DU के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा! लगातार दूसरी बार VC बने प्रो. योगेश सिंह, राष्ट्रपति ने लगाई मुहर

DU VC Yogesh Singh Reappointed: दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार प्रो. योगेश सिंह को लगातार दूसरी बार कुलपति नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद उनका नया कार्यकाल 8 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। जानिए इस ऐतिहासिक फैसले और उनके पहले कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां।

Harsh Srivastava
Published on: 3 July 2026 5:05 PM IST (Updated on: 3 July 2026 5:38 PM IST)
DU के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा! लगातार दूसरी बार VC बने प्रो. योगेश सिंह, राष्ट्रपति ने लगाई मुहर
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DU VC Yogesh Singh Reappointed: देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के मौजूदा कुलपति (VC) प्रो. योगेश सिंह को लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त कर दिया है. आगामी 5 वर्षों के लिए उन्हें इस गरिमामयी पद पर बने रहने का एक शानदार अवसर मिला है. यह नियुक्ति उनके पहले कार्यकाल में किए गए क्रांतिकारी शैक्षणिक और प्रशासनिक सुधारों पर सरकार के गहरे भरोसे को दर्शाती है. मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन (शिक्षा मंत्रालय) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के मुताबिक, भारत की राष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 'विज़िटर' के रूप में योगेश सिंह के इस दूसरे कार्यकाल को अपनी मंजूरी दे दी है. यह नया कार्यकाल 8 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा.

DU के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा करिश्मा

दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला और बेहद अनोखा मामला है. दरअसल, केंद्र सरकार ने लगभग 3 साल पहले यानी अक्टूबर 2023 में दिल्ली विश्वविद्यालय के नियमों (स्टैट्यूट्स) में एक बड़ा संशोधन किया था, जिसके तहत कुलपति को दोबारा नियुक्त किए जाने का प्रावधान जोड़ा गया था. इस नियम के बनने के बाद केंद्र सरकार ने पहली बार अपनी इस विशेष शक्ति का इस्तेमाल किया है और प्रो. योगेश सिंह को सीधे दूसरा कार्यकाल सौंप दिया है.

नियमों में इस बदलाव से पहले दिल्ली विश्वविद्यालय देश के उन गिने-चुने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शामिल था, जहां कुलपति को दोबारा नियुक्त करने का कोई नियम नहीं था. अगर कोई मौजूदा कुलपति दूसरा कार्यकाल चाहता था, तो उसे बाकी नए उम्मीदवारों की तरह ही नए सिरे से आवेदन करना पड़ता था. इस संशोधन के बाद अब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) देश का इकलौता ऐसा केंद्रीय विश्वविद्यालय बचा है, जहां कुलपति को दोबारा नियुक्ति का अधिकार नहीं है.

मोदी सरकार ने दी हरी झंडी

यह नया नियम भले ही हाल के वर्षों में लागू हुआ हो, लेकिन इसकी कहानी काफी पुरानी है. विश्वविद्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, कुलपति को दूसरा कार्यकाल देने का यह प्रस्ताव सबसे पहले मार्च 2014 में दिल्ली विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (EC) द्वारा पास किया गया था. उस समय दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति हुआ करते थे.

कार्यकारी परिषद से पास होने के बाद इस प्रस्ताव को यूनिवर्सिटी कोर्ट ने भी मंजूरी दी थी और फिर इसे शिक्षा मंत्रालय के पास भेज दिया गया था. लगभग 10 सालों तक यह फाइल सरकारी दफ्तरों में धूल फांकती रही, जिसे आखिरकार साल 2023 में राष्ट्रपति (विज़िटर) की मंजूरी मिली. इस नियम के तहत स्टैट्यूट 11-F(4) में बदलाव किया गया, जिसने योगेश सिंह के लिए लगातार दूसरी बार वीसी बनने का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया.पहले कार्यकाल में आए बड़े बदलाव

प्रो. योगेश सिंह ने वर्ष 2021 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार संभाला था. अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की पूरी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए कई कड़े और बड़े फैसले लिए. उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 को विश्वविद्यालय में पूरी तरह से लागू करना रहा.

इसके साथ ही उन्होंने कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) की व्यवस्था को बड़े पैमाने पर विस्तार दिया, जिससे देश भर के छात्रों के लिए डीयू में दाखिला लेना अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष हो गया. उनके ही नेतृत्व में डीयू ने चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (FYUP) को अपनाया, जो छात्रों को अपनी पढ़ाई में लचीलापन और कई विषयों को एक साथ पढ़ने की आजादी देता है. डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देकर उन्होंने कागजी कार्रवाई को कम किया और प्रशासनिक कार्यों में गजब की पारदर्शिता और तेजी लाए.

पूर्व VC प्रो. दिनेश सिंह के दौर के कुछ नियम भी हुए पास

प्रो. योगेश सिंह से पहले जब प्रो. दिनेश सिंह (2010-15) डीयू के कुलपति थे, तब वीसी के कार्यकाल को बढ़ाने के प्रस्ताव समेत विश्वविद्यालय के कई अन्य बड़े पदों जैसे 'डीन ऑफ कॉलेजेस' और 'प्रो-वाइस चांसलर' की सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) की उम्र को 65 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष करने का फैसला विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने लिया था, केंद्र सरकार ने इस बदलाव को भी अब अपनी मंजूरी दे दी है.

अब 8 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले अपने नए 5 साल के कार्यकाल में प्रो. योगेश सिंह से यह उम्मीद की जा रही है कि वे विश्वविद्यालय के विकास की इस रफ्तार को और आगे बढ़ाएंगे. उनके आने वाले कार्यकाल में नए शैक्षणिक केंद्रों की स्थापना और कॉलेजों के बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षा के वैश्विक मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान बनाए रख सके.

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हर्ष श्रीवास्तव वाराणसी के रहने वाले पत्रकार और डिजिटल कंटेंट प्रोफेशनल हैं। वर्तमान में वे लखनऊ स्थित न्यूज़ट्रैक में डेस्क इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल कोऑर्डिनेशन, न्यूज़रूम संचालन के साथ-साथ रिसर्च आधारित एक्सप्लेनर, न्यूज़ फीचर और विश्लेषणात्मक लेख तैयार करते हैं। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है। उन्होंने वर्ष 2023 में पत्रकारिता की शुरुआत की और हिन्दुस्तान, टाइम्स इंटरनेट, इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ में काम करने के दौरान उन्हें रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और डिजिटल पत्रकारिता का अनुभव प्राप्त हुआ। हर्ष की विशेष रुचि राजनीति, चुनाव, अपराध, सार्वजनिक नीति, सुशासन और समसामयिक विषयों पर शोध-आधारित पत्रकारिता में है। वे गहन रिसर्च, फैक्ट-चेकिंग और सरल भाषा के माध्यम से जटिल विषयों को पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

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