क्या बेटियों से छुपाया जा रहा है उनका हक? जानिए प्रॉपर्टी का बड़ा कानून

Daughters Property Rights in India: क्या बिना रजिस्टर्ड वसीयत मान्य है? जानें बेटियों को संपत्ति में कितना हक मिलता है और बंटवारे के नियम क्या कहते हैं।

Jyotsana Singh
Published on: 27 April 2026 3:22 PM IST
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Daughters Property Rights in India

Daughters Property Rights in India: परिवार में संपत्ति का बंटवारा अक्सर विवाद की बड़ी वजह बन जाता है। माता-पिता के निधन के बाद जब वसीयत सामने आती है और वह रजिस्टर्ड नहीं होती, तब भाई-बहनों के बीच सबसे ज्यादा सवाल खड़े होते हैं। कई लोगों को लगता है कि बिना रजिस्टर्ड वसीयत का कोई महत्व नहीं होता, जबकि कानून ऐसा नहीं कहता। भारत में कई लोग वसीयत तो बनाते हैं, लेकिन उसका रजिस्ट्रेशन नहीं कराते। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि अनरजिस्टर्ड वसीयत की कानूनी स्थिति क्या है, बेटियों को कितना हक मिलता है और संपत्ति का बंटवारा किस नियम से किया जाता है।

क्या बिना रजिस्टर्ड वसीयत भी मान्य होती है?

भारतीय कानून के अनुसार वसीयत का रजिस्टर्ड होना अनिवार्य नहीं है। यदि किसी व्यक्ति ने अपनी इच्छा से वसीयत तैयार की है, उस पर हस्ताक्षर किए हैं और दो गवाहों ने उसकी पुष्टि की है, तो ऐसी वसीयत कानूनी रूप से मान्य हो सकती है। रजिस्ट्रेशन कराने से दस्तावेज मजबूत जरूर हो जाता है, लेकिन केवल रजिस्टर्ड न होने की वजह से वसीयत अमान्य नहीं मानी जाती। अदालत यह देखती है कि वसीयत सही परिस्थिति में बनाई गई थी या नहीं।

संपत्ति का प्रकार जानना सबसे जरूरी

किसी भी विवाद में सबसे पहले यह समझना जरूरी होता है कि संपत्ति स्व-अर्जित है या पैतृक। यदि पिता ने नौकरी, व्यापार या अपनी कमाई से घर, जमीन या अन्य संपत्ति खरीदी है, तो उसे स्व-अर्जित संपत्ति माना जाएगा। ऐसी संपत्ति पर मालिक को पूरा अधिकार होता है और वह अपनी इच्छा से किसी को भी दे सकता है। वहीं जो संपत्ति पीढ़ियों से चली आ रही हो, उसे पैतृक संपत्ति माना जाता है, जिसमें परिवार के अन्य सदस्यों का भी अधिकार बन सकता है।

बेटियों को भी बेटों के बराबर अधिकार

हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 के बाद बेटियों को बेटों के बराबर कानूनी अधिकार दिए गए हैं। अब शादीशुदा बेटी भी पिता की संपत्ति में उतनी ही हिस्सेदार है जितना बेटा। इसलिए किसी भी बंटवारे में बेटी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालतें भी इस अधिकार को स्पष्ट रूप से मान्यता दे चुकी हैं।

अगर वसीयत मौजूद है तो बंटवारा कैसे होगा?

यदि पिता ने वसीयत छोड़ी है और वह वैध साबित हो जाती है, तो संपत्ति का बंटवारा उसी वसीयत के अनुसार होगा। उदाहरण के तौर पर यदि वसीयत में लिखा गया है कि एक मकान बड़े बेटे को मिलेगा, कुछ जमीन सभी बच्चों में बराबर बांटी जाएगी और बैंक जमा पत्नी को दी जाएगी, तो संपत्ति उसी आधार पर बांटी जाएगी। ऐसे मामलों में वसीयत को प्राथमिकता दी जाती है।

अगर वसीयत में कुछ संपत्तियों का ही जिक्र हो

कई बार लोग वसीयत में केवल मकान या जमीन का जिक्र करते हैं, लेकिन बैंक बैलेंस, एफडी, दुकान, गहने या दूसरी संपत्ति का उल्लेख नहीं करते। ऐसी स्थिति में जिन संपत्तियों का नाम वसीयत में लिखा है, उनका बंटवारा वसीयत के अनुसार होगा। बाकी संपत्तियों का बंटवारा उत्तराधिकार कानून के तहत सभी कानूनी वारिसों में बराबर किया जाएगा।

अगर वसीयत ही न हो तो क्या होगा?

यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु बिना वसीयत के हो जाती है, तो उसकी संपत्ति हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार बांटी जाती है। हिंदू पुरुष की संपत्ति सबसे पहले पत्नी, बेटे, बेटियों और मां जैसे क्लास-1 वारिसों में बांटी जाती है। यदि ये सभी जीवित हैं, तो सभी को बराबर हिस्सा मिलता है। यानी बेटा और बेटी दोनों का अधिकार समान रहेगा।

उदाहरण से समझिए हिस्सा कैसे मिलेगा

मान लीजिए किसी व्यक्ति के निधन के बाद उनकी पत्नी, पांच बेटे, छह बेटियां और मां जीवित हैं। ऐसी स्थिति में कुल 13 कानूनी वारिस होंगे। यदि कोई वैध वसीयत नहीं है, तो पूरी संपत्ति 13 बराबर हिस्सों में बांटी जा सकती है। इससे साफ है कि परिवार बड़ा होने पर हर सदस्य का हिस्सा अलग-अलग निकलता है।

क्या दादी को भी हिस्सा मिलेगा?

यदि मृतक व्यक्ति की मां यानी बच्चों की दादी जीवित हैं, तो उन्हें भी कानूनी वारिस माना जाएगा। ऐसे में संपत्ति के बंटवारे में उन्हें भी बराबर हिस्सा मिलेगा। लेकिन यदि दादी पहले ही दिवंगत हो चुकी हैं, तो उनका हिस्सा लागू नहीं होगा।

अदालत कब अनरजिस्टर्ड वसीयत खारिज कर सकती है?

यदि परिवार का कोई सदस्य वसीयत पर सवाल उठाता है, तो अदालत उसकी जांच कर सकती है। यदि हस्ताक्षर नकली हों, गवाह सही न हों, वसीयत दबाव में लिखवाई गई हो या दस्तावेज संदिग्ध परिस्थिति में तैयार किया गया हो, तो अदालत उसे खारिज भी कर सकती है। इसलिए वसीयत बनाते समय पूरी सावधानी जरूरी होती है।

क्या बेटियां कोर्ट जा सकती हैं?

यदि बेटियों को उनका हिस्सा नहीं दिया जाता या संपत्ति गलत तरीके से बांटी जाती है, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटा सकती हैं। आज कई मामलों में शादीशुदा बेटियां भी अपने अधिकार के लिए कोर्ट जा रही हैं और कानून उन्हें पूरा संरक्षण देता है।

परिवार में विवाद से कैसे बचें?

संपत्ति विवाद से बचने के लिए साफ और मजबूत वसीयत बनवाना सबसे जरूरी है। वसीयत में सभी संपत्तियों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। दो स्वतंत्र गवाह होने चाहिए और यदि संभव हो तो रजिस्ट्रेशन भी कराना चाहिए। समय-समय पर वसीयत अपडेट करना भी समझदारी माना जाता है।

महिलाओं के अधिकार को समझना जरूरी

आज भी कई परिवारों में बेटियों को संपत्ति के अधिकार से दूर रखने की कोशिश की जाती है, लेकिन कानून पूरी तरह स्पष्ट है कि बेटी भी उतनी ही वारिस है जितना बेटा। यह बदलाव महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और समानता के लिए बेहद अहम माना जाता है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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