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अब मनमाने तरीके से नहीं होगा प्रदर्शन? Delhi HC में SOP लागू करने की मांग, व्यापारियों के नुकसान का उठा मुद्दा
Delhi HC News: इस मामले का उल्लेख वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पोद्दार ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने किया।
Delhi HC News: दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन (Protests in Delhi) के तरीकों को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। प्रदर्शन को व्यवस्थित करने और आम लोगों के साथ व्यापारियों के कामकाज पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी (Standard Operating Procedure) लागू करने की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में याचिका दायर की गई है।
याचिका में मांग की गई है कि विरोध-प्रदर्शनों के लिए तय नियम बनाए जाएं और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले को लागू करने के निर्देश दिए जाएं।
HC में याचिका पर क्या हुआ?
इस मामले का उल्लेख वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पोद्दार (Sanjay Poddar) ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे (Nitin Vasudev Sambre) की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने किया। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा (Chetan Sharma) ने अदालत को बताया कि इसी तरह का एक मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है।
इसके बाद पीठ ने कहा कि इस याचिका पर जंतर-मंतर (Jantar Mantar) से जुड़े अन्य मामलों के साथ सुनवाई की जाएगी। ऐसे में अब इस मामले की आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी।
प्रदर्शन से व्यापारियों को 2,000 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा
याचिका में दावा किया गया है कि हाल के दिनों में विरोध-प्रदर्शनों के कारण व्यापारियों को लगभग दो हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान पैदा होने वाली परेशानियों का असर कारोबार और दूसरे जरूरी कामों पर नहीं पड़ना चाहिए।
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि विरोध-प्रदर्शन के लिए एसओपी लागू करने और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं। इसका उद्देश्य प्रदर्शन की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना और उससे आम लोगों को होने वाली परेशानियों को कम करना बताया गया है।
तय जगहों पर हों प्रदर्शन, कामकाज पर न पड़े असर
याचिका के मुताबिक, विरोध-प्रदर्शन तय स्थानों पर व्यवस्थित तरीके से होने चाहिए। प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने का मौका मिले, लेकिन इसके साथ ही व्यापारियों और दूसरे लोगों के कामकाज पर अनावश्यक असर भी न पड़े।
इस मामले में अदालत से ऐसे निर्देश देने की मांग की गई है, जिनसे विरोध-प्रदर्शनों के आयोजन को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बन सके। फिलहाल हाई कोर्ट ने इस याचिका पर जंतर-मंतर से जुड़े दूसरे मामलों के साथ सुनवाई करने की बात कही है। अब देखना होगा कि सुनवाई के दौरान अदालत इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।


