जंतर-मंतर पर अब नहीं होंगे प्रदर्शन? दिल्ली हाई कोर्ट हुई सख्त, पूछा- पूरे शहर को...

Jantar Mantar Protest Venue Row: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि आखिर शहर के बीचों-बीच प्रदर्शन क्यों हों और पूरे शहर को बंधक क्यों बनने दिया जाए। जानिए कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और सरकार से क्या कहा।

Aditya Kumar Verma
Published on: 7 Aug 2026 3:59 PM IST
Jantar Mantar Protest Venue Row | Delhi High Court Questions
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Jantar Mantar Protest Venue Row: दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाए रखने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि आखिर दिल्ली के बीचों-बीच किसी जगह को प्रदर्शन के लिए कैसे तय किया जा सकता है। कोर्ट का मानना है कि यहां बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से व्यवस्था प्रभावित होती है और ऐसे हालात बन जाते हैं कि जैसे पूरे शहर को ही बंधक बना लिया गया हो।

'शहर को बेवजह बंधक क्यों बनने देना चाहिए?'

जस्टिस अमित महाजन (Justice Amit Mahajan) ने सुनवाई के दौरान अपनी टिप्पणी में कहा कि उनके विचार से ऐसी चीजें शहर के अंदर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फैसला सरकार को करना है, लेकिन आखिर बेवजह पूरे शहर को बंधक क्यों बनने देना चाहिए।

जस्टिस अमित महाजन ने कहा, "मेरे विचार से ऐसी चीजें शहर में नहीं होनी चाहिए। लेकिन यह फैसला तो सरकार को करना है। आखिर बेवजह शहर को बंधक क्यों बनने देना चाहिए?"

एक कमेटी की याचिका पर हो रही थी सुनवाई

यह टिप्पणी उस समय की गई, जब दिल्ली हाई कोर्ट ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी (All India Dalit Christian Rights Protection Committee) की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

याचिका में संगठन ने मांग की थी कि उसे 10 अगस्त को जंतर-मंतर पर तीन घंटे प्रदर्शन करने की अनुमति दी जाए।

दिल्ली पुलिस पर फैसला नहीं लेने का आरोप

संगठन की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन की अनुमति के लिए दिल्ली पुलिस (Delhi Police) से 9 जुलाई को आवेदन किया गया था। हालांकि, तब से अब तक दिल्ली पुलिस ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है।

इस पर जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि वह निजी तौर पर यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर शहर के अंदर ही प्रदर्शन क्यों होने चाहिए।

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को दिया निर्देश

सुनवाई के दौरान जस्टिस अमित महाजन ने यह भी कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का विषय है। इसके बावजूद अदालत ने दिल्ली पुलिस से कहा कि वह शनिवार तक संगठन की ओर से प्रदर्शन की अनुमति संबंधी मांग पर फैसला करे।

दिल्ली हाई कोर्ट की इस टिप्पणी ने एक बार फिर राजधानी में प्रदर्शन स्थलों को लेकर बहस छेड़ दी है। अदालत ने साफ तौर पर यह सवाल उठाया कि शहर के बीचों-बीच होने वाले ऐसे प्रदर्शनों से आम लोगों को होने वाली परेशानी और व्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर भी विचार किया जाना चाहिए।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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