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दीपांशु शौकीन ने खुद ठुकराया NSUI का टिकट, फिर DUSU हार पर कन्हैया से क्यों जवाब मांग रहे राहुल?
Deepanshu Shokeen Victory: दीपांशु शौकीन ने NSUI के अध्यक्ष पद का टिकट ऑफर ठुकराया था, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर DUSU उपाध्यक्ष चुनाव जीत गए। हार के बाद राहुल गांधी ने कन्हैया कुमार से जवाब मांगा।
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Deepanshu Shokeen Victory: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन यानी डूसू (DUSU) चुनाव 2026 में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) के खराब प्रदर्शन के बाद अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मंथन शुरू कर दिया है। चुनाव में एनएसयूआई चारों केंद्रीय पदों में से एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर बड़ी जीत दर्ज की। इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एनएसयूआई प्रभारी कन्हैया कुमार और संगठन के अध्यक्ष विनोद जाखड़ को बुलाकर चुनाव में हुई हार को लेकर जवाब मांगा।
इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा दीपांशु शौकीन के टिकट को लेकर हो रही है। चुनाव से पहले यह दावा सामने आया था कि एनएसयूआई ने शौकीन को टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। लेकिन कांग्रेस की ओर से बाद में इस दावे को खारिज किया गया। पार्टी के वरिष्ठ नेता अमिताभ दुबे ने साफ किया कि शौकीन को अध्यक्ष पद का टिकट ऑफर किया गया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया था।
दीपांशु शौकीन की जीत ने बढ़ाई मुश्किल
सितंबर 2026 में हुए डूसू चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर 30,615 वोट हासिल किए। उन्होंने एबीवीपी (ABVP) के इशु मौर्या को 16,910 वोटों पर रोक दिया, जबकि एनएसयूआई के आधिकारिक उम्मीदवार वीर चतरथ को सिर्फ 4,313 वोट मिले। शौकीन ने 13,705 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
इस नतीजे ने कांग्रेस के छात्र संगठन के सामने एक अलग तरह का सवाल खड़ा कर दिया। जिस चुनाव में एनएसयूआई अपना कोई केंद्रीय पद नहीं जीत सकी, उसी चुनाव में उससे अलग होकर मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन उपाध्यक्ष बन गए।
वहीं, एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के तीन पदों पर जीत दर्ज की। इस तरह चार केंद्रीय पदों में से तीन एबीवीपी के खाते में गए और एक पद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीता।
टिकट को लेकर क्या है पूरा विवाद?
दीपांशु शौकीन के चुनाव लड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हुई कि आखिर उन्हें एनएसयूआई (NSUI) का टिकट क्यों नहीं मिला। कई रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि आखिरी समय पर संगठन ने उनका टिकट काट दिया, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया।
लेकिन कांग्रेस नेता अमिताभ दुबे ने 19 सितंबर को इस दावे को खारिज किया था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर कहा था कि यह दावा गलत है कि एनएसयूआई ने शौकीन को टिकट देने से इनकार कर दिया था। उनके मुताबिक, शौकीन को अध्यक्ष पद का टिकट ऑफर किया गया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।
दुबे ने यह भी सवाल उठाया था कि अगर शौकीन अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे, तो फिर यह दावा क्यों किया जा रहा है कि उन्हें टिकट नहीं मिला।
शौकीन ने दिया अलग बयान
दूसरी तरफ दीपांशु शौकीन ने सार्वजनिक तौर पर अलग बात कही थी। उनका कहना था कि उनका नाम पहले कन्फर्म हुआ था, लेकिन बाद में टिकट किसी और को दे दिया गया। इसी वजह से उन्होंने उपाध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया।
यानी टिकट को लेकर कांग्रेस के भीतर और शौकीन की तरफ से सामने आई बातें एक-दूसरे से अलग रही हैं। यही विवाद अब राहुल गांधी की बैठक में भी अहम मुद्दा बताया जा रहा है।
राहुल गांधी ने कन्हैया और जाखड़ से क्यों मांगा जवाब?
डूसू चुनाव में एनएसयूआई की हार के बाद राहुल गांधी ने एनएसयूआई प्रभारी कन्हैया कुमार और अध्यक्ष विनोद जाखड़ को बैठक के लिए बुलाया। रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक में चुनाव में खराब प्रदर्शन की वजहों पर चर्चा हुई और संगठन की रणनीति, उम्मीदवारों के चयन और चुनाव प्रबंधन को लेकर जानकारी मांगी गई।
राहुल गांधी की तरफ से यह सवाल भी उठाया गया कि जब कांग्रेस का उम्मीदवार अध्यक्ष पद की दौड़ में जीत के करीब था, तो आखिर चुनाव का परिणाम इस तरह क्यों आया।
सूत्रों के हवाले से सामने आया कि राहुल गांधी ने बैठक में सीधे सवाल किया, “हम अध्यक्ष पद जीतने के बेहद करीब थे, फिर क्या हुआ?”
यानी कांग्रेस नेतृत्व अब सिर्फ नतीजे को देखने के बजाय यह समझने की कोशिश कर रहा है कि चुनाव के दौरान उम्मीदवारों के चयन, संगठन के तालमेल और कैंपेन में कहां कमी रह गई।
टिकट वितरण पर उठे सवाल
डूसू चुनाव का नतीजा आने के बाद कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दीपांशु शौकीन का निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीतना इस चर्चा के केंद्र में है।
शौकीन पहले एनएसयूआई से जुड़े रहे थे और संगठन से टिकट की उम्मीद कर रहे थे। चुनाव के बाद उनका निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीतना एनएसयूआई के लिए इसलिए भी चर्चा का विषय बना, क्योंकि संगठन का आधिकारिक उम्मीदवार उपाध्यक्ष पद पर काफी पीछे रह गया।
इसके अलावा चुनाव में दूसरे बागी उम्मीदवारों के मैदान में उतरने को लेकर भी कांग्रेस के भीतर रणनीति पर सवाल उठे हैं। रिपोर्टों में इसे उम्मीदवार चयन और संगठन के अंदर तालमेल से जोड़कर देखा गया है।
चार में एक भी सीट नहीं, फिर निर्दलीय ने बचाई तस्वीर
डूसू के चार केंद्रीय पदों के नतीजे कांग्रेस के छात्र संगठन के लिए बड़ा झटका रहे। एनएसयूआई एक भी केंद्रीय पद नहीं जीत सकी, जबकि एबीवीपी ने तीन पद अपने नाम किए और उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन विजयी रहे।
ऐसे में अब कांग्रेस नेतृत्व के सामने सिर्फ चुनावी हार की समीक्षा का सवाल नहीं है, बल्कि छात्र राजनीति में संगठन की रणनीति, उम्मीदवारों के चयन और छात्रों के साथ जमीनी जुड़ाव को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
राहुल गांधी की कन्हैया कुमार और विनोद जाखड़ के साथ बैठक को इसी समीक्षा की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि एनएसयूआई इस चुनावी नतीजे से जुड़े सवालों पर आगे क्या बदलाव करती है और संगठन की रणनीति किस दिशा में जाती है।


