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सत्य निकेतन में फिर सज गया हॉस्टल बाजार! 7 मौतों के बाद भी नही जागा प्रशासन...मौत का खौफनाक खेल बेनकाब!
Satya Niketan Illegal Hostels: सत्य निकेतन में 7 छात्रों की मौत के बाद भी हॉस्टल कारोबार नहीं रुका। पड़ताल में 200 से ज्यादा अवैध PG, जर्जर इमारतें और सुरक्षा नियमों की अनदेखी का दावा सामने आया।
Satya Niketan Illegal Hostels: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को घटे खौफनाक हादसे ने पूरी दिल्ली को झकझोर कर रख दिया है। एक पांच मंजिला इमारत के अचानक जमींदोज होने से 7 बेकसूर छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई। इस त्रासदी के बाद हरकत में आई पुलिस ने भवन स्वामी 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता, उनकी 75 वर्षीया पत्नी उर्मिला गुप्ता और 52 वर्षीय बेटे महेश गुप्ता को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया है। प्रशासन और सरकार की ओर से इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई के लंबे-चौड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन आजतक के विशेष 'हॉस्टल डेथ' स्टिंग ऑपरेशन में जो कड़वी हकीकत सामने आई है, वह यह साबित करती है कि इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद धरातल पर कुछ भी नहीं बदला है।
पड़ताल में क्या सामने आया?
दर्दनाक घटना के महज कुछ ही घंटों बाद जब मीडिया टीम ने सत्य निकेतन के आसपास के रिहायशी इलाकों की पड़ताल की, तो नजारा बेहद चौंकाने वाला था। दुर्घटनास्थल से मुश्किल से 100 मीटर की दूरी पर 'साईं प्रॉपर्टीज' का ब्रोकर धनराज बेफिक्र होकर एक अन्य पांच मंजिला इमारत में छात्रों को कमरे दिखाता नजर आया। मात्र 8x10 फीट के बेहद तंग कमरों के लिए बिना एसी 9 से 12 हजार रुपये और एसी वाले कमरों के लिए 18 से 20 हजार रुपये तक की भारी-भरकम राशि वसूली जा रही है। कमरा लेने के लिए 1 महीने का एडवांस और 15 दिनों की दलाली भी अनिवार्य बताई गई। लेकिन असली डर किराए का नहीं, बल्कि इमारत की खस्ताहाली का है। सीढ़ियों पर अंधेरा फैला था, दीवारों से प्लास्टर उखड़ रहा था और पाइपलाइनों से पानी का रिसाव जारी था।
50 गज की नींव पर खड़ी कर दी गईं पांच-पांच मंजिलें
पड़ताल का अगला पड़ाव मोती बाग गांव की बेहद संकरी और घुमावदार गलियां थीं। वहां एक मकान की मालकिन वीरवती और उनके बेटे नवीन ने पांचवीं मंजिल पर बना एक कमरा दिखाया। यह पूरा इलाका इतना तंग है कि यदि ईश्वर न करे कभी कोई अग्निकांड या बड़ी इमरजेंसी हो जाए, तो दमकल या एम्बुलेंस का मौके पर पहुंचना नामुमकिन है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि 50 गज के छोटे-छोटे प्लॉट्स पर बने सालों पुराने मकानों की नींव को बिना मजबूत किए उनके ऊपर धड़ाधड़ नई मंजिलें ठोक दी गई हैं।
299 मकानों में चल रहे 200 से अधिक कमर्शियल हॉस्टल
क्षेत्र के एक वरिष्ठ प्रॉपर्टी डीलर ओम ने इस अवैध कारोबार का पूरा खाका उजागर किया। उनके दावे के अनुसार सत्य निकेतन क्षेत्र के कुल 299 मकानों में से 200 से अधिक में अवैध रूप से व्यावसायिक पीजी संचालित हो रहे हैं। करीब 15 से 20 साल पुराने मकानों के ढांचे पर बालकनी और छज्जे बाहर निकालकर अतिरिक्त जगह बना ली गई है। यदि इन दावों पर गौर करें तो यह साफ हो जाता है कि यह केवल एक जर्जर ढांचे का मामला नहीं है, बल्कि पूरा इलाका एक बड़े खतरे के मुहाने पर बैठा है।
आखिर हादसों का ही इंतजार क्यों करता है सिस्टम?
हर त्रासदी के बाद नगर निगम (MCD) और पुलिस प्रशासन कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे करता है। लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि सालों से जारी इस अवैध निर्माण और नियम विरुद्ध चल रहे व्यावसायिक हॉस्टलों पर पहले किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी? क्या नगर निगम के बीट अधिकारियों को इन अवैध मंजिलों की भनक नहीं थी? यदि जानकारी थी, तो समय रहते सीलिंग का चाबुक क्यों नहीं चलाया गया?
मजबूरी का फायदा उठा रहे हॉस्टल माफिया
दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेकर देश के कोने-कोने से आने वाले हजारों छात्र हॉस्टलों की सीमित सीटों के कारण निजी पीजी का रुख करने को मजबूर हैं। कॉलेज से नजदीकी और बजट की बाध्यता के कारण छात्र मजबूरी में जर्जर और असुरक्षित कमरों में रहने को विवश हो जाते हैं। मुनाफाखोर मकान मालिक इसी बेबसी का फायदा उठाकर छात्रों की सुरक्षा और जिंदगी को दांव पर लगा रहे हैं। जब तक कागजी जांच से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर सख्त कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक ये पीजी छात्रों के लिए 'डेथ ट्रैप' बने रहेंगे।


