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Delhi Building Collapse: दिल्ली में 16 साल में कितनी इमारतें बनीं ‘मौत का जाल’? भवन हादसों के आंकड़े
Delhi Building Collapse 2026: दिल्ली में 2010 से 2026 के बीच इमारत, मकान और भवन के हिस्से गिरने की कई भयावह घटनाएं सामने आईं...
Delhi Building Collapse 2026 Latest Update in Hindi
Delhi Building Collapse 2026: दिल्ली के सत्य निकेतन में एक छात्रावास और पीजी (पेइंग गेस्ट) भवन के जमींदोज होने से कई नवयुवकों के सपने असमय खत्म हो गए, उनके परिवार वाले हमेशा के लिए टूट गए। इस हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि दिल्ली में आखिर कितनी इमारतें ऐसी हैं जो कभी भी हादसे में बदल सकती हैं। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि पिछले डेढ़ दशक में ऐसी कितनी घटनाएं हुईं, कितने लोगों की जान गई और हादसे के बाद जिम्मेदार मालिकों, ठेकेदारों और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई। उपलब्ध संसदीय अभिलेख, दिल्ली फायर सर्विस के आंकड़े, पुलिस की कार्रवाई और अलग-अलग वर्षों की घटना रिपोर्टों को जोड़कर देखने पर एक परेशान करने वाली तस्वीर सामने आती है। हालांकि 2010 से सितंबर 2026 तक दिल्ली में कुल कितनी इमारतें या उनके हिस्से गिरे, इसका कोई एकीकृत और वर्षवार सरकारी आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में ‘मकान गिरने’ (House Collapse) की श्रेणी के भीतर पूरी इमारत गिरने के साथ-साथ छत, दीवार, बालकनी या भवन के किसी हिस्से के गिरने की घटनाएं भी शामिल हो सकती हैं।
फिर भी उपलब्ध आंकड़े समस्या के बड़े आकार का अंदाजा देते हैं। दिल्ली फायर सर्विस के अनुसार केवल 2024 में मकान या भवन गिरने से जुड़ी 464 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि 2025 में ऐसी 544 घटनाएं हुईं। यानी सिर्फ इन दो वर्षों में 1,008 घटनाएं दर्ज की गईं। इन दोनों वर्षों में भवन गिरने की घटनाओं में 46 लोगों की मौत हुई। जनवरी से मई 2026 के केवल पांच महीनों में भी ऐसी 76 घटनाओं की सूचना अग्निशमन विभाग को मिल चुकी थी। इसलिए 2010 से 2026 के पूरे दौर में ऐसी घटनाओं की वास्तविक संख्या हजारों में होने की संभावना है, लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर इसका एक प्रमाणित और एकीकृत आंकड़ा देना संभव नहीं है।
2024 के शुरुआती आंकड़े भी इसी गंभीरता की ओर इशारा करते हैं। जनवरी से अगस्त 2024 के बीच ही अग्निशमन विभाग ने 344 मकान या भवन गिरने की घटनाएं दर्ज की थीं। इनमें 22 लोगों की मौत हुई और 172 लोग घायल हुए थे।
अब उन बड़ी और जानलेवा घटनाओं को क्रम से देखते हैं, जिनके बारे में पर्याप्त विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध है।
2010: लालिता पार्क, लक्ष्मी नगर, दिल्ली का सबसे भयावह भवन हादसा
15 नवंबर 2010 को पूर्वी दिल्ली के लालिता पार्क, लक्ष्मी नगर में एक बहुमंजिला भवन भरभराकर गिर गया। बाद में गृह मंत्रालय ने संसद में आधिकारिक रूप से बताया कि इस हादसे में 71 लोगों की मौत हुई और 65 लोग घायल हुए। यह 2010 से 2026 के बीच दिल्ली में सामने आए भवन हादसों में सबसे ज्यादा जान लेने वाली घटनाओं में शामिल है। भवन के मालिक अमृत सिंह, जिन्हें कुछ रिपोर्टों में अमृतपाल सिंह सचदेवा बताया गया, को गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत गैर इरादतन मानव वध का मामला दर्ज किया गया।
कार्रवाई केवल भवन मालिक तक सीमित नहीं रही। नगर निगम के सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता और दो अन्य कर्मचारियों सहित चार निगम कर्मचारियों को निलंबित किया गया। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई। सरकार ने हादसे की जाँच के लिए न्यायमूर्ति लोकेश्वर प्रसाद की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जाँच आयोग बनाया।
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें भवन मालिक के खिलाफ केवल सामान्य लापरवाही का मामला नहीं लगाया गया था। पुलिस ने गैर इरादतन मानव वध (Culpable Homicide Not Amounting to Murder) जैसी गंभीर कानूनी धारा के तहत कार्रवाई की थी।
2011: उत्तम नगर में चार लोगों की मौत
दिसंबर 2011 में उत्तम नगर में निर्माण कार्य के दौरान मकान गिरने से चार लोगों की मौत हुई। पुलिस ने मकान मालिकों में से तरुण चावला और ठेकेदार देवेंद्र कालरा को गैर इरादतन मानव वध के आरोप में गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक निर्माण कार्य हादसे से कुछ ही दिन पहले शुरू हुआ था और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। इस दौर के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि भवन गिरने की समस्या केवल कुछ बड़ी घटनाओं तक सीमित नहीं थी। गृह मंत्रालय की ओर से संसद में रखे राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार 2011 में दिल्ली में ‘भवन गिरने’ (Building Collapse) की श्रेणी में 19 मौतें दर्ज हुईं। 2012 में यह संख्या 22 और 2013 में तीन रही। इसके अलावा अलग ‘मकान गिरने’ (House Collapse) श्रेणी में 2011 में नौ, 2012 में 10 और 2013 में 18 मौतें दर्ज हुईं।
इस तरह केवल 2011 से 2013 के बीच इन दोनों श्रेणियों में कुल 81 मौतें दर्ज हुईं। इसका मतलब यह है कि सरकारी आंकड़ों में केवल चर्चित बड़ी दुर्घटनाएं ही नहीं, बल्कि कई छोटी घटनाएं भी शामिल थीं। एक अन्य संसदीय जवाब के मुताबिक भवन गिरने से जुड़े मामलों में दिल्ली पुलिस ने 2010 में दो, 2011 में 12, 2012 में 16 और 15 अप्रैल 2013 तक दो लोगों को गिरफ्तार किया था। इससे भी पता चलता है कि समस्या किसी एक-दो बड़ी दुर्घटनाओं तक सीमित नहीं थी।
2014: इंद्रलोक के तुलसी नगर में 10 मौतें
28 जून 2014 को उत्तरी दिल्ली के तुलसी नगर, इंद्रलोक में करीब 50 वर्ष पुरानी चार मंजिला इमारत गिर गई। हादसे में 10 लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच बच्चे और तीन महिलाएं शामिल थीं। पुलिस की शुरुआती जाँच में सामने आया कि बगल के भूखंड में चल रही खुदाई से पुराने भवन की नींव प्रभावित हुई थी। इस मामले में पुलिस ने बगल के भूखंड के मालिक और निर्माणकर्ता को गिरफ्तार किया। आरोप था कि अवैध खुदाई के कारण भवन की नींव कमजोर हुई और दुर्घटना की स्थिति बनी। हादसे के बाद उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने पुराने और जर्जर भवनों की पहचान के लिए व्यापक सर्वेक्षण के निर्देश दिए। यह मामला इसलिए अलग था क्योंकि जाँच का केंद्र दुर्घटनाग्रस्त इमारत के मालिक के बजाय पड़ोस में चल रहे निर्माण कार्य का मालिक और निर्माणकर्ता बने।
2015: विष्णु गार्डन और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी
जुलाई 2015 में पश्चिमी दिल्ली के विष्णु गार्डन में एक बहुमंजिला इमारत पड़ोसी भवन पर गिर गई। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या पांच बताई गई, जबकि बाद की कुछ रिपोर्टों में यह संख्या छह बताई गई। दिल्ली सरकार ने मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए और दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने तीन अभियंताओं को निलंबित किया। पुलिस ने निर्माणकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
दिसंबर 2015 में न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में निर्माणाधीन भवन के तहखाने का हिस्सा गिर गया। इसमें एक मजदूर की मौत हुई और पांच लोग घायल हुए। इस घटना में निर्माण स्थल की सुरक्षा और खुदाई से जुड़े सवाल उठे।
2016: उत्तम नगर में मां और दो बच्चों की मौत
अगस्त 2016 में पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर में दो मंजिला मकान गिरने से एक महिला और उसके दो बच्चों सहित तीन लोगों की मौत हुई। शुरुआती पुलिस जाँच में आसपास चल रहे सीवर निर्माण कार्य के कारण भवन की नींव प्रभावित होने की संभावना की भी पड़ताल की गई। इस मामले में उपलब्ध प्रमुख सार्वजनिक रिपोर्टों में भवन मालिक की गिरफ्तारी की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती।
2018: सावन पार्क, अशोक विहार में सात मौतें
26 सितंबर 2018 को उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के सावन पार्क, अशोक विहार में पांच मंजिला आवासीय भवन गिर गया। अंतिम रिपोर्टों के अनुसार हादसे में सात लोगों की मौत हुई, जिनमें चार बच्चे शामिल थे। पांच लोग घायल हुए। हादसे के बाद उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने समय रहते भवन को ‘खतरनाक’ के रूप में पहचान नहीं पाने को गंभीर प्रशासनिक चूक माना। दो अभियंताओं को निलंबित किया गया और एक संविदा कर्मचारी को हटा दिया गया। आसपास के अन्य भवनों की जाँच के भी आदेश दिए गए।
2019: सुदर्शन पार्क और जीवन पार्क
जनवरी 2019 में पश्चिमी दिल्ली के सुदर्शन पार्क, मोती नगर औद्योगिक क्षेत्र में विस्फोट और आग के बाद एक भवन गिर गया। हादसे में छह लोगों की मौत और आठ लोग घायल हुए। भवन में औद्योगिक गतिविधि चल रही थी।
अगस्त 2019 में समयपुर बादली के जीवन पार्क में तीन मंजिला भवन का एक हिस्सा गिर गया। इसमें 18 वर्षीय महिला की मौत हुई और दो लोग घायल हुए। पुलिस ने लापरवाही से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जाँच शुरू की।
2020: भजनपुरा में चार बच्चों और शिक्षक की मौत
25 जनवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा में एक भवन का हिस्सा गिर गया। उसमें एक कोचिंग केंद्र चल रहा था। हादसे में चार बच्चों और एक शिक्षक सहित पांच लोगों की मौत हुई। बताया गया कि भवन की चौथी मंजिल पर निर्माण कार्य चल रहा था। भवन के सह-मालिक शंकर कश्यप को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने लापरवाही से मौत होने और भवन निर्माण या मरम्मत में लापरवाही से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। दूसरे सह-मालिक और शिक्षक उमेश कश्यप की मौत हादसे में ही हो गई थी।
दिसंबर 2020 में पश्चिमी दिल्ली के विष्णु गार्डन, ख्याला में दो मंजिला मकान का हिस्सा गिर गया। भवन में मोटर की कुंडली बनाने की इकाई चल रही थी। हादसे में चार मजदूरों की मौत हुई और दो लोग घायल हुए। पुलिस ने भवन मालिक की पहचान महेंद्र पाल के रूप में की और मामले को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए प्रशासन के सामने रखा।
इसी वर्ष वसंत कुंज एनक्लेव में पड़ोसी भवन की दीवार गिरने से एक व्यक्ति की मौत हुई। पुलिस ने दीवार वाले मकान के मालिक को गिरफ्तार किया।
2021: सब्जी मंडी में दो बच्चों की मौत
13 सितंबर 2021 को उत्तरी दिल्ली के सब्जी मंडी इलाके में चार मंजिला पुराना भवन गिर गया। सड़क से गुजर रहे सात और 12 वर्ष के दो भाइयों की मौत हुई। बताया गया कि भूतल की दुकान में मरम्मत का काम चल रहा था।
पुलिस ने दुकान के मालिक मोहक अरोड़ा को गिरफ्तार किया। आरोप था कि नगर निगम की अनुमति के बिना मरम्मत और तोड़फोड़ का काम किया जा रहा था। बाद की पुलिस जाँच में कहा गया कि भूतल पर बने कंक्रीट के मंच को लगातार हथौड़े से तोड़े जाने से भवन का ढांचा प्रभावित हुआ था। हालांकि नगर निगम की अलग जाँच रिपोर्ट में किसी व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। इससे पुलिस और नागरिक निकाय की जाँच के निष्कर्षों में अंतर भी सामने आया।
इसी वर्ष गोविंदपुरी के नवजीवन कैंप में बारिश के दौरान दो मंजिला मकान की छत गिरने से एक महिला की मौत हुई।
2022: एक ही साल में कई गंभीर हादसे
25 अप्रैल 2022 को सत्य निकेतन में तीन मंजिला मकान मरम्मत के दौरान गिर गया। इसमें दो मजदूरों की मौत और चार लोग घायल हुए। नगर निगम ने भवन को 31 मार्च को ही खतरनाक घोषित कर दिया था और 11 अप्रैल को पुलिस से अवैध निर्माण रोकने में सहयोग मांगा था। पुलिस ने ठेकेदार मोहम्मद रईस को बिहार के अररिया से गिरफ्तार किया। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस उस समय भवन मालिक की भी तलाश कर रही थी। उस पर मकान को पीजी में बदलने के लिए निर्माण कार्य कराने का आरोप था।
- मई में मुंडका के फिरनी रोड पर निर्माणाधीन भवन की छत गिरने से एक मजदूर की मौत हुई।
- जून में पहाड़गंज में पहले से खतरनाक घोषित पुराने भवन का हिस्सा गिरने से तीन वर्ष के बच्चे की मौत हो गई।
- जुलाई में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद, बाबू नगर में तीन मंजिला भवन गिरने से 20 वर्षीय युवक की मौत हुई और परिवार के कई सदस्य घायल हुए। यह भवन करीब 17 से 18 वर्ष पुराना बताया गया था।
- सितंबर में जौहरीपुर एक्सटेंशन में मरम्मत के दौरान भवन गिर गया। दो मजदूरों की मौत हुई और सात लोग घायल हुए। पुलिस ने भवन मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की।
- अक्टूबर में लाहौरी गेट में जर्जर दो मंजिला भवन गिरने से चार वर्ष की बच्ची सहित तीन लोगों की मौत हुई। पुलिस ने लापरवाही से मौत के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 304ए सहित संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
2023: ओखला हादसा और बारिश में दर्जनों घटनाएं
अगस्त 2023 में संजय कॉलोनी, ओखला औद्योगिक क्षेत्र में निर्माणाधीन भवन के तहखाने की खुदाई के दौरान उसका एक हिस्सा गिर गया। दो मजदूरों की मौत हुई और छह घायल हुए। अगले दिन पुलिस ने संपत्ति मालिक तरुण गर्ग को गिरफ्तार किया और लापरवाही से मौत होने का मामला दर्ज किया। शुरुआती रिपोर्टों में निर्माण को स्वीकृत और नक्शे को मंजूर बताया गया था। इसके बावजूद हादसे के बाद पुलिस जाँच में मालिक की गिरफ्तारी हुई।
जुलाई 2023 की भारी बारिश ने समस्या का दूसरा पहलू सामने ला दिया। केवल दो दिनों में अग्निशमन विभाग को मकान, दीवार, छत या बालकनी गिरने की 28 सूचनाएं मिलीं। विभाग ने इसे उस समय पिछले 20 वर्षों में सबसे अधिक संख्या बताया था। ये सूचनाएं अलकनंदा, सदर बाजार, कूचा पतीराम, आंबेडकर नगर, लाजपत नगर, जंगपुरा, चावड़ी बाजार, शेख सराय, बुध विहार और इंद्रा बाजार जैसे इलाकों से आई थीं।
2024: 464 घटनाएं और पहले आठ महीनों में 22 मौतें
2024 का आंकड़ा दिल्ली में भवन गिरने की समस्या के वास्तविक आकार को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दिल्ली अग्निशमन सेवा के अनुसार पूरे वर्ष 464 मकान या भवन गिरने से संबंधित घटनाएं दर्ज हुईं। जनवरी से अगस्त के बीच ही 344 घटनाएं, 22 मौतें और 172 घायल दर्ज किए जा चुके थे।
21 मार्च को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कबीर नगर और वेलकम इलाके में दो मंजिला पुराना भवन गिर गया। इसमें दो श्रमिकों की मौत हुई और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ। भवन मालिक शाहिद फरार बताया गया और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
18 सितंबर को मध्य दिल्ली के बापा नगर, करोल बाग में पांच मंजिला भवन गिर गया। हादसे में चार लोगों की मौत और 14 लोग घायल हुए। स्थानीय लोगों के अनुसार भवन करीब 60 वर्ष पुराना था।
2025: 544 घटनाएं और कई बड़ी त्रासदियां
2025 में दिल्ली अग्निशमन सेवा ने मकान या भवन गिरने की 544 घटनाएं दर्ज कीं। 2024 और 2025 को मिलाकर ऐसी घटनाओं में 46 लोगों की मौत दर्ज हुई।
- 19 अप्रैल को दयालपुर, मुस्तफाबाद में चार मंजिला आवासीय भवन गिर गया। हादसे में 11 लोगों की मौत और 11 लोग घायल हुए। नगर निगम ने भवन में अनधिकृत निर्माण की बात कही। अधिकारियों के अनुसार भूतल की दो दुकानों को आपस में मिलाने के दौरान भार उठाने वाली दीवार हटाए जाने की संभावना जाँच का प्रमुख विषय बनी।
- मई में नबी करीम में निर्माणाधीन होटल के स्थल पर तहखाने की दीवार गिरने से ठेकेदार सहित तीन मजदूरों की मौत हुई। पुलिस ने भवन मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और उसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।
- जून में नांगलोई के कमरुद्दीन नगर में पुराने भवन का हिस्सा गिरने से आठ वर्षीय बच्चे की मौत हुई।
- जुलाई में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के वेलकम, जनता मजदूर कॉलोनी में चार मंजिला भवन गिरने से मालिक सहित उसके परिवार और अन्य लोगों को मिलाकर छह लोगों की मौत हुई और आठ लोग घायल हुए। चूंकि भवन मालिक खुद भी मृतकों में शामिल था, इसलिए उसके खिलाफ गिरफ्तारी का सवाल नहीं था। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी और जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।
- इसी महीने सदर बाजार में मिठाई पुल के पास दो मंजिला भवन गिरने से एक व्यक्ति की मौत हुई। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) ने कहा कि भवन को पहले ही असुरक्षित घोषित करके खाली कराया गया था। मृतक के परिवार के लिए पांच लाख रुपये की सहायता की घोषणा भी की गई।
- अगस्त में जैतपुर, हरि नगर में भारी बारिश के बाद एक दीवार गिरकर झुग्गियों पर आ गई। अलग-अलग अंतिम रिपोर्टों में मृतकों की संख्या सात से आठ तक बताई गई।
- इसी महीने दरियागंज में सद्भावना पार्क के पास पुनर्निर्माणाधीन तीन मंजिला भवन का हिस्सा गिर गया। तीन मजदूरों की मौत हुई। पुलिस ने भवन मालिकों और ठेकेदारों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
2026: सैदुलाजाब, रोहिणी और अब सत्य निकेतन
30 मई 2026 को साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैदुलाजाब में एक बहुमंजिला भवन गिर गया। हादसे में छह लोगों की मौत हुई। पुलिस जाँच में सामने आया कि पुराने भवन के ऊपर कथित तौर पर दो अतिरिक्त मंजिलें बनाई जा रही थीं। भवन मालिक करमबीर सेजवाल को गिरफ्तार किया गया और अदालत ने उसे तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। बाद में पुलिस ने निर्माण से जुड़े मनीष खत्री और अविनेश गुप्ता को भी गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार उन्हें दो अतिरिक्त अवैध मंजिलें बनाने के लिए करीब 1.8 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया था।
दिल्ली पुलिस ने तकनीकी जाँच के लिए आईआईटी दिल्ली से अध्ययन कराने का फैसला किया। नगर निगम ने आसपास के करीब 100 भवनों को अनधिकृत निर्माण से संबंधित नोटिस देने की कार्रवाई भी शुरू की।
8 जुलाई को रोहिणी सेक्टर 16 में एक-दूसरे से लगे दो निर्माणाधीन चार मंजिला भवन गिर गए। अंतिम रिपोर्ट के अनुसार तीन लोगों की मौत हुई, जिनमें एक भवन मालिक और सड़क से गुजर रहा एक व्यक्ति शामिल था।
इसके बाद 6 सितंबर 2026 को सत्य निकेतन में पांच मंजिला छात्रावास और पीजी भवन गिर गया। 7 सितंबर तक उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार मृतकों की संख्या सात पहुंच चुकी थी। भवन मालिक हरिराम गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ गैर इरादतन मानव वध और लापरवाही से संबंधित मामला दर्ज किया गया। इससे पहले उसके खिलाफ देश छोड़ने से रोकने के लिए लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया था।
हादसे के बाद नगर निगम ने संबंधित इलाके में चार मंजिल से अधिक के अनधिकृत निर्माणों को सील करने की कार्रवाई शुरू करने की घोषणा की। पांच निगम अधिकारियों के निलंबन की भी खबर सामने आई। मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए गए हैं। चूंकि घटना अभी ताजा है, इसलिए आपराधिक जिम्मेदारी और भवन गिरने के तकनीकी कारणों पर अंतिम निष्कर्ष अभी आना बाकी है।
2010 से 2026 तक कुल कितनी इमारतें गिरीं?
यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण और परेशान करने वाला सवाल है। इसका कोई निश्चित सरकारी आंकड़ा अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। अलग अलग स्रोतों से जुटाई गयी जानकारी के मुताबिक 2024 में 464 और 2025 में 544 मकान या भवन गिरने से जुड़ी घटनाओं का अग्निशमन सेवा का आंकड़ा है। 2026 के केवल जनवरी से मई के बीच 76 ऐसी घटनाएं दर्ज हो चुकी थीं। यानी जनवरी 2024 से मई 2026 तक कम से कम 1,084 ऐसी घटनाएं दर्ज हुईं। लेकिन यहां एक जरूरी सावधानी है। इन 1,084 घटनाओं को यह कहना कि ‘1,084 पूरी इमारतें गिर गईं’, सही नहीं होगा। अग्निशमन विभाग की इस श्रेणी में पूरी इमारत के साथ-साथ भवन का कोई हिस्सा, छत, दीवार या बालकनी गिरने की घटनाएं भी शामिल हो सकती हैं।
2011 से 2013 के संसदीय आंकड़े भी समस्या की गंभीरता दिखाते हैं। केवल ‘भवन गिरने’ की श्रेणी में इन तीन वर्षों में 44 मौतें दर्ज हुईं। ‘मकान गिरने’ की अलग श्रेणी को जोड़ने पर यह संख्या 81 तक पहुंच जाती है।
इसलिए उपलब्ध साक्ष्यों से इतना जरूर कहा जा सकता है कि 2010 से 2026 के बीच दिल्ली में भवन, मकान, छत, दीवार या भवन के हिस्से गिरने की घटनाएं बहुत बड़ी संख्या में हुई हैं और इनकी वास्तविक संख्या हजारों में हो सकती है। लेकिन अभी ऐसा कोई एकीकृत सार्वजनिक सरकारी रिकॉर्ड नहीं है जिसमें हर घटना का पता, भवन की स्थिति, मालिक का नाम, मौतों की संख्या, मुकदमा, गिरफ्तारी और मुकदमे के अंतिम परिणाम की जानकारी एक साथ मिलती हो।
भवन मालिकों पर कार्रवाई का पैटर्न क्या बताता है?
पिछले 16 वर्षों की घटनाओं को एक साथ देखने पर एक साफ तस्वीर सामने आती है। लालिता पार्क में भवन मालिक गिरफ्तार हुआ। उत्तम नगर में मालिक और ठेकेदार गिरफ्तार हुए। इंद्रलोक में बगल के भूखंड के मालिक और निर्माणकर्ता को गिरफ्तार किया गया। भजनपुरा में सह-मालिक गिरफ्तार हुआ। सब्जी मंडी में दुकान मालिक गिरफ्तार हुआ। 2022 के सत्य निकेतन हादसे में ठेकेदार गिरफ्तार हुआ। 2023 के ओखला हादसे में संपत्ति मालिक गिरफ्तार हुआ। 2025 के नबी करीम हादसे में मालिक के खिलाफ प्राथमिकी और हिरासत की कार्रवाई हुई। 2026 के सैदुलाजाब हादसे में मालिक और निर्माण से जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। अब सत्य निकेतन के ताजा हादसे में भी भवन मालिक गिरफ्तार हो चुका है। यानी एक बात साफ है, बड़ी दुर्घटना और मौत होने के बाद पुलिस कार्रवाई बार-बार हुई है। लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि दुर्घटना होने से पहले कितनी कार्रवाई हुई? यही वह सवाल है जिसका जवाब दिल्ली की भवन सुरक्षा व्यवस्था को देना होगा।
2022 का सत्य निकेतन भवन पहले ही खतरनाक घोषित किया जा चुका था, फिर भी वहां काम चलता रहा। सैदुलाजाब में कथित अवैध निर्माण का मामला हादसे के बाद गंभीरता से सामने आया। अशोक विहार में भवन को समय रहते खतरनाक घोषित न कर पाने पर अभियंताओं को निलंबित किया गया। लालिता पार्क के बाद चार नगर निगम कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई। लगभग हर बड़ी दुर्घटना के बाद सर्वेक्षण, जाँच, निलंबन, सीलिंग और अनधिकृत निर्माण हटाने के आदेश सामने आते रहे। इससे एक बात बार-बार सामने आती है, दिल्ली में भवन सुरक्षा की व्यवस्था का बड़ा हिस्सा हादसे के बाद सक्रिय होता दिखाई देता है, हादसे से पहले नहीं।
असली समस्या सिर्फ जर्जर इमारत नहीं है
दिल्ली में भवन गिरने की हर घटना को सिर्फ ‘पुरानी इमारत’ कहकर समझना भी सही नहीं होगा। कई मामलों में अवैध निर्माण, बिना अनुमति तोड़फोड़, अतिरिक्त मंजिलें बनाना, पड़ोसी भूखंड में गहरी खुदाई, भवन की भार उठाने वाली दीवार हटाना, खराब निर्माण सामग्री, मरम्मत के दौरान लापरवाही और समय पर निरीक्षण न होना जैसे कारण सामने आए हैं।
यानी समस्या केवल इमारत की उम्र नहीं, बल्कि उसके साथ वर्षों में किए गए बदलावों की भी है। कई पुराने मकानों में ऊपर नई मंजिलें जोड़ दी जाती हैं, नीचे दुकानें बना दी जाती हैं, दीवारें तोड़ दी जाती हैं, तहखाने खोद दिए जाते हैं या मकान को पीजी, छात्रावास अथवा व्यावसायिक परिसर में बदल दिया जाता है। बाहर से देखने पर भवन वही रहता है, लेकिन उसकी मूल संरचना पर पड़ने वाला भार और दबाव पूरी तरह बदल सकता है। सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब किसी भवन को पहले ही खतरनाक घोषित कर दिया गया हो, लेकिन उसे खाली कराने या उसमें चल रहे निर्माण को रोकने की कार्रवाई प्रभावी ढंग से न हो।
दिल्ली को भवन सुरक्षा रजिस्टर की जरूरत क्यों है?
2010 के लालिता पार्क हादसे से लेकर सितंबर 2026 के सत्य निकेतन हादसे तक करीब 16 साल बीत चुके हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग भवन गिरने की घटनाओं में जान गंवा चुके हैं। फिर भी सबसे बुनियादी सवाल का जवाब आज भी आसानी से नहीं मिलता कि दिल्ली में कितनी इमारतें जोखिम में हैं और उनमें से कितनों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है।
क्या दिल्ली में ऐसा सार्वजनिक भवन सुरक्षा रजिस्टर नहीं होना चाहिए जिसमें हर इमारत की उम्र, स्वीकृत मंजिलों की संख्या, वास्तविक मंजिलों की संख्या, निर्माण और बदलाव की जानकारी, संरचनात्मक जाँच, खतरनाक घोषित किए जाने की स्थिति, मालिक को दिए गए नोटिस और प्रशासन की कार्रवाई दर्ज हो?
ऐसी व्यवस्था होने पर किसी भवन के बारे में यह पता लगाना मुश्किल नहीं होगा कि वह सुरक्षित है या पहले से खतरे की सूची में है। नगर निगम, पुलिस और अग्निशमन विभाग के बीच जानकारी भी साझा की जा सकेगी। फिलहाल स्थिति यह है कि हादसा होता है, राहत और बचाव शुरू होता है, फिर जाँच होती है, आरोपी की तलाश होती है, गिरफ्तारी होती है, अधिकारी निलंबित होते हैं और कुछ समय बाद मामला खबरों से गायब हो जाता है। लेकिन असली सफलता तब होगी जब अगली बार जर्जर या खतरनाक भवन गिरने के बाद नहीं, गिरने से पहले पहचान लिया जाए क्योंकि किसी भवन के गिरने के बाद मालिक को गिरफ्तार कर लेना कानून की कार्रवाई हो सकती है, लेकिन भवन को गिरने से पहले बचा लेना ही असली प्रशासनिक सफलता है।


