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भगवान कृष्ण को तीन जगह से टेढ़ा बोलने के बाद धीरेंद्र शास्त्री के बदले सुर! हाथ जोड़कर मांगी माफी
Dhirendra Shastri Apologized: भगवान कृष्ण पर विवादित बयान के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वह भाव में बोल गए थे और उनका मकसद भगवान राम और कृष्ण में भेद करना नहीं था।
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Dhirendra Shastri Apologized: भगवान श्री कृष्ण (Lord Krishna) पर दिए अपने बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सफाई दी है। उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि वह भगवान कृष्ण पर भाव में बोल गए थे और उनसे चूक हो जाती है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यह भी साफ किया कि उनका मकसद भगवान राम (Lord Ram) और भगवान कृष्ण (Lord Krishna) में किसी तरह का भेद पैदा करना नहीं था।
दरअसल, कथा सुनाने के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान राम की तुलना भगवान कृष्ण से की थी। इस दौरान उन्होंने भगवान कृष्ण के स्वरूप और उनकी मुद्रा को लेकर कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिस पर विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद अब उन्होंने अपने बयान को लेकर विस्तार से सफाई दी है।
‘हमने भाव में ठाकुर जी को उलाहना दिया था’
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने भगवान कृष्ण को लेकर जो बात कही थी, वह भाव में कही गई थी। उन्होंने कहा, “एक वीडियो जो हमने भाव में विह्वल होकर भावपूर्ण उलाहना श्री ठाकुर जी को दिया था कि हमारे राम जी सीधे हैं और ठाकुर जी टेढ़े हैं। इस पर बहुत लोगों ने अर्थ का अनर्थ निकालकर बहुत जगहों पर अनर्गल प्रलाप प्रारंभ किया।”
उन्होंने कहा कि उनकी बात को पूरे संदर्भ में समझने की जरूरत है। उनके मुताबिक, उन्होंने भगवान कृष्ण का विरोध करने के भाव से यह बात नहीं कही थी, बल्कि कथा के दौरान एक विशेष भाव और पद की व्याख्या करते हुए यह बात कही थी।
हाथ जोड़कर बोले- हम खुद ठाकुर जी के भक्त हैं
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आगे हाथ जोड़कर कहा कि वह खुद भगवान कृष्ण के भक्त हैं। उन्होंने कहा, “हम एक विनय भाव में निवेदन करें, हम खुद ठाकुर जी के भक्त हैं भईया। हम स्वयं बृज के भक्त हैं। हम खुद बृजवास चाहे थे।”
उन्होंने बताया कि जब भी वह प्रार्थना करते हैं तो भगवान कृष्ण से बृजवास मिलने की प्रार्थना करते हैं। उन्होंने कहा कि वह स्वयं श्रीमद्भागवत कथा (Shrimad Bhagwat Katha) की गाथा अपनी क्षमता के अनुसार कहते हैं और ठाकुर जी के गुणगान गाते हैं।
‘राम और कृष्ण में भेद पैदा नहीं करना चाह रहे थे’
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि उनका उद्देश्य भगवान राम और भगवान कृष्ण के बीच किसी तरह का भेद पैदा करना नहीं था। उन्होंने अपने बयान को समझाते हुए कहा कि जैसे सखियां भगवान श्री राम को उलाहना देती हैं और गोपियां भगवान श्री कृष्ण कन्हैया लाल को उलाहना देती हैं, उसी तरह उन्होंने भी भाव में ठाकुर जी को उलाहना दिया था।
उन्होंने कहा कि इसी तरह कभी विंदू जी महाराज श्री ठाकुर जी को उलाहना देते हैं और बृज के संत श्री कोकिल साईं जी श्री रघुनाथ जी को उलाहना देते हैं। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि उन्होंने भी इसी भाव में एक संत के बेहद प्रचलित पद का उल्लेख किया था।
‘बंसी बजाना खेल है, धनुष उठाना खेल नहीं’
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि उन्होंने कथा के दौरान एक प्रचलित पद के भाव में यह बात कही थी कि बंसी बजाना तो खेल है, लेकिन धनुष उठाना खेल नहीं है। उन्होंने कहा कि वह उसी भाव की व्याख्या कर रहे थे, लेकिन बहुत से लोगों ने पूरी वीडियो नहीं देखी और आधी वीडियो देखकर उन्हें कृष्ण विरोधी घोषित कर दिया।
उनका कहना था कि पूरी बात और उसके भाव को समझे बिना उनके बयान का अलग अर्थ निकाला गया। उन्होंने इसी वजह से विवाद को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि उनके शब्दों को उस संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिसमें उन्होंने कथा के दौरान यह बात कही थी।
‘हम कृष्ण विरोधी नहीं हैं’
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने साफ शब्दों में कहा कि वह भगवान कृष्ण के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने कहा, “भईया हम कृष्ण विरोधी नहीं हैं। हमारे ठाकुर जी, हम खुद कृष्ण जन्मभूमि के लिए बार-बार आवाज उठाते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि उनके नाम में भी भगवान कृष्ण का नाम जुड़ा हुआ है और उनका जीवन भी उन्हीं की वजह से है। इस बात के जरिए उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि भगवान कृष्ण को लेकर उनके मन में किसी तरह का विरोध नहीं है।
‘किसी को ठेस पहुंची तो क्षमा प्रार्थी हूं’
अपनी सफाई के आखिर में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यह भी कहा कि अगर उनकी बात, व्याख्या या भाव से किसी के मन में कोई बात आई हो या किसी को ठेस पहुंची हो तो वह विनम्र भाव से क्षमा मांगते हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था।
कथा के दौरान क्या कहा था?
दरअसल, करेरा में कथा सुनाने के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान राम और भगवान कृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए भगवान कृष्ण की मुद्रा का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि भगवान कृष्ण की तस्वीर देखने पर वह तीन जगह से टेढ़े दिखाई देते हैं। इसके बाद उन्होंने हंसते हुए भगवान कृष्ण के खड़े होने की मुद्रा और बांसुरी बजाने के अंदाज का जिक्र किया था।
उन्होंने कहा था कि पैर के ऊपर पैर, कमर लचकाए और गर्दन को तिरछा करके भगवान कृष्ण बंसी बजाते हैं। इसके बाद उन्होंने भगवान राम को लेकर कहा था कि उनके वाले सीधे खड़े होते हैं, उनका नाम भी सीधा है और उनका चलना भी सीधा है।
इसी बयान के बाद भगवान कृष्ण को लेकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी पर सवाल उठने लगे थे। अब उन्होंने सफाई देते हुए कहा है कि उनकी बात भगवान कृष्ण के विरोध में नहीं थी, बल्कि कथा के दौरान भाव में कही गई थी और वह एक प्रचलित पद की व्याख्या कर रहे थे।


