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Dhar Bhojshala Verdict: धार भोजशाला पर HC के आदेश से गदगद हुए गिरिराज सिंह, ओवैसी को दी 'हिंदू' होने की नसीहत
Dhar Bhojshala Verdict: धार भोजशाला पर हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद सियासत गरमा गई है। गिरिराज सिंह ने ओवैसी पर तीखा तंज कसा, जबकि AIMIM प्रमुख ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही। जानिए भोजशाला विवाद, कोर्ट के फैसले और राजनीति में मचे घमासान की पूरी कहानी।
Dhar Bhojshala Verdict: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने शुक्रवार को धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला परिसर को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इस पूरे परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर घोषित किया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने ऐतिहासिक तथ्यों, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वैज्ञानिक सर्वे और कानूनी प्रावधानों के आधार पर यह निर्णय दिया। अदालत ने कहा कि राजा भोज की विरासत से जुड़े इस स्थान पर हिंदुओं की पूजा-अर्चना की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई थी, इसलिए इसका धार्मिक स्वरूप वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर वाली भोजशाला के रूप में तय किया जाता है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का ओवैसी पर तंज
इस फैसले के बाद देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और सांसद गिरिराज सिंह ने इस निर्णय पर खुशी जाहिर करते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आज नहीं तो कल, ओवैसी को भी यह बात माननी पड़ेगी कि वे हिंदू हैं। दूसरी तरफ, असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सुप्रीम कोर्ट इस फैसले को पलट देगा। ओवैसी ने कहा कि यह मामला बाबरी मस्जिद के फैसले जैसा ही दिखाई दे रहा है।
मुस्लिम पक्ष की याचिकाएं खारिज
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और अन्य लोगों की जनहित याचिकाएं स्वीकार कर लीं। इसके साथ ही अदालत ने एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने मुस्लिम और जैन समुदायों की ओर से दायर चार अन्य याचिकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि यदि मुस्लिम समुदाय धार जिले में नई मस्जिद बनाने के लिए जमीन की मांग करता है, तो राज्य सरकार नियमों के तहत इस पर विचार कर सकती है।
ब्रिटेन से देवी की प्रतिमा लाने और SC में कैविएट का मामला
हिंदू पक्ष ने लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी वाग्देवी (सरस्वती) की मूल प्रतिमा को वापस भारत लाने और उसे भोजशाला में स्थापित करने की मांग की थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि सरकार इस संबंध में पहले से मिले आवेदनों पर विचार कर सकती है। इस बीच, हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह विशेन ने सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दाखिल कर दी है। इसमें अनुरोध किया गया है कि यदि मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाता है, तो बिना हिंदू पक्ष की बात सुने कोई भी आदेश जारी न किया जाए।
ओवैसी का दावा और 1991 के कानून का हवाला
असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी बात रखते हुए दावा किया कि यह परिसर पिछले 700 सालों से एक मस्जिद रहा है और यह वक्फ की संपत्ति है। उन्होंने 1935 के धार स्टेट गजट और 1951-52 के एएसआई रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने इसे पहले ही मुस्लिम समुदाय को सौंप दिया था। ओवैसी ने 'पूजा स्थल अधिनियम, 1991' का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस रूप में था, उसके स्वरूप को बदला नहीं जा सकता।


