्जी ने कांग्रेस के साथ विलय की बातों को सिरे से नकार दिया है। उनका सीधा कहना था कि जहां तक विधायक दल की बात है, तो वे किसी भी कीमत पर कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं। संसद में भी उनके दो-तिहाई से ज्यादा सांसद कांग्रेस के साथ नहीं जा रहे हैं। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कौन किसके साथ विलय कर रहा है।

कांग्रेस के साथ ममता बनर्जी का पुराना नाता

पश्चिम बंगाल की तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकीं ममता बनर्जी का कांग्रेस के साथ काफी पुराना और गहरा रिश्ता रहा है। उन्होंने दो दशक से भी ज्यादा समय कांग्रेस में गुजारा था। साल 1997 में राज्य के नेतृत्व के साथ बढ़ते मतभेदों के चलते उन्होंने पार्टी से अपना नाता तोड़ लिया था। उस वक्त उनका मानना था कि कांग्रेस का आलाकमान पश्चिम बंगाल की लगातार अनदेखी कर रहा है और राज्य में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार का डटकर मुकाबला करने की इच्छाशक्ति पार्टी के भीतर नहीं बची है।

इसी नाराजगी के बाद 1998 में उन्होंने अपनी अलग पार्टी तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की। यह पार्टी धीरे-धीरे राज्य में मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी और आखिरकार 2011 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चे के लंबे शासन को उखाड़ फेंका।

फिलहाल कांग्रेस और टीएमसी दोनों ने ही विलय की सभी अटकलों को खारिज कर दिया है। लेकिन एक तरफ करारी चुनावी हार और दूसरी तरफ पार्टी के भीतर चल रही जबरदस्त खींचतान के बीच, राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर पैनी नजर रखे हुए हैं कि क्या ममता बनर्जी अपना राजनीतिक वजूद फिर से मजबूत करने के लिए भविष्य में कांग्रेस के साथ किसी बड़े गठजोड़ की राह तलाशेंगी।

Shivam Shrivastava
ABOUT THE AUTHOR

Shivam Shrivastava

शिवम उत्तर प्रदेश के एक युवा और उभरते पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 4 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वे राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और हाइपरलोकल खबरों की गहरी समझ रखते हैं और समसामयिक मुद्दों पर सटीक व प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी विशेष रुचि डाटा-ड्रिवन पत्रकारिता और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग में है, जिससे उनकी खबरें अधिक तथ्यात्मक और विश्वसनीय बनती हैं। वे जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप को भी समझते हैं। लेखन और रिसर्च में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।

Next Story