रेस कोर्स मस्जिद में नमाज की इजाजत नहीं, लेकिन बुलडोजर पर ब्रेक! हाईकोर्ट में क्या हुआ?

Delhi Race Course Mosque: दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद में नमाज की अनुमति पर हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली। हालांकि, केंद्र ने भरोसा दिया कि अंतिम फैसले तक मस्जिद पर तोड़फोड़ नहीं होगी। जानिए पूरा मामला।

Shalni Kumari
Published on: 29 Oct 2026 1:42 PM IST
Delhi Race Course Mosque
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Delhi Race Course Mosque: दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद (Race Course Mosque) में नमाज अदा करने की अनुमति को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में फिलहाल नमाजियों को राहत नहीं मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने 29 अक्टूबर को मस्जिद में इबादत की इजाजत देने की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने एक अहम भरोसा दिया कि मस्जिद से जुड़े ज्ञापन पर अंतिम निर्णय होने तक वहां किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। ऐसे में अब इस मामले में सरकार के फैसले और मस्जिद के भविष्य पर नजर रहेगी।

चार सप्ताह में फैसला लेने का भरोसा

जस्टिस अनीश दयाल (Justice Anish Dayal) की बेंच के सामने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (Land and Development Office-L&DO) की ओर से पक्ष रखा गया। केंद्र सरकार के स्थायी वकील आशीष दीक्षित ने अदालत को बताया कि दिल्ली वक्फ बोर्ड (Delhi Waqf Board) की ओर से सौंपे गए प्रतिवेदन (Representation) पर चार सप्ताह के भीतर फैसला लेने की कोशिश की जाएगी।

सरकार की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया कि जब तक इस प्रतिवेदन पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक मस्जिद के ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाली कोई कार्रवाई नहीं होगी। यानी फिलहाल मस्जिद पर बुलडोजर चलाने या उसे तोड़ने की कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, नमाजियों को वहां इबादत करने की अनुमति देने के सवाल पर अदालत ने तत्काल राहत नहीं दी।

मस्जिद गिरने की आशंका को लेकर दायर हुई थी याचिका

यह पूरा विवाद सैयद अहमद सऊद (Syed Ahmed Saud) की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई थी कि ऐतिहासिक मस्जिद को गिराया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने मस्जिद में आने-जाने पर कथित पाबंदियों से सुरक्षा देने की मांग भी की थी।

इससे पहले 27 अक्टूबर को हुई सुनवाई में अदालत ने इलाके में बड़े पैमाने पर चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई (Demolition Drive) का जिक्र करते हुए सवाल उठाया था कि ऐसी स्थिति में मस्जिद को सुरक्षा देने की मांग किस आधार पर की जा रही है। जवाब में याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी थी कि मस्जिद द्वितीय श्रेणी की संरक्षित इमारत (Grade-II Heritage Structure) है। इसलिए इसके स्वरूप में किसी भी तरह का बदलाव करने के लिए विरासत एवं संरक्षण समिति (Heritage Conservation Committee) की मंजूरी जरूरी है।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया था कि मस्जिद को 1977 से अधिसूचित वक्फ संपत्ति (Notified Waqf Property) का दर्जा प्राप्त है। इसके बावजूद दिल्ली वक्फ बोर्ड ने यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए कि लोगों की मस्जिद तक पहुंच बनी रहे।

सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मानता है L&DO

आजादी से पहले बनी रेस कोर्स मस्जिद नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (New Delhi Municipal Council-NDMC) की विरासत सूची में ग्रेड-2 स्मारक के तौर पर दर्ज है। दूसरी ओर, भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) का दावा है कि यह ढांचा सरकारी जमीन पर बना है और विभाग इसे अतिक्रमण (Encroachment) मानता है। इसी वजह से मस्जिद को लेकर विवाद बना हुआ है।

ध्वस्तीकरण अभियान से 700 परिवारों पर विस्थापन का खतरा

रेस कोर्स रोड इलाके में चल रहे ध्वस्तीकरण अभियान का असर आसपास रहने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई के कारण करीब 700 परिवारों के विस्थापित (Displaced) होने की आशंका है। इलाके के निवासियों को परिसर खाली करने के लिए कहा गया है और उनके लिए कुछ किलोमीटर दूर वैकल्पिक आवास (Alternative Housing) की व्यवस्था की गई है।

फिलहाल हाईकोर्ट से नमाज की अनुमति पर तत्काल राहत नहीं मिली है, लेकिन केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद मस्जिद के ढांचे पर अंतिम निर्णय से पहले कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आई है। अब दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रतिवेदन पर सरकार के फैसले और आगे होने वाली कानूनी सुनवाई से इस विवाद की दिशा तय होगी।

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