TRENDING TAGS :
धीरेंद्र शास्त्री के बयान से BJP की बढ़ेगी टेंशन? अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, समझिए पूरा सियासी गणित
Dhirendra Shastri Controversy: धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के श्रीराम-श्रीकृष्ण की तुलना वाले बयान पर यूपी में सियासी विवाद तेज। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल, भाजपा ने किया पलटवार। जानिए यादव वोट बैंक से इसका कनेक्शन।
Image Source- Social Media
Dhirendra Shastri Controversy: उत्तर प्रदेश की राजनीति में भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बार विवाद की वजह बने हैं बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर और कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री। मध्य प्रदेश में एक कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए कुछ ऐसा कह दिया, जिस पर विवाद खड़ा हो गया। मामला इतना बढ़ा कि मथुरा-वृंदावन के संतों और कृष्ण भक्तों ने भी आपत्ति जताई। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वीडियो संदेश जारी कर माफी मांग ली है, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस बयान को लेकर सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है।
खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटें हैं और यहां यादव वोट बैंक (Yadav Vote Bank) लंबे समय से चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा रहा है। समाजवादी पार्टी की पहचान भी काफी हद तक यादव समुदाय से जुड़ी रही है। ऐसे में जब भगवान श्रीकृष्ण को लेकर बयान सामने आया तो समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी इस पर सवाल खड़े कर दिए। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से भी इस मामले पर जवाब दिया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नया मुद्दा बन सकता है?
आखिर धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा था?
पूरा मामला मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा का है। यहां आयोजित एक कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि श्रीराम सीधे हैं, जबकि श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े होकर खड़े होते हैं।
इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की त्रिभंग मुद्रा, बांसुरी और वृंदावन का भी जिक्र किया। साथ ही अयोध्या और वृंदावन की तुलना करते हुए अपनी बात रखी। उनके इस बयान पर सबसे पहले मथुरा-वृंदावन के संतों और कृष्ण भक्तों ने आपत्ति जताई। इसके बाद मामला धार्मिक और सामाजिक चर्चा के साथ-साथ राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बन गया।
विवाद बढ़ा तो धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी
बयान पर विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक वीडियो संदेश सामने आया, जिसमें उन्होंने अपनी टिप्पणी को लेकर सफाई दी और माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी भक्ति परंपरा और ब्रज की प्रेमपूर्ण अभिव्यक्ति के संदर्भ में थी। उनका उद्देश्य किसी भगवान का अपमान करना या दोनों के बीच किसी तरह का भेद करना नहीं था।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण एक ही परम सत्ता के स्वरूप हैं। उन्होंने खुद को भगवान श्रीकृष्ण का भक्त बताते हुए कहा कि वह भागवत कथा भी करते हैं और कृष्ण भक्ति में उनकी पूरी आस्था है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी किसी बात से किसी को ठेस पहुंची है तो वह इसके लिए माफी मांगते हैं।
हालांकि, माफी के बाद भी इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं थमती नजर नहीं आईं। इसकी एक बड़ी वजह उत्तर प्रदेश की जातीय और चुनावी राजनीति को माना जा रहा है।
यूपी में यादव वोट बैंक इतना अहम क्यों है?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों की भूमिका काफी अहम रही है। यहां धार्मिक पहचान और राजनीतिक समीकरण भी कई बार एक साथ चर्चा में आते हैं। भगवान श्रीकृष्ण को पारंपरिक रूप से यादव समुदाय से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए किसी बयान का राजनीतिक असर भी चर्चा का विषय बन जाता है।
यूपी में यादव समुदाय लंबे समय से समाजवादी पार्टी का प्रमुख समर्थक आधार रहा है। यूपी सोशल जस्टिस कमेटी के आंकड़ों के मुताबिक, अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी में यादव समुदाय की हिस्सेदारी 19.4 फीसदी है। यह आंकड़ा बताता है कि प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों में यादव समुदाय की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
समाजवादी पार्टी की राजनीति में यादव और मुस्लिम मतदाताओं का गठजोड़ लंबे समय से अहम रहा है। दिवंगत मुलायम सिंह यादव जब उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे, उसी दौर से यह समीकरण पार्टी की राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी भी लगातार यादव मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश करती रही है।
भाजपा इसके लिए सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ यादव समुदाय से आने वाले नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम करती रही है। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा यह विवाद राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है।
2022 और 2024 के चुनावी आंकड़े क्या बताते हैं?
उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक मुकाबले को समझने के लिए पिछले चुनावों के आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 111 सीटों पर जीत दर्ज की थी। पार्टी का वोट शेयर भी बढ़कर 32.76 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इस चुनाव में सपा के वोट शेयर में 10 फीसदी से ज्यादा का इजाफा दर्ज किया गया था।
इसके बाद साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से इंडिया गठबंधन ने 43 सीटें हासिल की थीं। इन नतीजों के बाद यादव और अन्य पिछड़े समुदायों के मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की भाजपा की रणनीति को लेकर भी चर्चा हुई थी।
हालांकि, इससे पहले साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में भाजपा ने 317 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी महज 47 सीटों पर सिमट गई थी।
इन चुनावी आंकड़ों के बीच मौजूदा विवाद को भी यादव समुदाय और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'ये सनातन विरोधी किसके कहने पर सक्रिय है। पहले भगवान कृष्ण के बारे में विवादित वीडियो आया अब भगवान राम के पिता के बारे अभद्रता की बात प्रसारित हो रही है। इसके राजनीतिक आकाओं को ये सब मंजूर होगा, हमें अंश मात्र भी स्वीकार्य नहीं है। सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के अपराध में इसके सभी कार्यक्रम रद्द किए जाएं। अब सच्चे सनातनी इनकी पर्ची लिखेंगे।'
अखिलेश यादव ने अपने बयान में भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम से जुड़े विवादित बयानों का जिक्र करते हुए धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रमों को रद्द करने की मांग भी की।
वहीं, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी इस मामले में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर सवाल उठाए। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि कथावाचक को सत्ता का समर्थन हासिल है और भाजपा उन्हें बचा रही है। उन्होंने पूरे देश से माफी मांगने की मांग की। साथ ही धीरेंद्र शास्त्री पर सनातन एकता को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।
भाजपा ने अखिलेश यादव के बयान पर दिया जवाब
इस पूरे विवाद के बीच भाजपा भी बचाव में उतर आई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा प्रवक्ता नवीन श्रीवास्तव ने अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव की प्रतिक्रियाओं पर सवाल उठाए।
नवीन श्रीवास्तव ने कहा, 'चुनाव आ रहे हैं, तो अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को अचानक भगवान कृष्ण याद आ गए, लेकिन अखिलेश यादव जो राम मंदिर नहीं गए और भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठा चुके हैं, क्या वह मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि जाएंगे। क्या वह कृष्ण जन्मभूमि मंदिर आंदोलन का समर्थन करते हैं या नहीं।'
इस तरह धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर शुरू हुआ विवाद अब भगवान श्रीकृष्ण, राम मंदिर और कृष्ण जन्मभूमि जैसे मुद्दों तक पहुंच गया है।
चर्चा में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का भी मामला
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या राम मंदिर से जुड़ा एक अन्य मामला भी पहले से चर्चा में है। राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं और दान की चोरी के आरोपों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई बंद कर दी है। अदालत ने कहा कि अब मामले में आरोपियों के खिलाफ स्थानीय अदालत में मुकदमा चलेगा।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की उस दलील का संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) ने इस मामले में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। इसके बाद अदालत ने राज्य सरकार को कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करने की अनुमति दी।
पीठ ने कहा, 'उत्तर प्रदेश सरकार ने एक वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल की है, जिसके अनुसार इस मामले में आरोपपत्र दायर कर दिया गया है। इसे देखते हुए हम रिट याचिका और इससे जुड़े अन्य मामलों का निपटारा करते हैं तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देश देते हैं कि वह कानून के अनुसार इस मामले में आगे की कार्यवाही करें।'
CBI जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की भी हुई थी मांग
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह समेत कई याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
याचिकाकर्ताओं ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों का फॉरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) कराने की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई बंद कर दी है और अब मामले में स्थानीय अदालत में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
फिर चर्चा में धर्म और जातीय समीकरण
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर माफी के बावजूद राजनीतिक बयानबाजी जारी है। एक तरफ अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा ने भी उनके बयानों पर पलटवार किया है।
उत्तर प्रदेश में यादव समुदाय का चुनावी महत्व, समाजवादी पार्टी की पारंपरिक राजनीतिक पहचान और भाजपा की समुदाय तक पहुंच बढ़ाने की कोशिशें इस पूरे विवाद को राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण बना रही हैं। वहीं अयोध्या राम मंदिर और मथुरा कृष्ण जन्मभूमि जैसे मुद्दे पहले से ही प्रदेश की राजनीति में संवेदनशील रहे हैं।
अब देखना होगा कि आने वाले समय में यह विवाद केवल धार्मिक और राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या उत्तर प्रदेश के चुनावी विमर्श में भी इसकी चर्चा आगे बढ़ती है।


