Cyclone Arnab Update: चक्रवात अर्नब का कहर, आंध्र प्रदेश में भयानक बारिश, 50 से ज्यादा ट्रेनें रद्द

Cyclone Arnab Live Update: चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में तेज हवाओं और भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित किया। जानें लैंडफॉल, समुद्री उछाल, राहत अभियान और यूपी समेत कई राज्यों में बारिश का अलर्ट।

Yogesh Mishra
Published on: 28 Oct 2026 9:18 AM IST
Cyclone Arnab Live Update Today Weather
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Cyclone Arnab Update: बंगाल की खाड़ी से उठे अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफ़ान 'अर्नब' ने बुधवार तड़के आंध्र प्रदेश के समुद्री तट पर दस्तक देने के साथ ही जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। मंगलवार देर रात से ही तटीय जिलों में तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश का सिलसिला शुरू हो गया था। बुधवार रात लगभग 1:20 बजे तूफ़ान के समुद्र तट को पार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, चक्रवात आंध्र प्रदेश के बापटला और विशाखापत्तनम के बीच यानम के दक्षिणी हिस्से के आसपास समुद्री तट से टकराया। इस दौरान लगातार चलने वाली हवाओं की गति 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने और तेज झोंकों की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक होने का अनुमान था। कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए और बिजली की आपूर्ति बाधित हुई। तटीय क्षेत्रों में बाढ़ और समुद्री पानी के प्रवेश का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, बुधवार तड़के तक जानमाल के नुकसान की प्रारंभिक सूचनाओं में किसी मृत्यु की पुष्टि नहीं हुई थी। हालांकि वास्तविक नुकसान का पूरा आकलन तूफ़ान के गुजरने और प्रभावित इलाकों तक राहत दलों के पहुंचने के बाद ही संभव होगा। 

मौसम विभाग के मुताबिक अर्नब अपेक्षा से अधिक तेजी से भारतीय तट की ओर बढ़ा। पहले इसके बुधवार पूर्वाह्न तक समुद्र तट से टकराने की संभावना जताई गई थी, लेकिन मंगलवार शाम तक इसकी आगे बढ़ने की गति बढ़ने के कारण लैंडफॉल का समय बदलकर बुधवार तड़के दो से चार बजे के बीच कर दिया गया। मंगलवार रात साढ़े आठ बजे तूफ़ान का केंद्र काकीनाडा से लगभग 70 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पूर्व तथा मछलीपट्टनम से करीब 130 किलोमीटर पूर्व-उत्तर पूर्व में था। रात साढ़े ग्यारह बजे यह नरसापुर से लगभग 50 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण पूर्व और काकीनाडा से लगभग 70 किलोमीटर दक्षिण में पहुंच गया। इसके बाद तूफ़ान के बाहरी बादल और तेज हवाओं वाला हिस्सा भूमि में प्रवेश करने लगा। बुधवार तड़के मौसम विभाग ने पुष्टि की कि लैंडफॉल की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, तूफ़ान का सबसे शक्तिशाली हिस्सा भूमि में प्रवेश करने के दौरान कई घंटों तक तेज हवाएं चलने की आशंका थी। 

बुधवार सुबह 4:36 बजे समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि तूफ़ान के समुद्र तट को पार करने की प्रक्रिया जारी थी और उसका केंद्र तटरेखा के बहुत करीब बना हुआ था। मौसम विभाग ने इसके उत्तरी हिस्से के और भीतर तक प्रवेश करने की पुष्टि की थी। सुबह 5:06 बजे प्रकाशित इंडिया टुडे की रिपोर्ट में भी लैंडफॉल प्रक्रिया जारी रहने और कुछ स्थानों पर बाढ़ में फंसे लोगों को बचाए जाने की जानकारी दी गई। उपलब्ध रिपोर्टों में इस समय तक तूफ़ान के केंद्र के पूरी तरह भूमि पर पहुंच जाने की अंतिम आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट नहीं थी। इसलिए बुधवार सुबह की स्थिति यह है कि अर्नब का तटीय प्रवेश शुरू हो चुका है और उसके सबसे गंभीर प्रभाव सामने आने लगे हैं। 

समुद्र का पानी बस्तियों में घुसने का खतरा, गोदावरी के मुहाने पर स्थिति ज्यादा गंभीर

अर्नब की तेज हवाओं के अतिरिक्त समुद्र में उठने वाला तूफ़ानी उछाल तटीय आबादी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि आंध्र प्रदेश के निचले तटीय क्षेत्रों में सामान्य खगोलीय ज्वार के स्तर से लगभग डेढ़ से ढाई मीटर तक अतिरिक्त समुद्री पानी ऊपर उठ सकता है। काकीनाडा और यानम के आसपास विशेष खतरे की आशंका जताई गई है। मंगलवार रात जारी मौसम संबंधी चेतावनी में गोदावरी नदी के मुहाने के आसपास दो से साढ़े तीन मीटर तक अतिरिक्त समुद्री उछाल की संभावना का भी उल्लेख किया गया था। यह क्षेत्र इसलिए संवेदनशील है क्योंकि समुद्र और नदी के मिलने वाले स्थानों पर पानी का दबाव बढ़ने से तटीय बस्तियों में जलभराव गंभीर रूप ले सकता है। समुद्री पानी का नदियों के मुहानों से भीतर प्रवेश करना मकानों, खेतों, सड़कों और पेयजल स्रोतों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। 

तूफ़ान के प्रभाव से समुद्र में उठने वाली लहरों और सामान्य ज्वार से ऊपर बढ़ने वाले जलस्तर में अंतर समझना जरूरी है। मौसम विभाग ने जिस ढाई मीटर तक अतिरिक्त उछाल का अनुमान दिया है, वह समुद्र के सामान्य ज्वार स्तर के ऊपर बढ़ने वाला पानी है। वास्तविक लहरें इससे अधिक ऊंची हो सकती हैं। विशेष रूप से कच्चे मकानों, मछुआरों की बस्तियों तथा निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए यह स्थिति खतरनाक है। प्रशासन ने मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की चेतावनी दी है। तट के आसपास मौजूद हजारों नावों को सुरक्षित स्थानों पर खड़ा कराया गया है।

चार लोगों को बाढ़ से बचाया गया, कई इलाकों में बिजली गुल

बुधवार सुबह तक सामने आई खबरों के अनुसार आंध्र प्रदेश के कई तटीय क्षेत्रों में तेज हवाओं से पेड़ उखड़ने और बिजली की आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं हुई हैं। रॉयटर्स ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय के हवाले से बताया कि प्रभावित इलाकों में पेड़ गिरने और बिजली गुल होने की सूचनाएं आई हैं। हालांकि उस प्रारंभिक रिपोर्ट तक किसी व्यक्ति के मारे जाने की पुष्टि नहीं हुई थी। इंडिया टुडे ने बुधवार सुबह प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में पुलिस द्वारा बाढ़ के पानी में फंसे चार लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी दी है। तटीय सड़कों पर जलभराव और तेज हवाओं के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन की प्राथमिकता अभी लोगों की जान बचाने, बिजली और संचार व्यवस्था को सुरक्षित रखने तथा राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। 

तूफ़ान के सबसे गंभीर प्रभाव का पूरा विवरण अभी सामने आना बाकी है। इसका एक कारण यह है कि लैंडफॉल के दौरान कई स्थानों पर प्रशासनिक और राहत दलों की आवाजाही भी सीमित हो जाती है। तेज हवाओं के बीच बिजली के खंभों और पेड़ों के गिरने का खतरा बना रहता है। ऐसे समय नुकसान की प्रारंभिक सूचनाएं अलग-अलग स्थानों से मिलती हैं, लेकिन वास्तविक आंकड़े रास्ते खुलने और सर्वेक्षण शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होते हैं। इसलिए फिलहाल मकानों, फसलों, सड़कों और अन्य संपत्तियों को हुए कुल नुकसान का कोई निश्चित आंकड़ा देना जल्दबाजी होगी।

89 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया, दो हजार से अधिक राहत शिविर तैयार

आंध्र प्रदेश सरकार ने चक्रवात के खतरे को देखते हुए व्यापक स्तर पर बचाव अभियान चलाया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (एपी) की 28 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में कम से कम 89 हजार लोगों को निचले और बाढ़ संभावित इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। लगभग दो हजार से अधिक राहत शिविरों की व्यवस्था की गई है। ये शिविर राज्य के 20 जिलों में तैयार किए गए हैं। प्रशासन ने 30 हजार से अधिक मछली पकड़ने वाली नावों को सुरक्षित कराया है और लगभग 1,100 चिकित्सा दल तैनात किए हैं। तूफ़ान के संभावित रास्ते में एक करोड़ 20 लाख से अधिक लोगों की आबादी होने का अनुमान है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं कि इतनी बड़ी आबादी सीधे तूफ़ान के सबसे विनाशकारी हिस्से की चपेट में आई है। यह संख्या उन क्षेत्रों की आबादी को दर्शाती है जो तूफ़ान और उसके प्रभाव से जुड़े जोखिम के दायरे में आते हैं। 

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि लोगों की जान बचाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। विशेष रूप से समुद्र के नजदीक बसे गांवों, निचली बस्तियों तथा कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की अलग व्यवस्था की गई है। मंगलवार रात तक 2,360 गर्भवती महिलाओं को चिकित्सा सुविधाओं वाले सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। 

50 से अधिक ट्रेनें और दर्जनों उड़ानें रद्द, विशाखापत्तनम तथा विजयवाड़ा में हवाई सेवाएं प्रभावित

अर्नब का प्रभाव रेल और हवाई यातायात पर भी पड़ा है। पीटीआई के अनुसार आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तूफ़ान की आशंका को देखते हुए कम से कम 50 रेलगाड़ियां रद्द की गईं। मंगलवार को विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा हवाई अड्डों से संचालित होने वाली कम से कम 21 उड़ानें रद्द की गईं। बुधवार के लिए भी विजयवाड़ा हवाई अड्डे की 15 उड़ानों को रद्द करने की घोषणा की गई थी। इससे चेन्नई, बेंगलुरु और अन्य शहरों से संपर्क करने वाली कुछ हवाई सेवाएं प्रभावित हुई हैं। एयर इंडिया ने भी यात्रियों को अपनी उड़ानों की स्थिति की जानकारी लेकर ही हवाई अड्डों के लिए निकलने की सलाह दी है। रेलवे और विमानन सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों का उद्देश्य तूफ़ान के सबसे गंभीर दौर में यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। 

ओडिशा में आठ जिलों के स्कूल बंद, हजारों लोगों को निकालने की तैयारी

चक्रवाती तूफ़ान के कारण ओडिशा में भी प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार, 28 अक्टूबर को राज्य के आठ जिलों में स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया है। पुरी, गजपति, गंजाम, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरि जैसे जिलों में मौसम विभाग ने भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। कुछ जिलों में 12 से 20 सेंटीमीटर तक वर्षा की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। अन्य क्षेत्रों में भी भारी वर्षा का खतरा है। राज्य सरकार ने लगभग 48 हजार लोगों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की है। इनमें गजपति और नबरंगपुर जिलों के लगभग 11-11 हजार लोग भी शामिल हैं। ओडिशा में 135 स्थायी और लगभग 1,600 अस्थायी चक्रवात आश्रय स्थलों की व्यवस्था की गई है। बचाव और राहत कार्यों के लिए 294 दल तैनात किए गए हैं। 

ओडिशा के सामने मुख्य चुनौती तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा की है। दक्षिणी जिलों में पहाड़ी और नदी घाटी वाले इलाकों में अचानक जलभराव की आशंका बनी हुई है। राज्य के तटीय क्षेत्रों के अतिरिक्त आंतरिक जिलों में भी मौसम खराब रहने का अनुमान है। प्रशासन की ओर से लोगों को अनावश्यक यात्रा नहीं करने और बाढ़ संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। राज्य सरकार ने जनहानि रोकने के उद्देश्य से बचाव व्यवस्था को प्राथमिकता दी है।

छत्तीसगढ़, तेलंगाना और विदर्भ में भी भारी बारिश, तूफ़ान की नमी भीतर तक पहुंचेगी

अर्नब के समुद्र तट को पार करने के बाद भी इसका खतरा समाप्त नहीं होगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 28 और 29 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। 28 अक्टूबर को तेलंगाना और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। निजी मौसम पूर्वानुमान संस्था स्काईमेट के आकलन के अनुसार दक्षिणी छत्तीसगढ़ में 28 अक्टूबर को वर्षा का असर अधिक रह सकता है और 29 अक्टूबर को भारी बारिश का क्षेत्र उत्तरी छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ सकता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में भी इसके प्रभाव से बारिश होने का अनुमान है। 

विदर्भ के गढ़चिरौली, चंद्रपुर, गोंदिया, भंडारा और आसपास के जिलों में तेज वर्षा की चेतावनी दी गई है। कुछ क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवा चलने का अनुमान है। इस क्षेत्र में चक्रवात का प्रमुख खतरा तेज समुद्री तूफ़ानी हवाओं की तुलना में भारी वर्षा और उससे होने वाला जलभराव है। लगातार बारिश से खेतों में तैयार फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। नदी और नालों के जलस्तर में भी वृद्धि हो सकती है। हालांकि संभावित नुकसान की वास्तविक स्थिति स्थानीय वर्षा के आंकड़े सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। 

उत्तर प्रदेश में 29 अक्टूबर को अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी, सात जिलों में पहले से येलो अलर्ट

अर्नब का असर उत्तर प्रदेश तक पहुंचने की संभावना ने मौसम विभाग की चिंता बढ़ाई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा और 30 अक्टूबर को भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने 28 अक्टूबर के लिए सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, गाजीपुर और बलिया में तेज हवा तथा बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया था। इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। 29 अक्टूबर को कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं के लिए ऑरेंज अलर्ट की सूचना भी दी गई है। 

उत्तर प्रदेश के लिए यह मौसम परिवर्तन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में धान की कटाई और कृषि गतिविधियां चल रही होती हैं। यदि भारी वर्षा होती है, तो कट चुकी फसल के भीगने, खेतों में पानी भरने और कटाई में देरी होने का खतरा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ शहरी इलाकों में जलनिकासी की व्यवस्था पर भी दबाव पड़ सकता है। हालांकि अर्नब के कारण आंध्र प्रदेश जैसी 125 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की विनाशकारी चक्रवाती हवाएं उत्तर प्रदेश में चलने का पूर्वानुमान नहीं है। यहां मुख्य खतरा तेज बारिश और गरज-चमक से जुड़े स्थानीय मौसम का है।

बिहार और झारखंड में 29-30 अक्टूबर को बिगड़ सकता है मौसम

झारखंड में 29 अक्टूबर और बिहार में 29 तथा 30 अक्टूबर को भारी से बहुत भारी वर्षा का अनुमान है। समुद्र से भूमि पर आने के बाद चक्रवाती तूफ़ान की शक्ति सामान्यतः कम होने लगती है, लेकिन उसका कम दबाव वाला क्षेत्र कई दिनों तक आगे बढ़ सकता है। यह प्रणाली अपने साथ बड़ी मात्रा में नमी लेकर चलती है। इसी वजह से समुद्र तट से काफी दूर स्थित राज्यों में भी तेज वर्षा हो सकती है। बिहार और झारखंड में अर्नब के अवशेषों से जुड़ी वर्षा का वास्तविक विस्तार इस बात पर निर्भर करेगा कि भूमि पर पहुंचने के बाद निम्न दबाव की प्रणाली किस दिशा में बढ़ती है और अन्य मौसमी प्रणालियों से उसका किस तरह संपर्क होता है। 

अर्नब की रफ्तार कब घटेगी, अगले चौबीस घंटे बेहद महत्वपूर्ण

मौसम विभाग के मंगलवार रात के पूर्वानुमान के अनुसार समुद्र तट को पार करने के बाद अर्नब के उत्तर-पश्चिम और फिर उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा में बढ़ने की संभावना है। भूमि पर आगे बढ़ने के साथ इसकी ऊर्जा में कमी आने का अनुमान है। पूर्वानुमान में बुधवार पूर्वाह्न तक इसके कमजोर होकर सामान्य चक्रवाती तूफ़ान और बुधवार शाम तक गहरे अवदाब में बदलने की संभावना जताई गई थी। हालांकि इस पूर्वानुमान के आधार पर बुधवार सुबह ही तूफ़ान के कमजोर हो जाने का दावा नहीं किया जा सकता। इसके लिए अगले आधिकारिक मौसम बुलेटिन से पुष्टि आवश्यक होगी। 

अर्नब की ताकत कम होने का अर्थ यह भी नहीं होगा कि खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया है। किसी शक्तिशाली चक्रवात के गुजर जाने के बाद भी तटीय क्षेत्रों में जलभराव, समुद्री पानी के प्रवेश, बिजली व्यवस्था को हुए नुकसान तथा कमजोर ढांचों के गिरने जैसी समस्याएं बनी रह सकती हैं। दूसरी ओर कमजोर पड़ता चक्रवात अपनी नमी के कारण देश के अंदरूनी क्षेत्रों में कई दिनों तक भारी वर्षा करा सकता है। इसलिए अगले 24 से 48 घंटे केवल आंध्र प्रदेश के लिए नहीं, बल्कि ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

नेपाल तक पहुंच सकता है असर, हिमालयी इलाकों में बारिश और बर्फबारी की चेतावनी

अर्नब के व्यापक मौसमी प्रभाव को देखते हुए नेपाल में भी सतर्कता बरती जा रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की 27 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल ने अधिक ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में जाने वाले पर्यटकों को सावधान रहने की सलाह दी है। आशंका है कि चक्रवात से जुड़ी नमी और दूसरी मौसमी परिस्थितियों के कारण गुरुवार रात से शनिवार तक हिमालयी इलाकों में भारी वर्षा, बर्फबारी और हिमस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि चक्रवात के अवशेष और हिमालय की स्थानीय वायुमंडलीय परिस्थितियों के बीच संपर्क के परिणामों का सटीक आकलन बाद के मौसम पूर्वानुमानों से ही संभव होगा। 

लैंडफॉल शुरू होने के बाद भी क्यों बना रहता है कई घंटों तक खतरा?

चक्रवाती तूफ़ान के संदर्भ में 'लैंडफॉल' की प्रक्रिया को समझना जरूरी है। कई बार यह समझ लिया जाता है कि तूफ़ान समुद्र तट से टकराते ही समाप्त हो जाता है। वास्तविकता इसके विपरीत है। चक्रवात का बाहरी हिस्सा, उसके केंद्र के तट तक पहुंचने से काफी पहले ही भूमि को प्रभावित करना शुरू कर देता है। इसके बाद सबसे तेज हवाओं वाले केंद्रीय हिस्से के तट पार करने की प्रक्रिया कई घंटों तक चल सकती है। इसी दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों, कच्चे मकानों और अन्य कमजोर ढांचों को अधिक नुकसान होने का खतरा रहता है।

किसी चक्रवात के केंद्र में अपेक्षाकृत शांत क्षेत्र भी हो सकता है। इसे चक्रवात की 'आंख' कहा जाता है। इसके आसपास अत्यंत तेज हवाओं की दीवार होती है। यदि तूफ़ान की आंख किसी क्षेत्र के ऊपर से गुजरती है, तो कुछ समय के लिए हवा की गति कम हो सकती है। लेकिन उसके बाद केंद्र के दूसरे हिस्से के गुजरने पर फिर तेज हवाएं चल सकती हैं। इसलिए मौसम कुछ समय शांत हो जाने पर भी तूफ़ान समाप्त मानकर बाहर निकलना खतरनाक हो सकता है।

अर्नब के मामले में भी बुधवार तड़के सबसे बड़ी चुनौती इसी प्रक्रिया को लेकर सामने आई। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया था कि इसके केंद्र के भूमि में प्रवेश करने के दौरान कई घंटों तक अत्यंत तेज हवाएं बनी रह सकती हैं। जब तक इसकी केंद्रीय संरचना आगे नहीं बढ़ जाती और स्थानीय प्रशासन सुरक्षित होने की घोषणा नहीं करता, तब तक प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को घरों या सुरक्षित आश्रय स्थलों में रहना चाहिए।

बचाव की व्यापक तैयारियों से जनहानि सीमित रखने की उम्मीद

भारत में चक्रवातों से निपटने की तैयारी पिछले कुछ दशकों में काफी बदली है। 1999 में ओडिशा के सुपर साइक्लोन में लगभग दस हजार लोगों की जान गई थी। उस आपदा ने तटीय सुरक्षा, समय पर चेतावनी और बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित निकालने की आवश्यकता को रेखांकित किया। बाद के वर्षों में चक्रवात चेतावनी व्यवस्था, उपग्रह निगरानी, मौसम पूर्वानुमान और राहत शिविरों की व्यवस्था में सुधार हुआ है। आज मौसम विभाग संभावित लैंडफॉल के स्थान और समय के बारे में कई दिन पहले चेतावनी जारी कर सकता है, हालांकि अंतिम समय तक अनुमान में बदलाव की संभावना बनी रहती है।

अर्नब के मामले में भी हजारों लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाना महत्वपूर्ण है। 30 हजार से अधिक नावों की सुरक्षा, लगभग 1,100 चिकित्सा दलों की तैनाती, हजारों राहत केंद्रों की व्यवस्था और संभावित खतरे वाले इलाकों में चेतावनी जारी करना इस तैयारी का हिस्सा है। इन उपायों से जनहानि कम करने में सहायता मिल सकती है। लेकिन बचाव अभियान की वास्तविक सफलता का आकलन तूफ़ान का असर समाप्त होने और प्रभावित इलाकों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही किया जा सकेगा।

बुधवार सुबह तक अर्नब के कारण आंध्र प्रदेश में तेज हवाएं, भारी बारिश, पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की पुष्टि हो चुकी है। चार लोगों को बाढ़ के पानी से बचाए जाने की खबर भी सामने आई है। अभी किसी बड़ी जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि आने वाले घंटों में समुद्री उछाल से कितना क्षेत्र प्रभावित होता है, चक्रवात कितनी तेजी से कमजोर पड़ता है और आंध्र प्रदेश से आगे बढ़ने वाली वर्षा प्रणाली देश के अंदरूनी राज्यों में कितना पानी बरसाती है।

Yogesh Mishra
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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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