Global Warming Impact: न सर्दी में ठंड रही न गर्मी में लू चली, मौसम विभाग हुआ फेल, जानिये क्या है वजह

Global Warming Impact: दक्षिण भारत के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है और मानसून इस बार तय समय से पहले दस्तक देने की ओर बढ़ रहा है।

Ramkrishna Vajpei
Published on: 24 May 2025 11:59 AM IST
Global Warming Impact: न सर्दी में ठंड रही न गर्मी में लू चली, मौसम विभाग हुआ फेल, जानिये क्या है वजह
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Global Warming Impact

Global Warming Impact: इस साल भारत में मौसम का मिजाज काफी असामान्य रहा है। आमतौर पर मई का महीना भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार न तो गर्मी अपने चरम पर पहुंची और न ही पिछले दिसंबर में कड़ाके की ठंड पड़ी। भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी की गई लू की चेतावनियां भी उम्मीद के मुताबिक सटीक साबित नहीं हुईं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम के बिगड़ते संतुलन का सीधा परिणाम है।

मई में अप्रत्याशित मौसम और जलवायु परिवर्तन के संकेत

दक्षिण भारत के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है और मानसून इस बार तय समय से पहले दस्तक देने की ओर बढ़ रहा है। वहीं, प्री-मानसून बारिश भी तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बेतरतीब ढंग से हो रही है। मई में बार-बार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहे हैं, जो सामान्य मौसम चक्र से हटकर हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल समय से पहले और तीव्र गर्मी की भविष्यवाणी की थी, जिसमें लंबे समय तक गर्म हवाएं चलने की बात कही गई थी। देश ने हाल ही में 1901 के बाद से सबसे गर्म फरवरी देखी, साथ ही हाल के इतिहास में सबसे शुष्क सर्दियों में से एक, जिसने चल रहे जलवायु संकट के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं।

IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि इस बार मौसम का असामान्य मिजाज सीधे तौर पर वैश्विक जलवायु परिवर्तन का नतीजा है। पश्चिमी विक्षोभ की लगातार सक्रियता ने प्री-मानसून वर्षा को अनियंत्रित कर दिया है, जिससे तापमान में असामान्य गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में औसत तापमान सामान्य से तीन से पांच डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, 2025 अब तक बीते वर्षों की तुलना में कहीं अधिक अप्रत्याशित रहा है।

जेट स्ट्रीम और पश्चिमी विक्षोभ की बढ़ती सक्रियता का कारण

मानव-जनित जलवायु परिवर्तन गर्म सर्दियों और छोटे वसंत के "नए सामान्य" की ओर ले जा रहा है। हालांकि, वैज्ञानिक इस बात पर जोर देते हैं कि वार्षिक मौसम पैटर्न, जिसे "वर्ष-दर-वर्ष परिवर्तनशीलता" के रूप में जाना जाता है, अभी भी मौसमी स्थितियों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आईआईटी बॉम्बे के अर्थ सिस्टम साइंटिस्ट और प्रोफेसर रघु मुर्तुगुडे ने कहा कि दिसंबर-फरवरी के दौरान गर्म और ठंडे तापमान की विसंगतियों की वैश्विक लहर जेट स्ट्रीम के आवेगों से संबंधित है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते पृथ्वी की सतह का तापमान बढ़ा है, जिससे ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली जेट स्ट्रीम की गति और सघनता में भी परिवर्तन आया है। यह जेट स्ट्रीम लगभग नौ से 13 किलोमीटर की ऊंचाई पर पश्चिम से पूर्व की ओर बहने वाली तेज और संकरी वायुधारा होती है, जो भारत में हिमालय पर्वत के ऊपर से गुजरती है। इसके कारण पश्चिमी विक्षोभ की गतिविधियां अधिक सक्रिय हो गई हैं, जिससे एक ही हफ्ते में दो-दो बार विक्षोभ देखे गए। इसका प्रभाव यह हुआ कि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों का तापमान पूरी गर्मी में औसत से नीचे बना रहा।

अल नीनो और ला नीना का बदलता व्यवहार

अल नीनो और ला नीना चरणों की चक्रीय प्रकृति, जो अल नीनो-दक्षिणी दोलन द्वारा संचालित होती है, भी देखे गए तापमान रुझानों में योगदान करती है। आईआईटी गांधीनगर में सिविल इंजीनियरिंग के चेयर प्रोफेसर विमल मिश्रा ने कहा था, "अल नीनो जैसी स्थितियों में, आप सर्दियों के ठीक बाद गर्म वसंत या गर्म तापमान देखेंगे, जबकि यदि ला नीना का प्रभाव रहता है, तो आपको अधिक ठंडे दिन मिलेंगे।" इसका मतलब यह हुआ की ला नीना काम कर रहा है।

रिकॉर्ड तोड़ तापमान और भविष्य की चेतावनी

कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के अनुसार, मार्च 2024-फरवरी 2025 के दौरान वैश्विक तापमान 1990-2020 के औसत से 0.71 डिग्री सेल्सियस और पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.59 डिग्री सेल्सियस अधिक था। कई समुद्री घाटियों में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से उच्च रहा।

अध्ययन भविष्यवाणी करते हैं कि एक गर्म भविष्य में, अल नीनो की घटनाएं अधिक बार और तीव्र होने की संभावना है, जिसमें इनमें से आधे घटनाओं को चरम के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। 2023-24 का अल नीनो, रिकॉर्ड पर पांच सबसे मजबूत में से एक, दुनिया भर में बढ़ते तापमान और चरम मौसम को बढ़ा रहा है।भारत ने 2024 की गर्मियों में 536 लू के दिनों का सामना किया, जो 14 वर्षों में सबसे अधिक है। IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में 1901 के बाद से सबसे गर्म जून दर्ज किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रवृत्ति जारी रही तो आने वाले वर्षों में मौसम और अधिक अनियमित, अप्रत्याशित और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह स्पष्ट संकेत है कि जलवायु परिवर्तन हमारे दैनिक जीवन और कृषि चक्र को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है, जिससे भविष्य में और अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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Ramkrishna Vajpei

Ram Krishna Vajpei is a veteran cross-media journalist, political analyst, and data journalism expert whose distinguished career began in 1982. Spanning over four decades across print, broadcast (TV/Radio), and digital platforms, he specializes in rigorous research and deep analytical reporting on socio-political affairs. An authority on modern data journalism and the technical application of AI/LLMs in media, Vajpei also trains next-generation journalists and is currently pursuing a PhD in media studies. His work is defined by an absolute commitment to objectivity and a comprehensive editorial vision.

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