Cyclone Arnab Alert: चक्रवात अर्नब कमजोर पड़ा, लेकिन खतरा बरकरार, यूपी-बिहार में भारी बारिश

Cyclone Arnab Alert: चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश के तट पर दस्तक देकर भारी नुकसान पहुंचाया।

Yogesh Mishra
Published on: 29 Oct 2026 12:36 AM IST
Cyclone Arnab Alert: चक्रवात अर्नब कमजोर पड़ा, लेकिन खतरा बरकरार, यूपी-बिहार में भारी बारिश
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Cyclone Arnab Alert: बंगाल की खाड़ी से उठे अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफ़ान 'अर्नब' ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के समुद्री तट पर भारी तबाही मचाई। करीब छह घंटे तक समुद्र तट से टकराने की प्रक्रिया के दौरान 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाओं के झोंके चले। अनेक स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए। सड़कें जलमग्न हो गईं। कच्चे मकानों, खड़ी फसलों तथा बिजली और संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। बुधवार दोपहर तक की समाचार रिपोर्टों में तीन लोगों की मौत की खबर सामने आई, हालांकि मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग समाचार एजेंसियों और प्रशासनिक सूचनाओं में अंतर बना हुआ है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट में उस समय तक किसी मृत्यु की पुष्टि नहीं हुई थी, जबकि हिंदुस्तान टाइम्स की लाइव रिपोर्ट में तीन लोगों के मारे जाने का उल्लेख किया गया। विशाखापत्तनम में करंट लगने से एक व्यक्ति की मौत की खबर भी सामने आई है। नुकसान और जनहानि का अंतिम आधिकारिक आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है। 

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने पुष्टि की है कि अर्नब ने बुधवार तड़के दो बजे से सुबह आठ बजे के बीच आंध्र प्रदेश और यानम के तट को पार किया। तूफ़ान का केंद्रीय हिस्सा सुबह आठ बजे तक पूरी तरह जमीन पर पहुंच चुका था। चक्रवात का केंद्र नरसापुर से लगभग 20 किलोमीटर पूर्व-उत्तरपूर्व, यानम से 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम तथा काकीनाडा से 60 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम के आसपास समुद्री तट से गुजरा। उस समय लगातार चलने वाली हवाओं की गति 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे थी, जबकि तेज झोंकों की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची। यह आधिकारिक रूप से दर्ज लैंडफॉल की स्थिति है। इसके साथ ही कल तक तूफ़ान के तट से टकराने के स्थान और समय को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई थी, वह अब समाप्त हो गई है। 

तट पार करने के बाद कमजोर पड़ा अर्नब, लेकिन खतरा अभी समाप्त नहीं

अर्नब बुधवार सुबह तट पार करने के तुरंत बाद अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफ़ान की श्रेणी से कमजोर होकर गंभीर चक्रवाती तूफ़ान में बदल गया। मौसम विभाग के मुताबिक सुबह साढ़े आठ बजे उसका केंद्र तटीय आंध्र प्रदेश और यानम के आसपास बना हुआ था। पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे यह नरसापुर से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-उत्तरपूर्व, यानम से करीब 44 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपश्चिम तथा काकीनाडा से लगभग 60 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपश्चिम में स्थित था। पिछले छह घंटे में इसकी आगे बढ़ने की गति घटकर लगभग पांच किलोमीटर प्रति घंटा रह गई थी। मौसम विभाग ने इसके अगले 48 घंटों में उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में बढ़ते हुए धीरे-धीरे कमजोर होने का अनुमान जताया है। बुधवार शाम छह बजकर आठ मिनट पर जारी भुवनेश्वर मौसम केंद्र के तटीय बुलेटिन में भी इसके रात तक गहरे अवदाब में बदलने का पूर्वानुमान दिया गया। हालांकि रात तक वास्तव में किस श्रेणी में पहुंचा, इसकी पुष्टि के लिए अधिक हालिया केंद्रीय स्थिति बुलेटिन आवश्यक है। 

यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि समुद्र से भूमि पर पहुंचने के बाद चक्रवात को गर्म समुद्री पानी से लगातार मिलने वाली ऊर्जा कम होने लगती है। इससे उसकी हवाओं की ताकत घटती है। लेकिन भारी बारिश का खतरा कई बार बना रहता है। चक्रवात के साथ आए व्यापक बादल समूह और नमी देश के आंतरिक हिस्सों में आगे बढ़ सकते हैं। इसलिए अर्नब के कमजोर होने के बावजूद आंध्र प्रदेश और आसपास के राज्यों में भारी वर्षा का संकट बना हुआ है।

काकीनाडा और कोनासीमा में सबसे अधिक नुकसान, सैकड़ों पेड़ उखड़े

आंध्र प्रदेश के काकीनाडा, कोनासीमा तथा आसपास के तटीय क्षेत्रों में अर्नब का प्रभाव विशेष रूप से गंभीर रहा। टाइम्स ऑफ इंडिया की 28 अक्टूबर दोपहर की रिपोर्ट के अनुसार तेज हवाओं और मूसलाधार वर्षा के कारण सैकड़ों पेड़ तथा बिजली के खंभे गिर गए। कई क्षेत्रों में बिजली और संचार सेवाएं बाधित हो गईं। सड़कों पर गिरे पेड़ों और मलबे के कारण यातायात रुक गया। प्रशासन ने प्रमुख सड़कों को खोलने के लिए तत्काल सफाई अभियान शुरू कराया। प्रभावित क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति बहाल करने के प्रयास भी किए गए। हालांकि रात तक कितने क्षेत्रों में बिजली लौट आई है, इसका समेकित पुष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। 

समाचार रिपोर्टों के अनुसार कई तटीय इलाकों में भारी बारिश के कारण सड़कें पानी में डूब गईं। खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा। स्थानीय स्तर पर मकानों और घरेलू सामान को क्षति पहुंचने की सूचनाएं मिली हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कुछ हिस्सों में लगभग 30 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज होने का उल्लेख है। कुछ स्थानों पर 20 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा हुई। इतनी अधिक बारिश कम समय में होने पर नालों और जलनिकासी व्यवस्था की क्षमता कम पड़ सकती है। इससे समुद्र से कुछ दूरी पर बसे इलाकों में भी बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। 

आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 1.80 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

अर्नब के पहुंचने से पहले ही आंध्र प्रदेश और ओडिशा में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया गया था। रॉयटर्स की बुधवार की रिपोर्ट के अनुसार दोनों राज्यों में मिलाकर एक लाख 80 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। आंध्र प्रदेश में हजारों परिवारों को चक्रवात राहत शिविरों में आश्रय दिया गया है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट में बताया गया कि आंध्र प्रदेश में 89 हजार से अधिक लोगों को निकाला गया था। राज्य के 20 जिलों में दो हजार से अधिक आश्रय स्थलों की व्यवस्था की गई थी। करीब 30 हजार मछली पकड़ने वाली नावें सुरक्षित की गईं और लगभग 1,100 चिकित्सा दल तैनात किए गए। 

तूफ़ान की वजह से रेल और विमान सेवाओं पर भी असर पड़ा। कम से कम 64 रेलगाड़ियां रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है। विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा और अन्य हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित हुईं। कई स्थानों पर विद्यालय बंद किए गए। सड़कों से गिरे पेड़ हटाने और बिजली की आपूर्ति बहाल करने के लिए राहत दलों को लगाया गया है। प्रशासन के सामने इस समय बड़ी चुनौती उन ग्रामीण और तटीय बस्तियों तक पहुंचने की है जहां भारी बारिश और जलभराव के कारण सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ है। 

शाम ढाई बजे अर्नब कहां था, अगले 48 घंटे में किस दिशा में बढ़ेगा?

मौसम विभाग के बुधवार दोपहर ढाई बजे के आकलन के अनुसार अर्नब का केंद्र आंध्र प्रदेश के नरसापुर से लगभग 40 किलोमीटर उत्तर-उत्तरपूर्व, यानम से 40 किलोमीटर पश्चिम-उत्तरपश्चिम और काकीनाडा से करीब 50 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिणपश्चिम में स्थित था। उस समय यह गंभीर चक्रवाती तूफ़ान की श्रेणी में था और पिछले छह घंटों में लगभग सात किलोमीटर प्रति घंटे की धीमी रफ्तार से उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में आगे बढ़ा था। मौसम विभाग ने अनुमान जताया कि बुधवार शाम तक यह सामान्य चक्रवाती तूफ़ान और रात तक गहरे अवदाब में बदल सकता है। शाम 7:21 बजे प्रकाशित टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर में भी इसी पूर्वानुमान की पुष्टि की गई है। 

यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि चक्रवात की आगे बढ़ने की गति कम होने से कुछ क्षेत्रों में बारिश अधिक समय तक जारी रह सकती है। हालांकि किसी एक स्थान पर कितनी बारिश होगी, यह चक्रवात की दिशा, उसकी नमी और स्थानीय मौसमी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। भूमि पर पहुंचने के बाद अर्नब की हवाओं की ताकत कम होना राहत की बात है, लेकिन उससे जुड़ी वर्षा प्रणाली अभी मध्य और पूर्वी भारत के लिए गंभीर मौसम चुनौती बनी हुई है।

ओडिशा में भारी बारिश, मलकानगिरि की ओर बढ़ने की आशंका

आंध्र प्रदेश के बाद ओडिशा में भी अर्नब से जुड़ी भारी वर्षा का प्रभाव दिखाई दिया। ओडिशा के विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल ने बुधवार दोपहर बताया कि चक्रवाती प्रणाली शाम या रात तक राज्य के मलकानगिरि जिले की ओर बढ़ सकती है। उन्होंने प्रारंभिक रिपोर्टों के आधार पर राज्य में उस समय तक कोई अत्यंत गंभीर प्रभाव सामने नहीं आने की बात कही थी। हालांकि दक्षिणी ओडिशा में भारी बारिश की चेतावनी बनी रही। बुधवार शाम 6:08 बजे जारी भुवनेश्वर मौसम केंद्र के तटीय बुलेटिन में दक्षिणी ओडिशा के कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है। समुद्र की स्थिति भी खराब बनी हुई थी और राज्य के बंदरगाहों पर स्थानीय चेतावनी संकेत संख्या तीन जारी रखने को कहा गया था। 

उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के लिए 29 अक्टूबर महत्वपूर्ण

अर्नब के कमजोर पड़ने के बावजूद गुरुवार, 29 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और ओडिशा के लिए मौसम विभाग ने भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। बुधवार शाम साढ़े सात बजे प्रकाशित इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 और 30 अक्टूबर को व्यापक वर्षा की संभावना है। बिहार और झारखंड के कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में भी भारी वर्षा की आशंका है। पहले जारी पूर्वानुमानों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई गई थी। ऐसे में राज्य के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जिलों में सावधानी आवश्यक है। 

उत्तर प्रदेश में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में होने वाली इस बारिश का कृषि पर भी असर पड़ सकता है। धान की कटाई तथा खेतों में रखी फसलों के भीगने का जोखिम है। पूर्वांचल के निचले शहरी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। लेकिन अभी यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश में आंध्र प्रदेश जैसी 150 किलोमीटर प्रति घंटे की चक्रवाती हवाओं का अनुमान नहीं है। राज्य के लिए मुख्य खतरा भारी वर्षा, गरज-चमक और स्थानीय तेज हवाओं का है।

दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में ओलावृष्टि का अलर्ट, पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय

बुधवार शाम के मौसम पूर्वानुमान में एक नया और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में गुरुवार को कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि होने की संभावना जताई गई है। इन क्षेत्रों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आंधी चलने की चेतावनी भी दी गई है। पूर्वी राजस्थान के कुछ इलाकों में भी ओलावृष्टि संभव है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास एक पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी वायुमंडलीय प्रणाली सक्रिय है, जो उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित कर रही है। इसलिए दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में संभावित बारिश और ओलावृष्टि के लिए केवल अर्नब को जिम्मेदार मानना उचित नहीं होगा। इस क्षेत्र के मौसम में पश्चिमी विक्षोभ की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। 

अर्नब का सबसे कठिन दौर गुजर गया, लेकिन नुकसान का वास्तविक आकलन बाकी

अर्नब के बारे में बुधवार रात तक सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उसका समुद्र तट से टकराना समाप्त हो चुका है। सुबह आठ बजे तक उसका केंद्रीय हिस्सा पूरी तरह भूमि पर पहुंच गया था। तट से टकराने के बाद उसकी ताकत घटने लगी। फिर भी आंध्र प्रदेश में भारी बारिश, बिजली आपूर्ति बाधित होने, पेड़ गिरने तथा सड़कों और फसलों को नुकसान पहुंचने की सूचनाएं हैं। जनहानि के संबंध में अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है और अंतिम सरकारी आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। बड़ी संख्या में लोगों को पहले से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने के कारण संभावित जनहानि को सीमित रखने में सहायता मिली है।

अब प्रशासन के सामने राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की सुरक्षित घर वापसी, बिजली और पेयजल आपूर्ति की बहाली, सड़कों की मरम्मत, खेतों में हुए नुकसान के सर्वेक्षण तथा प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता पहुंचाने की चुनौती है। दूसरी तरफ मौसम विभाग का ध्यान उस वर्षा प्रणाली पर बना हुआ है जो अर्नब के कमजोर पड़ने के बाद भी देश के अनेक राज्यों में सक्रिय रह सकती है। अगले दो दिनों में यह स्पष्ट होगा कि तूफ़ान के अवशेष कितनी दूर तक पहुंचते हैं और किन क्षेत्रों में सबसे अधिक वर्षा होती है।

28 अक्टूबर 2026, रात लगभग 9:30 बजे तक का निष्कर्ष: अर्नब का लैंडफॉल पूरा हो गया है। 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक हवा के झोंकों की आधिकारिक पुष्टि है। चक्रवात धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। आंध्र प्रदेश में नुकसान हुआ है और तीन मौतों की मीडिया रिपोर्टें हैं, लेकिन अंतिम आधिकारिक मृतक संख्या अभी पुष्ट नहीं है। ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए अगला प्रमुख खतरा भारी वर्षा है। उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में पश्चिमी विक्षोभ से जुड़े मौसम परिवर्तन पर भी नजर रखनी होगी।

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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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