दिल्ली में झुग्गीवासियों की बदलेगी किस्मत? 20 लाख लोगों को मिलेगा घर, जानें कौन होगा पात्र

Delhi Slum Rehabilitation Policy 2026: रेखा गुप्ता सरकार की नई झुग्गी पुनर्वास नीति के तहत दिल्ली में पात्र परिवारों को 25 वर्ग मीटर का फ्लैट मिलेगा। जानें पात्रता, 2 लाख रुपये का योगदान और जरूरी शर्तें।

Shalni Kumari
Published on: 5 Nov 2026 3:37 PM IST
Delhi Slum Rehabilitation Policy 2026
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Delhi Slum Rehabilitation Policy 2026 

Delhi Slum Rehabilitation Policy 2026: दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए इस दिवाली एक बड़ी खबर सामने आई है। सालों से कच्ची छत और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच जिंदगी गुजार रहे लोगों को अब पक्के मकान मिलने की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने झुग्गी-बस्तियों के पुनर्वास के लिए नई नीति लागू की है। इसके तहत करीब 20 लाख लोगों को आवास उपलब्ध कराने की योजना है। हालांकि, हर झुग्गी में रहने वाले व्यक्ति को मकान नहीं मिलेगा। इसके लिए सरकार ने कट-ऑफ तारीख, दस्तावेज और कई दूसरी शर्तें तय की हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किसे इस योजना का लाभ मिलेगा और मकान पाने के लिए कितनी रकम देनी होगी।

दिल्ली सरकार ने 'दिल्ली झुग्गी-झोपड़ी पुनर्स्थापन और पुनर्वास नीति, 2026' (Delhi JJ Rehabilitation and Resettlement Policy 2026) को अधिसूचित कर दिया है। चार नवंबर को दिल्ली गजट में प्रकाशित इस नीति के जरिए राजधानी की करीब 675 झुग्गी बस्तियों में रहने वाले पात्र परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। यह नीति दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) अधिनियम, 2010 के तहत जारी पुराने पुनर्वास दिशानिर्देशों और आदेशों की जगह लेगी।

2 लाख रुपये देने पर मिलेगा 25 वर्ग मीटर का फ्लैट

नई नीति के तहत पात्र परिवारों को वैकल्पिक आवास के लिए कुल 2 लाख रुपये का योगदान देना होगा। इसमें 1.5 लाख रुपये मकान के लिए और 50 हजार रुपये शुरुआती पांच साल के कॉमन एरिया मेंटिनेंस (Common Area Maintenance) के लिए निर्धारित किए गए हैं। सरकार भविष्य में अधिसूचना जारी कर इन दोनों राशियों में बदलाव भी कर सकती है।

लाभार्थियों को एक बेडरूम वाले फ्लैट दिए जाएंगे, जिनका कारपेट एरिया कम से कम 25 वर्ग मीटर होगा। मकान में बेडरूम, लिविंग रूम, किचन, बाथरूम, टॉयलेट और बालकनी की सुविधा होगी। हालांकि, बिजली, पानी, संपत्ति कर और अन्य लागू शुल्कों का भुगतान लाभार्थियों को खुद करना होगा।

1 जनवरी 2025 से पहले रहने वालों को मिलेगा लाभ

इस योजना में सबसे अहम शर्त कट-ऑफ तारीख (Cut-off Date) से जुड़ी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं झुग्गी-बस्तियों के मकानों पर पुनर्वास के लिए विचार किया जाएगा, जो एक जनवरी 2025 से पहले अस्तित्व में थे। इसके साथ ही आवेदक को निर्धारित निवास सत्यापन और अन्य पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी।

आवेदक का भारतीय नागरिक होना और उसकी उम्र कम से कम 18 साल होना जरूरी है। इसके अलावा उसका नाम एक जनवरी 2025 से पहले जारी मतदाता सूची और आधिकारिक सर्वेक्षण वाले वर्ष की मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए।

मकान के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी?

पात्रता साबित करने के लिए आवेदक के पास सरकार की ओर से निर्धारित 10 दस्तावेजों में से कम से कम एक होना चाहिए। यह दस्तावेज कट-ऑफ तारीख से पहले जारी हुआ हो और उसी पते के लिए वैध होना चाहिए।

इन दस्तावेजों में फोटो वाला राशन कार्ड, बिजली का बिल, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, बैंक या पोस्ट ऑफिस की पासबुक और सरकार की ओर से जारी अन्य निर्धारित प्रमाण पत्र शामिल हैं। आवेदक और उसके परिवार के सदस्यों का आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (Aadhaar-based Biometric Authentication) भी किया जाएगा।

हालांकि, जिन परिवारों के पास देश में कहीं भी अपना पक्का मकान है, उन्हें इस नीति का लाभ नहीं मिलेगा। सरकारी सेवा में कार्यरत या सेवानिवृत्त कर्मचारी भी इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।

एक परिवार को मिलेगा सिर्फ एक मकान

सरकार ने एक परिवार के नाम पर एक से अधिक फ्लैट आवंटित होने से रोकने के लिए भी नियम बनाया है। सामान्य तौर पर प्रत्येक पात्र परिवार को केवल एक ही मकान मिलेगा। हालांकि, यदि अलग-अलग परिवार एक ही इमारत की अलग-अलग मंजिलों पर रहते हैं, तो वे अलग-अलग आवास के लिए पात्र हो सकते हैं। इसके लिए सभी परिवारों को निर्धारित शर्तें और दस्तावेज पूरे करने होंगे।

नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि झुग्गी में रहने वाला कोई भी व्यक्ति मकान आवंटन को अपना कानूनी अधिकार बताकर दावा नहीं कर सकता। हालांकि, किसी पात्र परिवार को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए बिना उसकी झुग्गी नहीं तोड़ी जाएगी।

झुग्गी से 3 किलोमीटर दूर तक मिल सकता है मकान

नई नीति में पुनर्वास की जगह को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। सरकार की प्राथमिकता होगी कि लोगों को उनकी मौजूदा झुग्गी-बस्ती में या उसके तीन किलोमीटर के दायरे में ही बसाया जाए। लेकिन सुरक्षा, बुनियादी ढांचे, शहरी नियोजन या कानूनी कारणों से ऐसा संभव नहीं होने पर पात्र परिवारों को दिल्ली में किसी दूसरी जगह भी आवास दिया जा सकता है।

इस नियम का असर उन परिवारों पर पड़ सकता है, जिनकी रोजी-रोटी आसपास के बाजारों, कामकाज की जगहों, स्कूलों और स्थानीय समुदायों पर निर्भर है।

10 साल तक न बेच सकेंगे और न किराये पर दे सकेंगे

पुनर्वास के तहत मिलने वाले मकानों पर 10 साल का लॉक-इन पीरियड (Lock-in Period) लागू होगा। यानी इस अवधि में लाभार्थी फ्लैट को बेच या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे।

शुरुआत में मकान लीजहोल्ड (Leasehold) आधार पर आवंटित किए जाएंगे। 10 साल पूरे होने के बाद सभी बकाया भुगतान और जरूरी शर्तें पूरी होने पर बिना कन्वर्जन चार्ज के मालिकाना हक का हस्तांतरण किया जा सकता है।

लाभार्थियों को इन फ्लैटों को किराये पर देने या जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (General Power of Attorney) जैसे अनधिकृत तरीकों से किसी दूसरे व्यक्ति को कब्जा सौंपने की भी अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर उचित नोटिस और पक्ष रखने का अवसर देने के बाद आवंटन रद्द किया जा सकता है।

दोबारा सरकारी जमीन पर कब्जा किया तो रद्द होगा फ्लैट

सरकार ने यह भी साफ किया है कि पुनर्वास के बाद यदि कोई लाभार्थी दोबारा सरकारी जमीन पर कब्जा करता पाया जाता है, तो उसे आवंटित फ्लैट रद्द करने के साथ जब्त भी किया जा सकता है।

वहीं, जिन लोगों को पात्रता के आधार पर अयोग्य घोषित किया जाएगा, उनके पास फैसले के खिलाफ अपील करने का विकल्प रहेगा। इसके लिए निर्णय मिलने के 30 दिनों के भीतर अपील की जा सकती है। उचित कारण बताए जाने पर अपीलीय प्राधिकरण 180 दिनों तक की अतिरिक्त अवधि के भीतर दाखिल की गई देरी वाली अपील पर भी विचार कर सकता है।

इस तरह दिल्ली सरकार की नई पुनर्वास नीति में लाखों झुग्गीवासियों के लिए पक्के मकान का रास्ता खोला गया है, लेकिन इसका लाभ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जो तय तारीख, दस्तावेज और बाकी सभी पात्रता शर्तों को पूरा करेंगे।

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