दिल्ली-NCR में प्रदूषण का संकट गहराया, 5 नवंबर से 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम; निर्माण कार्यों पर रोक

Delhi NCR Pollution : दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का कहर तेज हो गया है। कई इलाकों में AQI 700 के पार हो गया है। इसी वजह से कई तरह की पाबंदियां लागू की गई हैं।

Sawan Gupta
Published on: 4 Nov 2026 11:08 AM IST (Updated on: 4 Nov 2026 11:11 AM IST)
Delhi NCR Air Pollution
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NCR Air Pollution: दीपावली से पहले दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ने लगा है। राजधानी के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 के पार पहुंच गया है, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार 'गंभीर' श्रेणी में आता है। मंगलवार को दिल्ली का औसत एक्यूआई 350 दर्ज किया गया, जबकि बुधवार, चार नवंबर की सुबह जहांगीरपुरी, मुंडका, रोहिणी, बवाना और विवेक विहार सहित कई निगरानी केंद्रों पर स्थिति और खराब दिखाई दी। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली और एनसीआर के पांच प्रमुख जिलों में पांच से 20 नवंबर तक सरकारी तथा निजी कार्यालयों में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति का निर्देश दिया है। शेष कर्मचारियों को घर से काम करना होगा। इसके साथ पूरे एनसीआर में धूल पैदा करने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर 16 दिनों के लिए प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया गया है।

जहांगीरपुरी में एक्यूआई 441, मुंडका में 433 और रोहिणी में 426

केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के चार नवंबर को सुबह चार बजे उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली के जहांगीरपुरी में एक्यूआई 441, मुंडका में 433, रोहिणी में 426, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय क्षेत्र में 425, विवेक विहार में 419, अलीपुर और नरेला में 415-415 तथा आरके पुरम और सोनिया विहार में 409 दर्ज किया गया। पंजाबी बाग में यह 438 और बवाना में 405 रहा। हालांकि, इसी समय आनंद विहार में एक्यूआई 284 दर्ज किया गया। इससे स्पष्ट है कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर काफी अलग हो सकता है। कुछ निजी निगरानी प्लेटफॉर्म पर एक्यूआई 700 से अधिक बताए जाने के दावों की तुलना भारतीय सरकारी पैमाने से सीधे नहीं की जा सकती। भारतीय एक्यूआई प्रणाली में 401 से 500 तक का स्तर गंभीर श्रेणी का है। उपलब्ध आधिकारिक आँकड़ों से आनंद विहार में 736 और विवेक विहार में 734 एक्यूआई होने की पुष्टि नहीं हुई है।

दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद में आधे कर्मचारी घर से करेंगे काम

सीएक्यूएम ने 30 अक्टूबर को जारी निर्देश में दिल्ली के साथ हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत तथा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में सरकारी एवं निजी कार्यालयों को कर्मचारियों की उपस्थिति सीमित करने के लिए कहा है। पांच से 20 नवंबर तक इन कार्यालयों में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारी उपस्थित रह सकेंगे। बाकी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि, ऐसे औद्योगिक प्रतिष्ठानों और आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई है, जहां घर से काम करना व्यावहारिक नहीं है। गुरुग्राम के उपायुक्त उत्तम सिंह ने तीन नवंबर को जिला स्तर पर आदेश जारी कर कार्यालयों में रोस्टर के अनुसार उपस्थिति सुनिश्चित करने और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को आदेश के पालन की नियमित निगरानी करने के लिए भी कहा गया है।

पूरे एनसीआर में निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर पाबंदी

प्रदूषण रोकने के लिए पांच नवंबर से पूरे एनसीआर में ऐसे बाहरी निर्माण और ध्वस्तीकरण कार्यों पर रोक रहेगी, जिनसे बड़ी मात्रा में धूल उत्पन्न होती है। प्रतिबंध सड़क, हाईवे, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, पाइपलाइन, विद्युत पारेषण लाइन और दूरसंचार से संबंधित कुछ निर्माण कार्यों पर भी लागू होगा। हालांकि, रेलवे, मेट्रो, हवाई अड्डों, अंतरराज्यीय बस अड्डों, अस्पतालों, जलापूर्ति, स्वच्छता, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय महत्व की निर्धारित परियोजनाओं को छूट दी गई है। इन परियोजनाओं के लिए भी धूल नियंत्रण संबंधी मानकों का पालन करना आवश्यक होगा। प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों और निर्माण एजेंसियों के खिलाफ सीएक्यूएम अधिनियम तथा अन्य लागू नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।

ग्रैप का दूसरा चरण लागू, दिल्ली मेट्रो लगाएगी 20 अतिरिक्त फेरे

प्रदूषण बढ़ने पर सीएक्यूएम ने दो नवंबर से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) का दूसरा चरण लागू कर दिया है। उस दिन दिल्ली का औसत एक्यूआई 324 पहुंच गया था। इसके बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने कार्यदिवसों में 20 अतिरिक्त फेरे लगाने का फैसला किया। इससे पहले भी पहले चरण के अंतर्गत अतिरिक्त सेवाएं शुरू की गई थीं। अब कुल अतिरिक्त फेरों की संख्या 40 हो जाएगी। इस कदम का उद्देश्य लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। ग्रैप के दूसरे चरण में सड़कों पर धूल नियंत्रण, भीड़भाड़ वाले चौराहों पर यातायात प्रबंधन, वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्रों की जांच और अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई तेज करने जैसे उपाय भी शामिल हैं।

दीपावली से पहले ही हवा खराब, अगले कुछ दिन चुनौतीपूर्ण

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने की रफ्तार भी चिंता पैदा कर रही है। सीएक्यूएम के अनुसार, 31 अक्टूबर को राजधानी का औसत एक्यूआई 117 था, जो एक नवंबर को बढ़कर 261 और दो नवंबर को 324 हो गया। तीन नवंबर को यह 350 तक पहुंच गया। यानी चार दिनों के भीतर हवा की गुणवत्ता मध्यम श्रेणी से बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई। नवंबर में तापमान घटने, हवा की गति कम होने और वातावरण की निचली परत में प्रदूषकों के जमा होने से स्थिति बिगड़ सकती है। वाहनों का धुआं, सड़क और निर्माण की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन तथा कृषि अवशेष और अन्य जैविक पदार्थों का जलना प्रदूषण के विभिन्न स्रोत हैं। हालांकि, किसी विशेष दिन के प्रदूषण में किस स्रोत की कितनी हिस्सेदारी है, यह वैज्ञानिक विश्लेषण से ही निर्धारित किया जा सकता है। सीएक्यूएम ने 2018 से 2025 तक नवंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में बार-बार अत्यधिक प्रदूषण दर्ज होने के अनुभव के आधार पर इस बार पहले से एहतियाती प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।

एक्यूआई 400 पार होने पर स्वस्थ लोगों के लिए भी खतरा

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक्यूआई को छह श्रेणियों में बांटा है। शून्य से 50 तक वायु गुणवत्ता अच्छी, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब और 401 से 500 गंभीर मानी जाती है। गंभीर श्रेणी में प्रदूषण का प्रभाव स्वस्थ व्यक्तियों पर भी पड़ सकता है, जबकि अस्थमा, सीओपीडी, हृदय रोग या दूसरी पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए खतरा अधिक होता है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण पीएम-2.5 फेफड़ों के भीतर गहराई तक पहुंच सकते हैं और हृदय तथा श्वसन प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं। छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

बच्चों और बुजुर्गों को बाहर निकलने से बचने की सलाह

प्रदूषण की गंभीर स्थिति में चिकित्सक अनावश्यक बाहरी गतिविधियां कम करने, सुबह-शाम खुले में दौड़ने या कठोर व्यायाम से बचने और जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला एन-95 मास्क इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। घरों में भी धूल, धुआं, अगरबत्ती और अन्य प्रदूषण पैदा करने वाली गतिविधियों को सीमित रखना उपयोगी हो सकता है। सांस की पुरानी बीमारी वाले मरीजों को अपनी निर्धारित दवाएं नियमित लेनी चाहिए। लगातार खांसी, सांस फूलने, सीने में दर्द या अचानक तबीयत बिगड़ने की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

दिल्ली-एनसीआर में पांच से 20 नवंबर तक लागू होने वाले प्रतिबंधों की सबसे बड़ी चुनौती उनका प्रभावी पालन सुनिश्चित करना होगा। सरकार और स्थानीय प्रशासन को निर्माण गतिविधियों, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन तथा कार्यालयों में उपस्थिति संबंधी निर्देशों की नियमित निगरानी करनी होगी। दीपावली से पहले तेजी से खराब होती हवा ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल चेतावनी जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उत्सर्जन कम करने वाले उपायों को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी है।

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सावन गुप्ता 10 साल से ज्यादा समय से पत्रकारिता में हैं। स्पोर्ट्स, मनोरंजन, पॉलिटिक्स और क्राइम से संबंधित खबरों में उनकी विशेष रुचि है। सावन ने पत्रकारिता में एडवांस डिप्लोमा किया है और वे कई अग्रणी समाचार संस्थानों में काम कर चुके हैं।

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