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Datia By Election: CM मोहन यादव के लिए क्यों बन गई प्रतिष्ठा की लड़ाई? BJP के सामने 3 बड़ी चुनौतियां
Datia By Election: दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 भाजपा और मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव बन गया है। जानिए BJP के सामने कौन-सी तीन सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौतियां हैं।
Datia By Election 2026: मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा सीट पर हो रहा उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद चुनाव प्रचार की कमान संभाल रहे हैं। ऐसे में इस सीट का परिणाम उनकी राजनीतिक पकड़, संगठन पर नियंत्रण और सरकार के प्रदर्शन की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
गुटबाजी सबसे बड़ी चुनौती
दतिया सीट पर भाजपा ने पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर संगठन से जुड़े आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। टिकट बदलने के फैसले के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी और असंतोष खुलकर सामने आया।
हालांकि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद पहल करते हुए नरोत्तम मिश्रा समेत नाराज नेताओं को मनाया और नामांकन के दौरान सभी नेताओं को एक मंच पर लाकर एकजुटता का संदेश दिया। अब चुनाव परिणाम यह भी बताएगा कि मुख्यमंत्री संगठन के भीतर असंतोष को कितनी मजबूती से संभाल पाए।
मोहन सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर लगेगी या नहीं?
2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती ने भाजपा के नरोत्तम मिश्रा को हराया था। बाद में बैंक एफडी धोखाधड़ी मामले में सजा मिलने के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई, जिसके चलते उपचुनाव कराया जा रहा है।
अब यह चुनाव मोहन सरकार के करीब तीन वर्षों के कामकाज का भी मूल्यांकन माना जा रहा है। भाजपा की कोशिश कांग्रेस के कब्जे वाली सीट वापस जीतने की है, जबकि कांग्रेस इसे अपने गढ़ के रूप में बचाए रखना चाहती है।
जीत का सिलसिला कायम रखने की चुनौती
मुख्यमंत्री बनने के बाद ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में यह मोहन यादव की पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा मानी जा रही है। भाजपा के लिए यह संदेश देने का अवसर भी है कि पार्टी केवल मालवा ही नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में मजबूत स्थिति में है।
मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की सभी 29 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा को सफलता मिली। अब दतिया उपचुनाव में जीत दर्ज कर मुख्यमंत्री अपने विजय अभियान को आगे बढ़ाना चाहेंगे।
BJP के लिए क्यों अहम है दतिया उपचुनाव?
- मुख्यमंत्री मोहन यादव की नेतृत्व क्षमता की परीक्षा।
- संगठन में गुटबाजी खत्म करने की चुनौती।
- सरकार के विकास कार्यों पर जनता की राय।
- कांग्रेस से सीट वापस हासिल करने की कोशिश।
- ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में भाजपा की राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का अवसर।
दतिया उपचुनाव का परिणाम सिर्फ एक विधायक तय नहीं करेगा, बल्कि यह भी संकेत देगा कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव का राजनीतिक प्रभाव कितना मजबूत है और भाजपा संगठन उनके नेतृत्व में कितनी मजबूती से चुनावी चुनौतियों का सामना कर पा रहा है।


