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दिल्ली की दिवाली में पटाखों पर पहरा, सुप्रीम कोर्ट क्या सुनाएगा फैसला?
Delhi Diwali Crackers Ban: दिल्ली में दिवाली पर पटाखे जलाने की छूट मिलेगी या प्रतिबंध जारी रहेगा? बढ़ते प्रदूषण और ग्रीन पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर क्या होगा फैसला?
Delhi Diwali Crackers Ban
Delhi Diwali Crackers Ban: दिवाली (Diwali) की रोशनी और आतिशबाजी (Fireworks) की तैयारी के बीच दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में इस बार भी पटाखों को लेकर असमंजस बना हुआ है। एक तरफ लोग त्योहार पर पटाखे जलाने की अनुमति चाहते हैं, तो दूसरी तरफ राजधानी की जहरीली होती हवा (Toxic Air) चिंता बढ़ा रही है। दशहरे (Dussehra) के बाद प्रदूषण का स्तर बढ़ने और हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी (Poor Category) में पहुंचने से बहस और तेज हो गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस दिवाली ग्रीन पटाखों (Green Crackers) से जश्न मनाने की छूट मिलेगी या प्रतिबंध (Ban) जारी रहेगा? अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के रुख पर है।
ग्रीन पटाखों पर राहत मिलेगी या रोक रहेगी बरकरार?
दिल्ली में पटाखों को लेकर प्रतिबंध का मुद्दा हर साल दिवाली से पहले चर्चा में आ जाता है। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखे जलाने की सीमित अनुमति दी थी। इसी वजह से इस बार भी लोग ऐसी ही राहत की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, इस बार अनुमति मिलेगी या नहीं, इसे लेकर अंतिम स्थिति अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
पटाखों के इस्तेमाल को लेकर लोगों के बीच भी अलग-अलग राय है। कुछ लोग धार्मिक परंपराओं (Religious Traditions) और त्योहार मनाने की आजादी का हवाला देते हैं, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि पहले से प्रदूषण की मार झेल रही राजधानी में आतिशबाजी से हवा और खराब हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में क्या कहा था?
12 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पटाखों के इस्तेमाल को लेकर ऐसा संतुलित रास्ता तलाशना होगा, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाओं (Religious Sentiments) का सम्मान भी हो और प्रदूषण से होने वाले नुकसान (Pollution Damage) को भी कम किया जा सके।
इसी बहस के बीच दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऑल द्वारका रेजिडेंट फेडरेशन (All Dwarka Residents Federation) के अजीत स्वामी ने सुझाव दिया कि आतिशबाजी के लिए एक निश्चित समय (Fixed Time) तय किया जाना चाहिए और केवल ग्रीन पटाखों को ही अनुमति मिलनी चाहिए।
इस मांग के पीछे तर्क है कि यदि पटाखे जलाने की अनुमति दी जाती है, तो उसके लिए स्पष्ट समय-सीमा और नियम बनाए जाएं, ताकि त्योहार भी मनाया जा सके और प्रदूषण पर नियंत्रण रखने की कोशिश भी जारी रहे।
दशहरे के बाद दिल्ली की हवा फिर खराब
दिल्ली-एनसीआर में दशहरे के बाद वायु प्रदूषण (Air Pollution) का स्तर बढ़ने लगा है। राजधानी में लगातार दूसरे दिन वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index-AQI) खराब श्रेणी में दर्ज किया गया। दिवाली से पहले प्रदूषण में यह बढ़ोतरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सर्दियों के दौरान मौसम संबंधी परिस्थितियां और दूसरे प्रदूषण स्रोत हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan-GRAP) लागू किया जाता है। इसके तहत हवा की गुणवत्ता बिगड़ने पर अलग-अलग चरणों में पाबंदियां लगाई जाती हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन प्रतिबंधों से प्रदूषण में वास्तव में कमी आ रही है?
GRAP की पाबंदियों से कितना सुधरता है AQI?
इंडिया क्वॉलिटी एंड एनर्जी इंसाइट्स (India Quality and Energy Insights) में प्रकाशित एक विश्लेषण (Analysis) में अक्टूबर 2022 से फरवरी 2026 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। विश्लेषण एनालिस्ट मनोज कुमार (Manoj Kumar) ने किया है।
इस विश्लेषण के मुताबिक, जब GRAP का तीसरा या चौथा चरण लागू किया गया, तो 12 में से 10 मौकों पर अगले सात दिनों के भीतर औसत AQI में और बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह आंकड़ा बताता है कि गंभीर प्रदूषण की स्थिति में पाबंदियां लागू होने के बाद भी हवा की गुणवत्ता में तत्काल सुधार सुनिश्चित नहीं होता।
हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि GRAP की पाबंदियां बेअसर हैं। प्रदूषण पर मौसम, हवा की गति, स्थानीय उत्सर्जन (Local Emissions), वाहनों और अन्य स्रोतों का भी असर पड़ता है। विश्लेषण इस बात की ओर संकेत करता है कि आपातकालीन प्रतिबंधों के साथ प्रदूषण के मूल कारणों पर नियंत्रण करना भी जरूरी है।
चार साल के आंकड़ों में क्या दिखा?
विश्लेषण में दिल्ली के सर्दियों के औसत AQI के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव सामने आया है। वर्ष 2022-23 की सर्दियों में औसत AQI 280 दर्ज किया गया था, जो 2023-24 में बढ़कर 304 हो गया। इसके बाद 2024-25 में यह घटकर 285 रहा, लेकिन 2025-26 में फिर बढ़कर 295 पर पहुंच गया।
ये आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण लगातार गंभीर चुनौती बना हुआ है। ऐसे में दिवाली पर पटाखों की अनुमति को लेकर होने वाला फैसला केवल त्योहार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) और पर्यावरण (Environment) से भी है।
फिलहाल, दिल्ली-एनसीआर के लोगों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है। अदालत ग्रीन पटाखों को लेकर क्या रुख अपनाती है और क्या इस बार आतिशबाजी के लिए सीमित छूट मिलती है, यह आने वाले आदेश से स्पष्ट होगा। तब तक दिवाली पर पटाखे जलाने को लेकर असमंजस बना हुआ है।


