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Delhi Agnikand में हैरान करने वाला खुलासा! चाय स्टाॅल के नाम पर लवकेश बजाज ने खेला ‘मौत का खेल’
Delhi Fire Tragedy: मालवीय नगर स्थित ‘द फ्लोरिश स्टे’ होमस्टे में हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की मौत के मामले में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
Delhi Fire Tragedy
Delhi Fire Tragedy: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित ‘द फ्लोरिश स्टे’ होमस्टे में हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की मौत के मामले में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शुरुआती जांच और दस्तावेजों से संकेत मिले हैं कि हादसे के पीछे केवल सुरक्षा चूक ही नहीं, बल्कि कथित प्रशासनिक लापरवाही, नियमों की अनदेखी और अवैध व्यावसायिक गतिविधियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं। घटना के बाद दिल्ली पुलिस, नगर निगम, फायर विभाग और पर्यटन विभाग के बीच जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बेसमेंट में चल रहा था कमर्शियल किचन
जानकारी के अनुसार होमस्टे संचालक पर आरोप है कि उसने इमारत के एक हिस्से में बिना आवश्यक अनुमति के रेस्टोरेंट संचालित किया हुआ था, जबकि बेसमेंट में कमर्शियल किचन भी चल रहा था। बताया जा रहा है कि इस व्यवस्था के लिए आवश्यक लाइसेंस और मंजूरियां मौजूद नहीं थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि नगर निगम के रिकॉर्ड में केवल ग्राउंड फ्लोर पर चाय के स्टॉल के लिए आवेदन दर्ज था।
सूत्रों के मुताबिक, मालिक ने तत्काल लाइसेंस व्यवस्था का लाभ उठाकर सीमित श्रेणी के लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। इस प्रक्रिया में कई मामलों में मौके पर भौतिक सत्यापन आवश्यक नहीं होता, जिसका कथित तौर पर फायदा उठाया गया। आरोप है कि चाय स्टॉल की अनुमति के नाम पर बड़े स्तर पर रेस्टोरेंट और एलपीजी सिलेंडरों से संचालित किचन तैयार कर लिया गया।
छह कमरों के संचालन की थी अनुमति
दस्तावेजों के अनुसार, यह होमस्टे पर्यटन विभाग के तहत ‘सिल्वर श्रेणी’ में पंजीकृत था। उसे केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति मिली हुई थी, जिनमें पहली और दूसरी मंजिल पर तीन-तीन कमरे शामिल थे। यह लाइसेंस वर्ष 2027 तक वैध बताया गया है। नियमों के तहत बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना में भवन मालिक का उसी परिसर में निवास करना भी अनिवार्य होता है।
हादसे के बाद नगर निगम ने यह कहते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की कि संबंधित संपत्ति ‘लाल डोरा’ क्षेत्र में आती है। अधिकारियों का तर्क है कि ऐसे क्षेत्रों में स्थित कुछ पुरानी इमारतें सामान्य भवन उपनियमों के दायरे से अलग श्रेणी में आती हैं। दूसरी ओर, अन्य विभागों का कहना है कि भवन उपयोग, व्यावसायिक गतिविधियों और सुरक्षा मंजूरियों की निगरानी संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी थी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और विभिन्न विभाग अपने-अपने स्तर पर रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के लिए किस स्तर पर लापरवाही हुई और किन लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी।


